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Bareilly News: वर्ष 2020 में समिति ने छोड़ा भवन बोर्ड और चौकीदार रहे काबिज

Fri, 20 Dec 2024 02:25 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 20 Dec 2024 02:25 AM IST
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In the year 2020, the committee left the building board and the watchman remained in charge.
बरेली। जिस भवन के श्री गंगाजी महारानी मंदिर होने का दावा किया जा रहा है, वहां से वर्ष 2020 में ही सहकारी समिति का गोदाम हट चुका है। इसके बाद भी बीते चार साल से समिति का बोर्ड और बिना पगार का चौकीदार वहां काबिज रहे। चौकीदार वाहिद अली ने अपने नाम से वहां बिजली कनेक्शन तक करा लिया। उसका परिवार एसी तक का उपयोग कर रहा है।
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अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 1956 से यहां दौली रघुवर दयाल साधन सहकारी समिति संचालित थी। अब यह करीब तीन किमी दूर दौली मुरावपुरा गांव में अपने भवन में शिफ्ट हो चुकी है। चार साल से यहां वाहिद अली अपना कब्जा जमाए हुए है। अब विवाद खड़ा होने पर वह दावा कर रहा है कि चार साल पहले ही समिति यहां से शिफ्ट हुई है। उसे समिति के अधिकारियों ने ही यहां रखा है। अब भी समिति के कुछ दस्तावेज यहां रखे हुए हैं। समिति के शिफ्ट होने के बाद भी बोर्ड लगे रहने का जवाब किसी के पास नहीं है। वाहिद खुद को समिति का चौकीदार बताता है और उसकी उम्र करीब 65 साल है। चौकीदारी के लिए अकेले रहने के बजाय उसने परिवार को क्यों रख लिया? इसका जवाब भी उसके पास नहीं है। अब उनका परिवार भवन खाली करने के लिए समय मांग रहा है।
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अफसरों ने कहा, वाहिद उनका कर्मचारी नहीं
मूल रूप से बदायूं के रमजानपुर गांव का निवासी वाहिद अली का पूरा परिवार बरसों से इसी भवन में रह रहा है। उनका कहना है कि समिति उनसे हटने को कहे तो वह चले जाएंगे। उन्हें दूसरे मकान की व्यवस्था करने के लिए कुछ महीने की मोहलत चाहिए। यही बात तहसीलदार को भी बताई गई। समिति के सचिव विकास कुमार भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि जब से उन्हें समिति का चार्ज मिला है, उनकी जानकारी में कोई चौकीदार नहीं है। सहकारिता विभाग के एडीजीसी अर्जुन कुमार ने कहा कि वाहिद का कोई रिकॉर्ड विभाग में नहीं है। वह भी जांच रिपोर्ट अधिकारियों को देंगे। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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हिंदू महासभा ने दिया डीएम को ज्ञापन
अखिल भारत हिंदू महासभा के अध्यक्ष पंकज पाठक के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर मंदिर पर दूसरे समुदाय के कब्जे का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 150 वर्ष पुराने मां गंगा महारानी मंदिर पर अवैध कब्जा कर अस्तित्व मिटाने की कोशिश की जा रही है। मंदिर में जो मूर्तियां व साक्ष्य थे, वह गायब किए गए हैं। मंदिर में रखी गंगा महारानी की चांदी की चरण पादुका, दूधिया शिवलिंग और शिव परिवार को वहां से हटा दिया गया है। जो परिवार वहां रहता है, वह मांस पकाने और खाने वाला है। इससे लोगों की आस्था प्रभावित हो रही है। क्षेत्रीय लोगों का मंदिर में प्रवेश भी प्रतिबंध कर दिया गया है। मंदिर को तत्काल कब्जामुक्त कराकर वहां विधिवत तरीके से मूर्ति स्थापना कराई जाए।

स्वामित्व पर फंसा पेच, श्याम सुंदर ने खुद को बताया सर्वराकार
इस मंदिर को राकेश सिंह महाराज अपने पूर्वज लक्ष्मण सिंह आदि की संपत्ति बता रहे हैं। वहीं नया नाम श्याम सुंदर का सामने आया है। बताया गया है कि लक्ष्मण सिंह के परिवार ने बरसों पहले जगन्नाथ दास को मंदिर का सर्वराकार बनाकर इस भवन की देखरेख की भी जिम्मेदारी दे दी थी। उन्हीं के आश्रितों ने बरसों पहले इसका एक हिस्सा समिति संचालन के लिए किराये पर दे दिया था। श्याम सुंदर उन्हीं जगन्नाथ दास के भतीजे हैं। उन्होंने दावा किया है कि यहां के सर्वराकार के तौर पर फिलहाल वही हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि इसे मंदिर का रूप देकर धार्मिक कार्यों के लिए ही रखा जाए। अब प्रशासन की जांच से ही यह तय होगा कि इस भवन पर स्वामित्व किसका है?


उप निबंधक पहुंचे, हटेगा समिति का बोर्ड
उप निबंधक बृजेश सिंह परिहार बृहस्पतिवार शाम को उस भवन पर पहुंचे, जहां समिति का बोर्ड लगा था। उन्होंने समिति के सचिव को भवन से बोर्ड हटवाने का आदेश दिया। उनका कहना है कि यहां से वर्ष 2020 में ही समिति नए भवन में पहुंच चुकी है। इस भवन से सहकारिता विभाग का कोई वास्ता नहीं है। अमर उजाला ब्यूरो
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