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आईवीआरआई : ''''रेगिस्तान के जहाज'''' की शारीरिक संरचना पढ़ेंगे विद्यार्थी
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बरेली। रेगिस्तान के जहाज के नाम से पहचाने जाने वाले ऊंट की शारीरिक संरचना लोगाें के लिए आज भी पहेली है। भारी भरकम शरीर के बावजूद कई दिन बगैर भोजन, पानी के जीवित रह सकने वाले इस जीव की शारीरिक संरचना का अब आईवीआरआई के विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर के पशु संरचना (एनिमल एनाटॉमी) विभाग में विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए अब ऊंट का कंकाल रखा गया है। विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमरपाल सिंह के मुताबिक सितंबर 2023 में रामपुर में सड़क दुर्घटना के दौरान एक ऊंट की मौत हुई थी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर पोस्टमार्टम के लिए शव आईवीआरआई लाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव को पशुपालक दफनाते या जला देते, जबकि इसके कंकाल का अध्ययन कर कई जानकारियां हासिल की जा सकती थी। इसलिए पशुपालक से शवदान का अनुरोध किया।
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स्वीकृत के बाद विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी कर अब कंकाल विभाग में स्थापित हुआ। आगामी सत्र से बीवीएससी, एमवीएससी, पीएचडी के लिए देश-विदेश से प्रवेशित विद्यार्थियों को ऊंट की शारीरिक संरचना के बारे में अध्ययन का मौका मिलेगा।
साल भर मिट्टी में दबाया शव
निकलीं छोटी-बड़ी 210 हड्डियां
डॉ. अमरपाल के मुताबिक ऊंट के कंकाल को तैयार करने के लिए इसे वर्ष भर 15 फीट चौड़े और 15 फीट गहराई में मिट्टी में दबाया। इसके बाद संरचना आधार के लिए मिट्टी से छोटी-बड़ी 210 हड्डियां निकालीं गई। इसकी गंध दूर करने और निखारने के लिए केमिकल से पॉलिश की गई। फिर सभी हड्डियों को स्क्रू, पेच, लोहे की रॉड आदि के माध्यम से जोड़कर संरचना तैयार की।
कूबड़ नहीं, बल्कि वसा के
जरिये जीवित रहता है ऊंट
वन्य जीव विभाग प्रभारी प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक ऊंट एक बार भरपेट भोजन करने और पानी पीने के बाद 40 दिन तक बगैर कुछ खाए-पिए जीवित रह सकता है। अक्सर लोगों में ये भ्रम होता है कि ये कूबड़ में पानी को जमा कर लेता है, पर ऐसा नहीं है। कूबड़ में वसा जमा रहती है। जब उसे भोजन की जरूरत होती है तो ऊंट का शरीर वसा को पचाकर जीवित रहता है।
एनाटॉमी विभाग में शेर चीता, हाथी के हैं कंकाल
डॉ. अमरपाल के मुताबिक संस्थान में पशुओं की एनाटॉमी का अध्ययन वर्ष 2015 में शुरू हुआ। उसी दौरान स्नातक डिग्री के लिए बैचलर ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल हसबेंडरी (बीवीएससी एंड एएच) शुरू हुआ। विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक जानकारी देने के लिए मरे हुए पशुओं की हड्डियों के ढांचे तैयार किए। यहां शेर, चीता, अजगर, गाय, कुत्ते, हिरण, हाथी, नीलगाय, आदि पशुओं के कंकाल रखे गए हैं।
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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर के पशु संरचना (एनिमल एनाटॉमी) विभाग में विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए अब ऊंट का कंकाल रखा गया है। विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमरपाल सिंह के मुताबिक सितंबर 2023 में रामपुर में सड़क दुर्घटना के दौरान एक ऊंट की मौत हुई थी।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर पोस्टमार्टम के लिए शव आईवीआरआई लाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव को पशुपालक दफनाते या जला देते, जबकि इसके कंकाल का अध्ययन कर कई जानकारियां हासिल की जा सकती थी। इसलिए पशुपालक से शवदान का अनुरोध किया।
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स्वीकृत के बाद विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी कर अब कंकाल विभाग में स्थापित हुआ। आगामी सत्र से बीवीएससी, एमवीएससी, पीएचडी के लिए देश-विदेश से प्रवेशित विद्यार्थियों को ऊंट की शारीरिक संरचना के बारे में अध्ययन का मौका मिलेगा।
साल भर मिट्टी में दबाया शव
निकलीं छोटी-बड़ी 210 हड्डियां
डॉ. अमरपाल के मुताबिक ऊंट के कंकाल को तैयार करने के लिए इसे वर्ष भर 15 फीट चौड़े और 15 फीट गहराई में मिट्टी में दबाया। इसके बाद संरचना आधार के लिए मिट्टी से छोटी-बड़ी 210 हड्डियां निकालीं गई। इसकी गंध दूर करने और निखारने के लिए केमिकल से पॉलिश की गई। फिर सभी हड्डियों को स्क्रू, पेच, लोहे की रॉड आदि के माध्यम से जोड़कर संरचना तैयार की।
कूबड़ नहीं, बल्कि वसा के
जरिये जीवित रहता है ऊंट
वन्य जीव विभाग प्रभारी प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक ऊंट एक बार भरपेट भोजन करने और पानी पीने के बाद 40 दिन तक बगैर कुछ खाए-पिए जीवित रह सकता है। अक्सर लोगों में ये भ्रम होता है कि ये कूबड़ में पानी को जमा कर लेता है, पर ऐसा नहीं है। कूबड़ में वसा जमा रहती है। जब उसे भोजन की जरूरत होती है तो ऊंट का शरीर वसा को पचाकर जीवित रहता है।
एनाटॉमी विभाग में शेर चीता, हाथी के हैं कंकाल
डॉ. अमरपाल के मुताबिक संस्थान में पशुओं की एनाटॉमी का अध्ययन वर्ष 2015 में शुरू हुआ। उसी दौरान स्नातक डिग्री के लिए बैचलर ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल हसबेंडरी (बीवीएससी एंड एएच) शुरू हुआ। विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक जानकारी देने के लिए मरे हुए पशुओं की हड्डियों के ढांचे तैयार किए। यहां शेर, चीता, अजगर, गाय, कुत्ते, हिरण, हाथी, नीलगाय, आदि पशुओं के कंकाल रखे गए हैं।