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आईवीआरआई ओवरब्रिजः आरडीएसओ ने फेल किए सीमेंट के बने गार्डर
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आईवीआरआई ओवरब्रिज।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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मानकों के मुताबिक नहीं बने हैं सीमेंट के गार्डर
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बरेली। आईवीआरआई ओवरब्रिज पर लगाने के लिए तैयार सीमेंट के गार्डर रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) के मानकों के मुताबिक नहीं बने हैं। लिहाजा छह महीने बाद भी ओवरब्रिज पर गार्डर नहीं लगाए जा सके हैं। इसके अलावा आरपीएफ भी ठेकेदार की लेबर को परेशान कर रही है। इससे लेबर यहां आना नहीं चाहती है। लेबर ने मौखिक रूप से कई बार इसकी शिकायत भी की है।
आईवीआरआई ओवरब्रिज के ऊपरी हिस्से का निर्माण अभी तक पूरा होने में नहीं आ रहा है। कभी लेबर की समस्या, तो कभी क्रेन न होना, इसके बाद लॉकडाउन। सूत्रों का कहना है कि अब सीमेंट के गार्डर आरडीएस के मानकों के मुताबिक न बनाए जाने से काम लटक गया है। इनकी चौड़ाई कम होने की वजह से गार्डर रखने की अनुमति नहीं मिली है, जबकि मई में शहर की बाकी सभी अधूरी परियोजनाओं का काम शुरू हो चुका है, लेकिन इस ओवरब्रिज का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। इसके अलावा ठेकेदार की लेबर को सामान रखने के लिए आरपीएफ भी परेशान करती है। इसकी वजह से लेबर यहां आना नहीं चाहती है। दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार की लेबर पश्चिम बंगाल चली गई है। अब नई लेबर मिले तब ही काम शुरू होगा। गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में प्रमुख सचिव नवनीत सहगल के नाराजगी जताने के बाद रेलवे ने नौ जनवरी को लोहे के गार्डर रखने शुरू किए थे। 18 जनवरी तक गार्डर रखे जाने थे, लेकिन पानी बरसने के बाद काम टल गया। बाद में 25 जनवरी तक सभी दस गार्डर रख दिए गए। अगले महीने से सीमेंट के गार्डर रखे जाने थे, लेकिन यह काम शुरू नहीं हुआ।
आईवीआरआई ओवरब्रिज के ऊपरी हिस्से का निर्माण अभी तक पूरा होने में नहीं आ रहा है। कभी लेबर की समस्या, तो कभी क्रेन न होना, इसके बाद लॉकडाउन। सूत्रों का कहना है कि अब सीमेंट के गार्डर आरडीएस के मानकों के मुताबिक न बनाए जाने से काम लटक गया है। इनकी चौड़ाई कम होने की वजह से गार्डर रखने की अनुमति नहीं मिली है, जबकि मई में शहर की बाकी सभी अधूरी परियोजनाओं का काम शुरू हो चुका है, लेकिन इस ओवरब्रिज का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। इसके अलावा ठेकेदार की लेबर को सामान रखने के लिए आरपीएफ भी परेशान करती है। इसकी वजह से लेबर यहां आना नहीं चाहती है। दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार की लेबर पश्चिम बंगाल चली गई है। अब नई लेबर मिले तब ही काम शुरू होगा। गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में प्रमुख सचिव नवनीत सहगल के नाराजगी जताने के बाद रेलवे ने नौ जनवरी को लोहे के गार्डर रखने शुरू किए थे। 18 जनवरी तक गार्डर रखे जाने थे, लेकिन पानी बरसने के बाद काम टल गया। बाद में 25 जनवरी तक सभी दस गार्डर रख दिए गए। अगले महीने से सीमेंट के गार्डर रखे जाने थे, लेकिन यह काम शुरू नहीं हुआ।
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सीमेंट के गार्डर मानकों के अनुसार ही बने हैं। दिक्कत लॉकडाउन में लेबर के चले जाने की वजह से है। जल्द ही काम शुरू होगा। - राजेंद्र सिंह, पीआरओ इज्जतनगर रेलमंडल
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कौन रुपये मांगता है, ठेकेदार की लेबर ने कोई लिखित शिकायत नहीं की है। मौखिक किसी पर आरोप लगाना आसान है। जांच कराऊंगा, अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। - प्रमोद कुमार, सहायक मंडल सुरक्षा आयुक्त, इज्जतनगर रेल मंडल