फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   IVRI found easy treatment to add animal bone

अब आसानी से जुड़ पाएगी जानवरों की हड्डी, आईवीआरआई ने ढूंढी खास तकनीक

Fri, 27 Nov 2020 11:53 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Fri, 27 Nov 2020 11:53 AM IST
सार

शल्य चिकित्सा विभाग ने बनाया अनूठा शिकंजा, शोध कराया पेटेंट

विज्ञापन
IVRI found easy treatment to add animal bone
आईवीआरआई - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बरेली। राष्ट्रीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने गाय-भैंस सहित बड़े जानवरों की टूटी हड्डी जोड़ने के लिए खास तरह का शिकंजा (फिक्सेटर) बनाया है। इसकी विशेषता यह है कि पशुओं के चलने फिरने के बावजूद हड्डी अपनी जगह से हिलती नहीं है और तय समय में जुड़ जाती है। आईवीआरआई ने अपने शल्य चिकित्सा विभाग के इस शोध को हाल में पेटेंट भी करा लिया है।

विज्ञापन
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि कुत्ता, बकरी सहित अन्य छोटे जानवरों की हड्डी जोड़ने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती, मगर गाय-भैंस सहित दूसरे बड़े जानवरों की हड्डी टूटने पर उन्हें जोड़ना आसान नहीं था। सबसे बड़ी परेशानी जानवरों की टूटी हड्डी के नाप का शिकंजा तैयार करने और उसे पशुओं में फिट करने में होती थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जानवरों को एक जगह पर नहीं बैठाया जा सकता। हड्डी जोड़ने के लिए दो से तीन महीने का समय चाहिए होता है और इतने वक्त टूटी हड्डी को एक जगह जोड़े रखना परंपरागत शिकंजों से संभव नहीं हो पा रहा था।
विज्ञापन


इसे देखते हुए आईवीआरआई के शल्य चिकित्सा विभाग के वैज्ञानिकों ने हाल ही में जानवरों की हड्डी जोड़ने के लिए खास तरह का शिकंजा तैयार कर लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि टूटे अंग में इस शिकंजे को जोड़ने के बाद पशुओं के चल-फिरने के बावजूद भी टूटी हड्डी नहीं हिलती। पशुओं के उपचार के लिए यह तरीका काफी कारगर साबित हो रहा है। शल्य चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमरपाल ने आईवीआरआई के इस शोध की रिपोर्ट पहले चेन्नई भेजी थी। वहां से अनुमति मिलने के बाद इस शोध को पेटेंट करा लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पशुपालकों को मिली बड़ी राहत, बेचना नहीं होगी मजबूरी
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि पशुओं की पैर की हड्डी टूटने के बाद उसका इलाज न हो पाने से ज्यादातर पशुपालक उसे कसाई को बेच देते थे। जबकि आईवीआरआई के शोध के बाद पशुपालकों को काफी राहत मिली है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हड्डी जोड़ने के लिए शिकंजे की संरचना को स्थानीय सामग्री की मदद से बनाया है। ऐसे में इसका इलाज भी महंगा नहीं है।

बड़े पशुओं की हड्डी को अब आसानी से जोड़ा जा सकेगा। आईवीआरआई ने इसके लिए खास तरह का शोध किया है। इसका पेटेंट भी करा लिया गया है। -डॉ. अमरपाल, विभागाध्यक्ष, शल्य चिकित्सा विभाग, आईवीआरआई

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed