भेड़िये क्यों बन जाते हैं आदमखोर?: IVRI वैज्ञानिक ने बताई वजह, पकड़ने के लिए करना पड़ेगा ये काम
बहराइच जिले में इन दिनों भेड़ियों ने आतंक मचा रखा है। अब तक कई लोगों पर हमला चुके हैं। भेड़ियों के हमले पर शोध कर रहे आईवीआरआई के वैज्ञानिक का कहना है कि भेड़ियों के हमलों को रोकने के लिए पहले अल्फा (मुखिया) भेड़िये को पकड़ना होगा।
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उत्तर प्रदेश के बहराइच में इन दिनों भेड़ियों का आतंक है। भेड़िये आमतौर पर मनुष्यों पर हमला नहीं करते। उनके झुंड या कुनबे पर कोई हमला कर दे तो अल्फा भेड़िये (मुखिया) के नेतृत्व में वे बदला लेने निकल पड़ते हैं। अल्फा भेड़िया जब तक पकड़ से बाहर रहेगा, उसके समूह के भेड़िये हमले करते रहेंगे।
हाल ही में बहराइच समेत आसपास के जिलों में हुए भेड़िये के हमलों का अध्ययन कर रहे भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर के वन्य प्राणी उद्यान के प्रभारी डॉ. अभिजीत पावड़े ने ये बातें कहीं। उन्होंने आशंका जताई कि बहराइच में किसी व्यक्ति ने भेड़िये पर जानलेवा हमला किया होगा।
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जख्मी हालत में वह कुनबे में पहुंचा होगा। संभवत: वह अल्फा भेड़िया रहा होगा। इसके बाद मनुष्यों से खतरा भांपकर झुंड ने हमला शुरू किया होगा। इस पर अंकुश लगाने के लिए सभी भेड़ियों को पकड़ने की जरूरत नहीं। अल्फा भेड़िये के पकड़ में आने से हमले थम सकते हैं।
डॉ. पावड़े के मुताबिक भेड़िये समूह में रहते हैं। जब मनुष्यों ने इन्हें रोकने का प्रयास किया तो खतरा भांपकर इनमें से कोई भेड़िया दूसरे जिले में पहुंचा होगा। वहां उसका किसी मनुष्य से टकराव हुआ होगा। डॉ. पावड़े के मुताबिक इसमें भेड़िये ने भी जवाबी हमला किया होगा।
पिंजरे में रखें मादा पशु, गंध सूंघकर आएगा भेड़िया
वैज्ञानिकों के अनुसार भेड़िये को पकड़ने के लिए संबंधित क्षेत्र में आईआर (इंफ्रा रेड) ट्रैप कैमरे लगाए जाएं। पिंजरे में पड्डे या अन्य किसी पशु के बजाय गर्भवती मादा पशु को रखा जाए। उसकी गंध सूंघकर भेड़िया उसके पास जल्दी पहुंचेगा। आबादी में ‘जागते रहो’ की गूंज हो।
प्राकृतिक आवास छिनना भी हमले की वजह
डॉ. पावड़े ने घटते वन क्षेत्र, बाघों की बढ़ती तादाद को भी भेड़ियों के आक्रामक होने की वजह बताई। कहा कि प्राकृतिक आवास के साथ बाघों ने उनका शिकार भी छीन लिया। खुद शिकार न बन जाएं, इसलिए भेड़िये जंगल के बाहर निकल रहे हैं। वहां उनका सामना भेड़, बकरियों व मनुष्यों से हो रहा है। भेड़, बकरियों को आहार बनाकर ये अपनी भूख मिटा रहे हैं। वहीं, खतरे का अहसास होने पर वे मनुष्यों पर हमला कर रहे हैं।
आईवीआरआई के पशु पोषण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. असित दास के मुताबिक बहराइच और अन्य जिलों में हुई घटनाएं पहली बार नहीं हो रहीं। इससे पूर्व भी डेढ़ सौ वर्षों में कई बार भेड़िये आदमखोर हुए हैं। इनमें कई लोगों की जान गई।
- वर्ष 1878 में उत्तर प्रदेश में 624 लोगों पर हमला।
- वर्ष 1900 में मध्य प्रदेश (सेंट्रल प्रोविंस) में 285 लोगों पर हमला।
- वर्ष 1900 में ही बंगाल में 14 लोगों पर हमला।
- वर्ष 1910-1915 तक दिल्ली के हजारीबाग में 315 लोगों पर हमला।
- वर्ष 1980-1986 तक हजारीबाग में ही 120 बच्चों पर हमला।
- वर्ष 1993-1995 के बीच झारखंड में 80 लोगों पर हमला।
- वर्ष 1996 में प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, जौनपुर में 21 बच्चों पर हमला।