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Bareilly News: पिछले वर्ष के मुकाबले छह फीसदी लुढ़की इंटर की सफलता दर
Sat, 26 Apr 2025 02:59 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 26 Apr 2025 02:59 AM IST
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बरेली। यूपी बोर्ड की परीक्षा में हाईस्कूल की सफलता दर में जहां 0.2 फीसदी का इजाफा हुआ तो दूसरी ओर इंटर की सफलता दर में 6.07 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जो शिक्षा विभाग की मुस्तैदी और स्कूलों के शैक्षिक माहौल पर प्रश्नचिह्न है। अफसरों ने गिरावट की विस्तृत समीक्षा की बात कही है।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में हाईस्कूल में 49,117 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। सफल होने वाले विद्यार्थी 87.09 फीसदी रहे। वहीं, वर्ष 2025 में 46,050 विद्यार्थियों की सफलता दर 87.31 फीसदी दर्ज की गई। इसके विपरीत वर्ष 2023 में 48,896 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 87.95 फीसदी पास हुए थे। तीन वर्ष में मामूली बदलाव के साथ सफलता दर स्थिरता दर्ज कराती रही।
जबकि इंटर में वर्ष 2024 में 42,062 परीक्षार्थियों में 85.60 फीसदी सफल रहे। जबकि वर्ष 2025 में 43,432 विद्यार्थियों में 79.73 फीसदी सफलता दर रही। इसके विपरीत वर्ष 2023 में 43,976 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी और सफलता का प्रतिशत 73.84 फीसदी रहा। वर्ष 2023 से 2024 की परीक्षा में जहां इंटर का परिणाम 12 फीसदी बढ़ा था। वहीं, साल भर में ही वर्ष 2025 तक 6.07 फीसदी सफलता दर कम हो गई।
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शैक्षिक स्तर समेत स्कूलों की मुस्तैदी की होगी समीक्षा
सफलता दर में गिरावट होने की जानकारी पर जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अजीत कुमार ने फिलहाल वजह किसी जानकारी से इन्कार किया। कहा कि छह फीसदी से ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं थी। अप्रैल में सत्र शुरू हुआ और उन्होंने आधा सत्र गुजरने के बाद पदभार ग्रहण किया। हालांकि, अब सरकारी, एडेड, वित्तपोषित, वित्तविहीन स्कूलों के प्रधानाचार्यों, प्रबंधकों के साथ बैठक की जाएगी। शैक्षिक, स्कूल संचालक या विभागीय किस स्तर पर कमी रही इसे तलाशा जाएगा। दावा किया कि वर्ष 2026 में इस गिरावट की भरपाई के साथ बढ़त दर्ज की जाएगी।
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संभावित वजहें
- स्कूलों में शैक्षिक स्थिति बेहतर बनाने पर कम ध्यान।
- नवाचार की कमी से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि की कमी।
- पढ़ाई का दबाव, पारंपरिक शिक्षा पद्धति, मार्गदर्शन की कमी।
- स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम पर ज्यादा ध्यान।
- विषयों के अध्ययन में रुचि का अभाव, बोझिलता का अहसास।
- यूपी बोर्ड के स्कूलों में प्रबंधक-स्टाफ में रंजिश का माहौल।
- जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा स्कूलों की निगरानी का अभाव।
- विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का गिरता ग्राफ व अन्य
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जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में हाईस्कूल में 49,117 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। सफल होने वाले विद्यार्थी 87.09 फीसदी रहे। वहीं, वर्ष 2025 में 46,050 विद्यार्थियों की सफलता दर 87.31 फीसदी दर्ज की गई। इसके विपरीत वर्ष 2023 में 48,896 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 87.95 फीसदी पास हुए थे। तीन वर्ष में मामूली बदलाव के साथ सफलता दर स्थिरता दर्ज कराती रही।
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जबकि इंटर में वर्ष 2024 में 42,062 परीक्षार्थियों में 85.60 फीसदी सफल रहे। जबकि वर्ष 2025 में 43,432 विद्यार्थियों में 79.73 फीसदी सफलता दर रही। इसके विपरीत वर्ष 2023 में 43,976 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी और सफलता का प्रतिशत 73.84 फीसदी रहा। वर्ष 2023 से 2024 की परीक्षा में जहां इंटर का परिणाम 12 फीसदी बढ़ा था। वहीं, साल भर में ही वर्ष 2025 तक 6.07 फीसदी सफलता दर कम हो गई।
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शैक्षिक स्तर समेत स्कूलों की मुस्तैदी की होगी समीक्षा
सफलता दर में गिरावट होने की जानकारी पर जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अजीत कुमार ने फिलहाल वजह किसी जानकारी से इन्कार किया। कहा कि छह फीसदी से ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं थी। अप्रैल में सत्र शुरू हुआ और उन्होंने आधा सत्र गुजरने के बाद पदभार ग्रहण किया। हालांकि, अब सरकारी, एडेड, वित्तपोषित, वित्तविहीन स्कूलों के प्रधानाचार्यों, प्रबंधकों के साथ बैठक की जाएगी। शैक्षिक, स्कूल संचालक या विभागीय किस स्तर पर कमी रही इसे तलाशा जाएगा। दावा किया कि वर्ष 2026 में इस गिरावट की भरपाई के साथ बढ़त दर्ज की जाएगी।
संभावित वजहें
- स्कूलों में शैक्षिक स्थिति बेहतर बनाने पर कम ध्यान।
- नवाचार की कमी से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि की कमी।
- पढ़ाई का दबाव, पारंपरिक शिक्षा पद्धति, मार्गदर्शन की कमी।
- स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम पर ज्यादा ध्यान।
- विषयों के अध्ययन में रुचि का अभाव, बोझिलता का अहसास।
- यूपी बोर्ड के स्कूलों में प्रबंधक-स्टाफ में रंजिश का माहौल।
- जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा स्कूलों की निगरानी का अभाव।
- विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का गिरता ग्राफ व अन्य