{"_id":"59f636bb4f1c1b97678b8071","slug":"in-the-highway-jam","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईवे ‘जाम’ में.. पुलिस आराम में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईवे ‘जाम’ में.. पुलिस आराम में
बरेली
Updated Mon, 30 Oct 2017 01:44 AM IST
विज्ञापन
jam
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ-दिल्ली रेलमार्ग पर ट्रेनों को 150 किमी की रफ्तार से दौड़ाने के लिए शनिवार की सुबह जैसे ही ट्रैक पर काम शुरू हुआ, हाईवे की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया गया। पुलिस के अफसरों की लापरवाही और निकम्मेपन की हद देखिए कि हाईवे दो दिन जाम से जूझता रहा लेकिन किसी ने चिंता नहीं की। थाने और चौकी की पुलिस तो आराम करती ही रही, शिकायतें पहुंचने के बाद भी उनके अफसर भी सोते रहे।
हाईवे को जाम से बचाने के लिए पहला डायवर्जन सेटेलाइट बस स्टैंड से ही किया जाना चाहिए था लेकिन यहां ऐसा कोई इंतजाम नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि सेटेलाइट स्टैंड आगे बढ़कर नकटिया के पास पहुंचते ही हाईवे पर दोनों की तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। लखनऊ और उसी तरफ अन्य शहरों जाने वाले लोग इस जाम में फंस गए। हाईवे पर भीषण जाम लगा तो आसपास के गांवों के ही लोग नहीं, इस रोड पर स्थित शिक्षण संस्थानों में जाने वाले लोग भी पसीना-पसीना हो गए। किसी को जाम हाईवे क्रॉस करने में एक घंटा लगा तो कोई दो घंटे तक फंसा रहा। रजऊ चौकी तक यही हाल था। हैरत की बात यह कि इधर हाईवे पर जाम लगा था और उधर पुलिस आराम फरमा रही थी। चौकी पर सुकून से बैठे पुलिस वाले अपने स्मार्ट फोन पर बिजी थे। ट्रैफिक पुलिस का भी कोई जवान मौके पर नजर नहीं आया। एक-दो होमगार्ड और सिपाही जाम में फंसे वाहनों की भीड़ के बीच जरूर अपना ‘शिकार’ तलाशते घूमते नजर आए। जाम में फंसे तमाम लोगों ने अफसरों के फोन खटखटाए लेकिन फिर भी कोई नतीजा नहीं निकला। लोगों ने बताया कि शनिवार को रात भर ट्रक चालकों से वसूली किए जाने का खेल चलता रहा। जिसने पैसा दिया उसे जैसे-तैसे बैरियर पार करा दिया गया। पुलिस की वसूली की वजह से हाईवे पर जाम की हालत हर घंटे खराब होती गई। वाहन चालकों को जाम से निकलने के लिए जो रास्ता समझ में आया, वे उसी पर आगे बढ़ गए।
एक घंटा जाम में फंसे रहे दुकानदार
फतेहगंज पूर्वी में दुकान चलाने वाले मुकेश अग्रवाल, शिव औतार और विकास भी करीब एक घंटा जाम में फंसे रहने के बाद घर पहुंच पाए। इन दुकानदारों ने बताया पुलिस की लापरवाही की वजह से जाम की स्थिति भीषण होती चली गई। पुलिस को पहले ही रेलवे क्रासिंग बंद होने की जानकारी थी। इसके बाद भी जाम से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया। जाम लगता गया और पुलिस अपने काम में मस्त रही। पहले ही व्यवस्था की जाती और संकेतक लगा दिए गए होते तो शायद जाम की समस्या से किसी को नहीं जूझना पड़ता।
विज्ञापन
छात्र-छात्राएं भी जाम से जूझे
अतुल माहेश्वरी छात्रवृति परीक्षा में शामिल होने से लिए छात्र-छात्राओं को फ्यूचर इंस्टीट्यूट जाना था। जाम लगने की वजह से उन्हें भी परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के लिए काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं। छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों ने भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को फोन करके जाम लगने की शिकायत की थी।
वैकल्पिक रास्ते भी हो गए जाम
लखनऊ हाईवे से रोजाना 50 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। ऐसे में हाईवे पर रेलवे क्रॉसिंग का दो दिन बंद रहना बड़ी बात थी। रेलवे की ओर से हुलासनगरा क्रासिंग को बंद किए जाने की सूचना मिलने के बाद भी पुलिस के अधिकारी अलर्ट नहीं हुए। ट्रैफिक पुलिस के जवानों को यहां लगाया जाना जाना चाहिए था, लेकिन अफसरोें ने इसकी परवाह नहीं की। क्रासिंग बंद होने के बाद वाहन चालकों को किसी ने रास्ता नहीं बताया तो वे आसपास के लोगों से पूछताछ कर गलत रास्तों पर आगे बढ़ गए। संकरे वैकल्पिक रास्तों पर दोनों तरफ से ट्रैफिक आ जाने से उन पर भी जाम लग गया।
शाम को मिल पाई जाम से राहत
रेलवे ने ट्रैक पर काम खत्म होने के बाद शाम 6.20 बजे हुलासनगरा क्रासिंग खोल दिया। इसके बाद वाहन रेंग-रेंगकर किसी तरह निकल पाए, लेकिन फिर भी करीब दो घंटे वाहनों को पास होने में लग गए। पुलिस की व्यवस्था पहले ही ठीक होती तो छोटे वाहन वालों को कोई दिक्कत ही नहीं होती। छोटे वाहनों के निकलने का इंतजाम तो क्रासिंग के बराबर से ही कच्चा रास्ता बनाकर की गई थी। इसका भी इस्तेमाल नहीं हो पाया।
बरेली-फरीदपुर के बीच ये हैं वैकल्पिक रास्ते
बरेली से जाने वाले भारी वाहनों को रजऊ के पास से डायवर्ट करके लखनऊ भेजा जा सकता था
बरेली की तरफ वाहनों के लिए दूसरा रास्ता फरीदपुर के पास गौसगंज क्रासिंग की तरफ से होकर है
हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग के पास हल्के वाहनों के लिए एक कच्चा रास्ता बनाया गया था
सेटेलाइट बस अड्डे पर भी वाहनों को रोक कर बीसलपुर से भुता होते हुए शाहजहांपुर भेजा जा सकता था।
शाहजहांपुर और कानपुर से आने वाले भारी वाहनों को मीरानपुर कटरा से जैतीपुर रोड की ओर भेजा जा सकता था
52 किलो की जगह 60 किलो की पटरी बिछाई जा रही
रेलवे के पीडब्लूआई हरगोविंद राजेंद्र पाल के मुताबिक अप लाइन की रेल पटरियों को बदलने का काम चल रहा है। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए 52 किलो की जगह अब 60 किलो के भार की पटरी बिछाई जा रही है ताकि ट्रेनों को रेल पटरी पर 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाया जा सके। टीआई एसके चौधरी ने बताया कि रविवार देर शाम तक रेल पटरी बदलने का काम खत्म करा लिया जाएगा।
रेलवे ट्रैक पर काम होने की वजह से क्रासिंग बंद किया गया था। इसकी वजह से भारी वाहनों को पुलिस ने हाईवे किनारे खड़ा करा दिया था, जिसकी वजह से हाईवे पर जाम की समस्या बन गई होगी। क्रासिंग खुलने के बाद अब कोई परेशानी नहीं है। पुलिस की लापरवाही और वसूली के आरोपों को दिखवाते हैं। - राघवेंद्र विक्रम सिंह, डीएम
विज्ञापन
हाईवे को जाम से बचाने के लिए पहला डायवर्जन सेटेलाइट बस स्टैंड से ही किया जाना चाहिए था लेकिन यहां ऐसा कोई इंतजाम नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि सेटेलाइट स्टैंड आगे बढ़कर नकटिया के पास पहुंचते ही हाईवे पर दोनों की तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। लखनऊ और उसी तरफ अन्य शहरों जाने वाले लोग इस जाम में फंस गए। हाईवे पर भीषण जाम लगा तो आसपास के गांवों के ही लोग नहीं, इस रोड पर स्थित शिक्षण संस्थानों में जाने वाले लोग भी पसीना-पसीना हो गए। किसी को जाम हाईवे क्रॉस करने में एक घंटा लगा तो कोई दो घंटे तक फंसा रहा। रजऊ चौकी तक यही हाल था। हैरत की बात यह कि इधर हाईवे पर जाम लगा था और उधर पुलिस आराम फरमा रही थी। चौकी पर सुकून से बैठे पुलिस वाले अपने स्मार्ट फोन पर बिजी थे। ट्रैफिक पुलिस का भी कोई जवान मौके पर नजर नहीं आया। एक-दो होमगार्ड और सिपाही जाम में फंसे वाहनों की भीड़ के बीच जरूर अपना ‘शिकार’ तलाशते घूमते नजर आए। जाम में फंसे तमाम लोगों ने अफसरों के फोन खटखटाए लेकिन फिर भी कोई नतीजा नहीं निकला। लोगों ने बताया कि शनिवार को रात भर ट्रक चालकों से वसूली किए जाने का खेल चलता रहा। जिसने पैसा दिया उसे जैसे-तैसे बैरियर पार करा दिया गया। पुलिस की वसूली की वजह से हाईवे पर जाम की हालत हर घंटे खराब होती गई। वाहन चालकों को जाम से निकलने के लिए जो रास्ता समझ में आया, वे उसी पर आगे बढ़ गए।
विज्ञापन
एक घंटा जाम में फंसे रहे दुकानदार
फतेहगंज पूर्वी में दुकान चलाने वाले मुकेश अग्रवाल, शिव औतार और विकास भी करीब एक घंटा जाम में फंसे रहने के बाद घर पहुंच पाए। इन दुकानदारों ने बताया पुलिस की लापरवाही की वजह से जाम की स्थिति भीषण होती चली गई। पुलिस को पहले ही रेलवे क्रासिंग बंद होने की जानकारी थी। इसके बाद भी जाम से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया। जाम लगता गया और पुलिस अपने काम में मस्त रही। पहले ही व्यवस्था की जाती और संकेतक लगा दिए गए होते तो शायद जाम की समस्या से किसी को नहीं जूझना पड़ता।
विज्ञापन
छात्र-छात्राएं भी जाम से जूझे
अतुल माहेश्वरी छात्रवृति परीक्षा में शामिल होने से लिए छात्र-छात्राओं को फ्यूचर इंस्टीट्यूट जाना था। जाम लगने की वजह से उन्हें भी परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के लिए काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं। छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों ने भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को फोन करके जाम लगने की शिकायत की थी।
वैकल्पिक रास्ते भी हो गए जाम
लखनऊ हाईवे से रोजाना 50 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। ऐसे में हाईवे पर रेलवे क्रॉसिंग का दो दिन बंद रहना बड़ी बात थी। रेलवे की ओर से हुलासनगरा क्रासिंग को बंद किए जाने की सूचना मिलने के बाद भी पुलिस के अधिकारी अलर्ट नहीं हुए। ट्रैफिक पुलिस के जवानों को यहां लगाया जाना जाना चाहिए था, लेकिन अफसरोें ने इसकी परवाह नहीं की। क्रासिंग बंद होने के बाद वाहन चालकों को किसी ने रास्ता नहीं बताया तो वे आसपास के लोगों से पूछताछ कर गलत रास्तों पर आगे बढ़ गए। संकरे वैकल्पिक रास्तों पर दोनों तरफ से ट्रैफिक आ जाने से उन पर भी जाम लग गया।
शाम को मिल पाई जाम से राहत
रेलवे ने ट्रैक पर काम खत्म होने के बाद शाम 6.20 बजे हुलासनगरा क्रासिंग खोल दिया। इसके बाद वाहन रेंग-रेंगकर किसी तरह निकल पाए, लेकिन फिर भी करीब दो घंटे वाहनों को पास होने में लग गए। पुलिस की व्यवस्था पहले ही ठीक होती तो छोटे वाहन वालों को कोई दिक्कत ही नहीं होती। छोटे वाहनों के निकलने का इंतजाम तो क्रासिंग के बराबर से ही कच्चा रास्ता बनाकर की गई थी। इसका भी इस्तेमाल नहीं हो पाया।
बरेली-फरीदपुर के बीच ये हैं वैकल्पिक रास्ते
बरेली से जाने वाले भारी वाहनों को रजऊ के पास से डायवर्ट करके लखनऊ भेजा जा सकता था
बरेली की तरफ वाहनों के लिए दूसरा रास्ता फरीदपुर के पास गौसगंज क्रासिंग की तरफ से होकर है
हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग के पास हल्के वाहनों के लिए एक कच्चा रास्ता बनाया गया था
सेटेलाइट बस अड्डे पर भी वाहनों को रोक कर बीसलपुर से भुता होते हुए शाहजहांपुर भेजा जा सकता था।
शाहजहांपुर और कानपुर से आने वाले भारी वाहनों को मीरानपुर कटरा से जैतीपुर रोड की ओर भेजा जा सकता था
52 किलो की जगह 60 किलो की पटरी बिछाई जा रही
रेलवे के पीडब्लूआई हरगोविंद राजेंद्र पाल के मुताबिक अप लाइन की रेल पटरियों को बदलने का काम चल रहा है। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए 52 किलो की जगह अब 60 किलो के भार की पटरी बिछाई जा रही है ताकि ट्रेनों को रेल पटरी पर 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाया जा सके। टीआई एसके चौधरी ने बताया कि रविवार देर शाम तक रेल पटरी बदलने का काम खत्म करा लिया जाएगा।
रेलवे ट्रैक पर काम होने की वजह से क्रासिंग बंद किया गया था। इसकी वजह से भारी वाहनों को पुलिस ने हाईवे किनारे खड़ा करा दिया था, जिसकी वजह से हाईवे पर जाम की समस्या बन गई होगी। क्रासिंग खुलने के बाद अब कोई परेशानी नहीं है। पुलिस की लापरवाही और वसूली के आरोपों को दिखवाते हैं। - राघवेंद्र विक्रम सिंह, डीएम