IVRI Bareilly: आईवीआरआई की लैब को मिलेगा एनएबीएल प्रमाणपत्र, दुनिया में मान्य होगी जांच रिपोर्ट
बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान की जांच रिपोर्ट जल्द दुनियाभर में मान्य होगी। संस्थान में लैब बन रही है। इसके लिए एनएबीएल प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया है।
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बीते 55 वर्षों से पशुओं के लिए ईजाद की गई स्वदेशी और आयातित वैक्सीन की गुणवत्ता परख रहे भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली की जांच रिपोर्ट जल्द दुनियाभर में मान्य होगी। पांच करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हो रही लैब के लिए नेशनल एक्रेडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) प्रमाणपत्र के लिए संस्थान के जैविक मानकीकरण विभाग ने आवेदन किया है।
आईवीआरआई इज्जतनगर में वर्ष 1969 में स्थापित जैविक मानकीकरण विभाग वैक्सीन क्वालिटी कंट्रोल का कार्य कर रहा है। यहां उन्हीं वैक्सीन की जांच होती है जो राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में इस्तेमाल होती है।
साथ ही, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) द्वारा विदेश से आयातित वैक्सीन की भी जांच की जाती है। कई नैदानिकी की गुणवत्ता भी परखी जाती है। करीब चार माह में नई लैब का संचालन शुरू होगा। दावा है कि यहां जांच के मानक विश्वस्तरीय होंगे। एनएबीएल सर्टिफिकेट हासिल करने की प्रक्रिया लंबी है। लिहाजा, अभी आवेदन कर दिया गया है।
संस्थान को 1.10 करोड़ की हुई आय
वित्तीय वर्ष 2024-25 में वैक्सीन की जांच, विभिन्न संस्थानों को सेल कल्चर आपूर्ति से अब तक आईवीआरआई को 1.10 करोड़ रुपये की आय हुई है। बीते आठ माह में संस्थान ने एफएमडी के 25, ब्रूसोलिस के तीन, पीपीआर के 82, सीएसएफ के 82 बैच की जांच से 96.60 लाख, डीसीजीआई से भेजे गए 377 नमूनों की जांच से 8.78 लाख, संस्थानों को 31 सेल कल्चर आपूर्ति से 8.78 लाख रुपये अर्जित किया है।
तीन करोड़ से बना है भवन, दो करोड़ के लगेंगे संसाधन
जैविक मानकीकरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रणव धर के मुताबिक ती करोड़ रुपये के बजट से लैब का भवन लगभग बन चुका है। अब दो करोड़ के बजट से जांच उपकरण और जरूरी संसाधन स्थापित किए जाएंगे। वैक्सीन जांच क्षमता बढ़ने से संस्थान की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
डॉ. प्रणव धर के मुताबिक यहां स्वदेशी और दूसरे देशों से आयातित वैक्सीन की गुणवत्ता का परीक्षण होता है। देश की कई निजी कंपनियों और सरकारी प्रयोगशालाओं में तैयार होने वाली वैक्सीन के शुरुआती तीन बैच का परीक्षण जैविक मानकीकरण विभाग करता है। यहां से सफल होने पर ही वैक्सीन को बाजार में बिक्री का लाइसेंस मिलता है।
टीकाकरण मुहिम की सफलता के लिए वैक्सीन का गुणवत्तापूर्ण होना जरूरी है। निर्माणाधीन लैब के संचालन के साथ देश की जरूरत के मुताबिक वैक्सीन की जांच और उसकी आपूर्ति हो सकेगी। रिपोर्ट की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए एनबीएल सर्टिफिकेट भी लिया जाएगा। - डॉ. त्रिवेणी दत्त, निदेशक, आईवीआरआई