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हिंदी की स्मारिका प्रकाशित करके वैज्ञानिकों के शोध आमजन तक पहुंचाता है आईवीआरआई
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हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
बैंक और पीएफ कार्यालय सहित अन्य विभागों में हिंदी को बढ़ावा देने के हो रहे प्रयास
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बरेली। बैंक सहित कई सरकारी दफ्तरों में राष्ट्रभाषा हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए नित नए प्रयास किए जा रहे हैं। विभागों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कई अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी भी सौंपी गई है कि वे हिंदी के उत्थान और उसकी स्वीकार्यता को और बढ़ावा देने के लिए काम करें। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में चूंकि ज्यादातर शोध कार्यों को अंग्रेजी में करने की बाध्यता होती है, लेकिन यह शोध आमजन तक कैसे पहुंचें, इसके लिए आईवीआरआई का राज्यभाषा विभाग शोधों को पत्रिका के जरिए हिंदी में प्रकाशित करता है। इसी तरह बैंकों में भी हिंदी को बढ़ावा देने के लिए राजभाषा अधिकारियों को इसका जिम्मा दिया गया है। ऐसे में सरकारी विभागों में ढेरों काम और पत्राचार हिंदी में होने शुरू हो गए हैं।
शोध को हिंदी भाषा के माध्यम से पहुंचाने के लिए आईवीआरआई छापता है राजभाषा स्मारिका: सुजाता जेठी
आईवीआरआई में राजभाषा उपनिदेशक के तौर पर काम कर रहीं सुजाता सेठी का कहना है कि उन्हें इस पर गर्व है कि उन्होंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर आज सरकार के उच्च पद पर रहते हुए हिंदी की सेवा करने का मौका मिला है। उनका कहना है कि आईवीआरआई एक शोध का बहुत बड़ा संस्थान है। इसलिए यहां शोध में अंग्रेजी को पूरी तरह से नकारना मुमकिन नहीं है, लेकिन संस्थान प्रयास कर रहा है कि सालभर में जो भी शोध हों उन्हें हिंदी भाषा के माध्यम से लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सके। इसके लिए संस्थान लंबे समय से शालिहोत्र दर्शन नाम की एक राजभाषा स्मारिका का प्रकाशन करता है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध के साथ उनके विचार आदि को जगह दी जाती है। बाद में यह स्मारिका सभी वैैैज्ञानिक और छात्रों को भी दी जाती है। सुजाता सेठी का कहना है कि इस पत्रिका की लोकप्रियता को देखते हुए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति इसे पुरस्कृत भी कर चुकी है। उनका कहना है कि राजभाषा को बढ़ावा देने के लिए राजभाषा विभाग तमाम निबंध, लेखन से जुड़ी प्रतियोगिताएं कराता है, जिसमें संस्थान में कार्यरत वैज्ञानिक सहित अन्य कर्मचारी बढ़चढ़ हिस्सा लेते है। उनका कहना है कि कोविड की वजह से बायोमैट्रिक उपस्थिति नहीं लग रही तो स्टाफ से हिंदी में ही हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। ऐसे ही छोटे-बड़े प्रयासों को मिलाकर हिंदी को और भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
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शोध को हिंदी भाषा के माध्यम से पहुंचाने के लिए आईवीआरआई छापता है राजभाषा स्मारिका: सुजाता जेठी
आईवीआरआई में राजभाषा उपनिदेशक के तौर पर काम कर रहीं सुजाता सेठी का कहना है कि उन्हें इस पर गर्व है कि उन्होंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर आज सरकार के उच्च पद पर रहते हुए हिंदी की सेवा करने का मौका मिला है। उनका कहना है कि आईवीआरआई एक शोध का बहुत बड़ा संस्थान है। इसलिए यहां शोध में अंग्रेजी को पूरी तरह से नकारना मुमकिन नहीं है, लेकिन संस्थान प्रयास कर रहा है कि सालभर में जो भी शोध हों उन्हें हिंदी भाषा के माध्यम से लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सके। इसके लिए संस्थान लंबे समय से शालिहोत्र दर्शन नाम की एक राजभाषा स्मारिका का प्रकाशन करता है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध के साथ उनके विचार आदि को जगह दी जाती है। बाद में यह स्मारिका सभी वैैैज्ञानिक और छात्रों को भी दी जाती है। सुजाता सेठी का कहना है कि इस पत्रिका की लोकप्रियता को देखते हुए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति इसे पुरस्कृत भी कर चुकी है। उनका कहना है कि राजभाषा को बढ़ावा देने के लिए राजभाषा विभाग तमाम निबंध, लेखन से जुड़ी प्रतियोगिताएं कराता है, जिसमें संस्थान में कार्यरत वैज्ञानिक सहित अन्य कर्मचारी बढ़चढ़ हिस्सा लेते है। उनका कहना है कि कोविड की वजह से बायोमैट्रिक उपस्थिति नहीं लग रही तो स्टाफ से हिंदी में ही हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। ऐसे ही छोटे-बड़े प्रयासों को मिलाकर हिंदी को और भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
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बैंक स्टाफ में हिंदी की अलख जगाने के लिए होती रहती हैं गतिविधियां: प्रशांत सिंह शाक्य
पंजाब नेशनल बैंक मंडल कार्यालय में राजभाषा प्रभारी के तौर पर कम कर रहे प्रशांत सिंह शाक्य का कहना है कि आज हिंदी एक ऐसी भाषा है जो देश की आत्मा होने के साथ ही सभी देशवासियों को एक सूत्र में पिरोए रख सकती है। बैंकों में भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देनेे के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। नतीजा है कि बैंकों में तमाम पत्राचार अब हिंदी में होने प्रारंभ हो रहे हैं। प्रशांत सिंह शाक्य का कहना है कि बैंक के अधिकारी से लेकर कर्मचारियों व अन्य स्टाफ में हिंदी को लेकर अलख जगाए रखने के लिए बैंक का राजभाषा विभाग तमाम गतिवधियां संचालित कराता है। चाहते हिंदी में किसी बड़े मुद्दे को लेकर लेखन हो या लोगों के अंदर हिंदी प्रतिभा को बाहर निकालने के लिए निबंध या कविता से जुड़ाव हो, इसके लिए राजभाषा विभाग अपने सभी बैंक की शाखाओं के स्टाफ को इसमें शामिल कर हिंदी की तमाम प्रतियोगिताओं को आयोजित करता है।
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