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बाजार में छाईं जयपुर-गुजरात की वंदनवार
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sat, 22 Oct 2016 12:51 AM IST
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बंधनबार
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
घराें की साफ-सफाई हो गई और रंग-रोगन का काम भी पूरा हो गया। अब सजावट पर ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन सजावट बिना वंदनवार के फीकी रहेगी। दरवाजे से प्रवेश करते ही लटकने वाले खूबसूरत वंदनवार इस बार दिल्ली मेड नहीं बल्कि गुजरात और जयपुर से आए हैं। दिवाली बाजार में इनकी अच्छी धमक दिख रही है।
सिर्फ शुभ लाभ लिखे वंदनवार अब पुराने हो गए हैं। नये-नये डिजाइन और मोतियाें से बने इन आयटमों की खूबसूरती देखते बन रही है। जयपुर से आए वंदनवार में खास वहां की लोक कृति और संस्कृति झलकती है। जैसी डिजाइन जयपुर के खास किस्म के परिधानाें में होती है ठीक उन्हीं कपड़ों और डिजाइन से इसे सजाया गया है। कपड़ों पर कौड़ियों की सजावट की गई है। इनकी शुरुआत 150 से लेकर 1500 रुपये तक है। गुजरात और जयपुर के वंदनवार 250 रुपये से शुरू होते हैं। दिल्ली मेड आयटम की मांग इस बार कम है। सिविल लाइंस में बीते कई सालाें से वंदनवार का कारोबार कर रहे सौरभ ने बताया कि नये वंदनवार काफी पसंद किए जा रहे हैं।
पर्दे भी नये अवतार में
सिर्फ कपड़ों के पर्दे अब पुराने हो गए हैं। झालर वाले पारदर्शी परदे डिमांड में हैं। ये मोतियों के बजाय विशेष गोटे और तारों से बने हैं। इसकी कीमत भी 350 रुपये है।
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सिर्फ शुभ लाभ लिखे वंदनवार अब पुराने हो गए हैं। नये-नये डिजाइन और मोतियाें से बने इन आयटमों की खूबसूरती देखते बन रही है। जयपुर से आए वंदनवार में खास वहां की लोक कृति और संस्कृति झलकती है। जैसी डिजाइन जयपुर के खास किस्म के परिधानाें में होती है ठीक उन्हीं कपड़ों और डिजाइन से इसे सजाया गया है। कपड़ों पर कौड़ियों की सजावट की गई है। इनकी शुरुआत 150 से लेकर 1500 रुपये तक है। गुजरात और जयपुर के वंदनवार 250 रुपये से शुरू होते हैं। दिल्ली मेड आयटम की मांग इस बार कम है। सिविल लाइंस में बीते कई सालाें से वंदनवार का कारोबार कर रहे सौरभ ने बताया कि नये वंदनवार काफी पसंद किए जा रहे हैं।
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पर्दे भी नये अवतार में
सिर्फ कपड़ों के पर्दे अब पुराने हो गए हैं। झालर वाले पारदर्शी परदे डिमांड में हैं। ये मोतियों के बजाय विशेष गोटे और तारों से बने हैं। इसकी कीमत भी 350 रुपये है।
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