औषधीय खेती ने बदल दी महेन्द्र की दुनिया
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महेन्द्र ने बताया कि शरीर के किसी भी हिस्से से बहते खून को रोकने की क्षमता रखने वाले कैक्टस प्रजाति के खूनखराबा, थाईलैंड, बैंकांक में पाई जाने वाली बांस प्रजाति के वंशलोचन, ठंडे क्षेत्रों में पाया जाने वाला कांकड़ा सिंघी और सिर पर बाल उगाने की क्षमता रखने वाला चिरमिट भी उनके पास है। एमएससी और बीएड डिग्रीधारक महेंद्र बताते हैं कि 15 साल पहले नौकरी छोड़कर उन्होंने पैतृक गांव विशनपुर में 15 एकड़ भूमि पर औषधीय पौधों की खेती शुरू की थी। सबसे पहले सतावर की खेती की। महज तीन से चार साल में ही एक करोड़ रुपये की आय उससे हासिल की। इसके बाद ठान लिया कि अब औषधीय पौधों की खेती करनी हैं और दुर्लभ प्रजाति के औषधीय पौधों की खेती शुरू कर दी। अपनी भूमि कम पड़ी तो उन्होंने 10 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती आगे बढ़ाई। वह दुर्लभ पौधों की खोज में कर्नाटक, केरल, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ भी जाते हैं। करीब 50 से ज्यादा औषधीय प्रजाति के पौधे उनकी पौधशाला में हैं। महेंद्र कहते हैं कि वह चाहते हैं कि हर किसान अपने खेत में औषधीय पौधे लगाए। इसके लिए वह नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराने के लिए भी तैयार हैं। इनकी खेती से किसान अच्छी आय हासिल कर सकते हैं।