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Bareilly News: दो बार अपलोड होंगे इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक
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बरेली। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक पोर्टल पर दो बार अपलोड किए जाएंगे, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका न रहे। डीआईओएस डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि पिछले साल प्रायोगिक तौर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अंक मंगाए गए थे। ऑनलाइन व्यवस्था के सफल होने के बाद अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम को ही अपनाया गया है। अब नई प्रणाली के तहत परीक्षकों को मोबाइल एप के जरिये दो बार अंक अपलोड करने होंगे।
परीक्षक को आवंटित समूह से अधिकतम 80 विद्यार्थियों का चयन कर उनके अंक भरने होंगे। पहली बार तालिका भरने के बाद सिस्टम खुद-ब-खुद दोबारा अंक अपलोड करने के लिए विंडो खोलेगा। यदि दोनों बार भरे गए अंकों में कोई अंतर पाया जाता है तो सिस्टम उन विसंगतियों को प्रदर्शित करेगा और परीक्षक को उन्हें संशोधित करना होगा। जब तक दोनों प्रविष्टियां एक समान नहीं होंगी, सिस्टम उसे स्वीकार नहीं करेगा।
सुरक्षा के लिहाज से इस प्रक्रिया में जियो फेंसिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब परीक्षक केंद्र पर मोबाइल एप से लॉगिन करेंगे तो सिस्टम उनके वर्तमान भौगोलिक स्थान (जियो पैरामीटर) का मिलान पहले से दर्ज डाटा से करेगा। निर्धारित दूरी के भीतर होने पर ही प्रैक्टिकल परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। संवाद
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बरेली। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक पोर्टल पर दो बार अपलोड किए जाएंगे, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका न रहे। डीआईओएस डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि पिछले साल प्रायोगिक तौर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अंक मंगाए गए थे। ऑनलाइन व्यवस्था के सफल होने के बाद अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम को ही अपनाया गया है। अब नई प्रणाली के तहत परीक्षकों को मोबाइल एप के जरिये दो बार अंक अपलोड करने होंगे।
परीक्षक को आवंटित समूह से अधिकतम 80 विद्यार्थियों का चयन कर उनके अंक भरने होंगे। पहली बार तालिका भरने के बाद सिस्टम खुद-ब-खुद दोबारा अंक अपलोड करने के लिए विंडो खोलेगा। यदि दोनों बार भरे गए अंकों में कोई अंतर पाया जाता है तो सिस्टम उन विसंगतियों को प्रदर्शित करेगा और परीक्षक को उन्हें संशोधित करना होगा। जब तक दोनों प्रविष्टियां एक समान नहीं होंगी, सिस्टम उसे स्वीकार नहीं करेगा।
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सुरक्षा के लिहाज से इस प्रक्रिया में जियो फेंसिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब परीक्षक केंद्र पर मोबाइल एप से लॉगिन करेंगे तो सिस्टम उनके वर्तमान भौगोलिक स्थान (जियो पैरामीटर) का मिलान पहले से दर्ज डाटा से करेगा। निर्धारित दूरी के भीतर होने पर ही प्रैक्टिकल परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। संवाद
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