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इंटरनेशनल सिटी : तत्कालीन एसडीएम व बीडीए के चार पूर्व अधिकारी भी फंसे

Mon, 05 Sep 2022 12:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2022 12:05 AM IST
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International City: Sword of action on five officers
बरेली। छह सौ एकड़ में लगभग पूरी तरह बस चुकी इंटरनेशनल सिटी कॉलोनी के निर्माण के दौरान सरकारी महकमों में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। अब तक कई बार हो चुकी जांच में इसकी पुष्टि के बाद एक पूर्व एसडीएम और बीडीए के चार पूर्व अधिकारियों पर भी अब कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। इस बीच बचाव के रास्ते भी ढूंढे जा रहे हैं। नजरें 26 सितंबर को हाईकोर्ट में होने जा रही सुनवाई पर लगी हैं।
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इंटरनेशनल सिटी से जुड़े बिल्डरों ने यह जमीन एक दूसरे बिल्डर से खरीदी। शिकायतकर्ता महेश पांडेय के मुताबिक यह जमीन छह सौ एकड़ है जबकि साढ़े 12 एकड़ के अलावा ज्यादा खरीदी गई बाकी जमीन सरकारी खाते में शुमार होती है। पहले इस प्रकरण में उनकी शिकायत पर तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने तत्कालीन कमिश्नर रणवीर प्रसाद को जांच का आदेश दिया था। रणवीर प्रसाद ने कुछ आरोपों को जांच में सही पाया। इस जांच के आधार पर बीडीए ने कॉलोनी का नक्शा स्थगित कर दिया। हालांकि इस कार्रवाई को बिल्डरों ने चुनौती दी तो उन्हें राहत मिल गई।
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महेश पांडेय के मुताबिक 2014 में इंटरनेशनल सिटी बनाने के लिए कई बिल्डरों ने नरियावल में जमीन खरीदना शुरू किया। इस जमीन पर कई निजी तालाब थे, जिन्हें पाट दिया गया। उस दौरान चकबंदी भी चल रही थी। नियमों के मुताबिक चकबंदी के दौरान भूमि का प्रयोग बदला नहीं जा सकता लेकिन एक पूर्व एसडीएम ने इस नियम की अनदेखी कर जमीन को अकृषक घोषित कर दिया।
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बिल्डर बोले- सिर्फ सौ एकड़ में बसी है
कॉलोनी, एक तालाब, वह भी सुरक्षित
कांपिटेंट इन्फ्रा हाइट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राजू खंडेलवाल, विपिन कुमार आदि का कहना है कि पूरे नरियावल की जमीन का क्षेत्रफल 208 एकड़ है। उनकी कॉलोनी सौ एकड़ में बसाई गई है। इस कॉलोनी में एक तालाब आया है जो सुरक्षित है। कॉलोनी का नक्शा पास है। बीडीए ने नक्शा स्थगित किया तो इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस पर अब तक अधिकारियों ने जवाब दाखिल नहीं किया। हाईकोर्ट की ओर से ट्विन टावर जैसा घोटाला होने जैसी कोई टिप्पणी भी नहीं की गई। अब तक जितनी जांचें हुई हैं, उनमें अधिकांश में उनके पक्ष को सही पाया गया है। हाईकोर्ट में जब सुनवाई हो रही थी तो वादी महेश पांडेय के वकील ने ही अगली तिथि की मांग की। ऐसी मांग तभी होती है जब वादी के आरोप झूठे होते हैं। यही नहीं, हाईकोर्ट में यह केस सिर्फ पीआईएल से पहले एडमिशन के बेस पर चल रहा है। अभी कोर्ट ने इसे एडमिट तक नहीं किया है। वादी महेश पांडेय का कहना है कि कोर्ट ने खुद ही आगे की तारीख लगाई है। केस एडमिड होने के बाद ही सुनवाई चल रही है।
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