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बेटे की तलाश में घरवालों से हाथ छुड़ाकर लपटों से घिरे कमरे में घुस गईं अलका
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घर के बाहर लगी लोगों की भीड़।
धुएं में दम घुटने से बेहोश होने की आशंका, 18 घंटे बाद कमरे में मिलीं अस्थियां
बरेली। जो अलका ने किया, वह करने का हौसला एक मां ही दिखा सकती है। घरवाले हाथ पकड़कर रोकने की कोशिश करते रहे लेकिन वह उनसे हाथ छुड़ाकर बेटे राघव को तलाश में कमरे में घुस गईं। धुएं और लपटों से भरा कमरा साक्षात मौत का घर बना हुआ था जहां से वह वापस बाहर नहीं निकल सकीं।
टेंट हाउस के गोदाम में जिस वक्त आग लगी, उस वक्त पंकज और उनके बड़े भाई हेमंत के परिवार के सभी लोग घर पर ही थे। पंकज के परिवार में पत्नी अलका के अलावा 13 वर्षीय बेटी कौशिकी और नौ वर्षीय बेटा राघव है जबकि हेमंत के परिवार में भी पत्नी आरुषि के साथ दो बच्चे हैं। भीषण आग में घिरे दोनों परिवारों को पड़ोस के लोग किसी तरह कमरे से बाहर निकालकर खुली जगह में ले आए। अचानक अलका का ध्यान इस बात पर गया कि उनका बेटा राघव कहीं नहीं दिख रहा है।
अलका को लगा कि राघव अंदर आग के बीच कमरे में ही फंस गया है तो वह कमरे में घुसने की कोशिश करने लगीं। घरवालों ने उन्हें रोकने के लिए उनका हाथ पकड़ लिया लेकिन वह जबरन अपना हाथ छुड़ाकर कमरे में घुस गईं। राघव को तो लोग पहले ही बाहर निकाल चुके थे लेकिन अंदर कमरे में घुसीं अलका भीषण धुएं और लपटों के बीच अंदर ही फंस गईं। काफी देर तक वह बाहर नहीं निकलीं तो बाहर मौजूद परिवार वालों ने रोना-चिल्लाना शुरू कर दिया लेकिन हालात इस कदर विकराल थे कि अलका की कोई मदद नहीं की जा सकी।
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परिवार वालों और फायर ब्रिगेड कर्मियों ने उन्हें कमरे में देखने की कोशिश की, आवाजें भी दीं लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। सुबह करीब पांच बजे धुआं छटने के बाद कमरे में अलका के पैरों की अस्थियां दिखीं लेकिन तपिश इतनी ज्यादा था कि कोई अंदर नहीं घुस पाया। दोपहर ढाई बजे कमरे से अलका की बची-खुची अस्थियां निकाली गईं जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने पंचनामा भरा। परिवार वालों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और अस्थियों को ही ले जाकर श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया। आशंका जताई गई कि कमरे में घुसीं अलका धुएं की वजह बेहोश हो गईं, इसी वजह से न बाहर निकल पाईं न किसी की आवाज का जवाब दे पाईं।
हेमंत झुलसे, पत्नी की भी हालत बिगड़ी
पंकज के बड़े भाई हेमंत भी आग की चपेट में आकर झुलस गए। हेमंत की स्थिति देखकर उनकी पत्नी आरुषि की तबीयत भी बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पंकज अरोड़ा ने घटना की कोतवाली में सूचना दी है। इसके मुताबिक गोदाम में करीब 80 लाख रुपये का माल था, जो राख हो गया। घर में भी काफी नुकसान हुआ है।
धमाके से उड़ी छत तो नीचे आ गिरा फायरमैन
बरेली। पंकज के घर की रसोई में रखा एलपीजी सिलिंडर रात करीब 11.30 बजे इतने तेज धमाके के साथ फटा कि रसोईघर की छत और दीवारों के परखचे उड़ गए। करीब सौ मीटर के दायरे में आसपास की छतों पर मलबा बिखर गया। इस दौरान एक फायरमैन घर की छत पर था जो धमाके के साथ उछलकर नीचे आ गिरा और बुरी तरह घायल हो गया।
जब सिलिंडर फटा तो फायरमैन कृष्ण यादव, नमित सिंह और प्रदीप कुमार रसोई के पास खड़े होकर आग बुझा रहे थे। धमाका इतना तेज था कि फायरमैन कृष्ण यादव छत से उछलकर नीचे जा गिरे। धमाके से फैले प्लास्टर और ईंटों के टुकड़ों की चपेट में आकर फायरमैन नमित और प्रदीप भी घायल हो गए। कृष्ण यादव की गंभीर हालत देखते हुए उन्हें निजी अस्पताल की आईसीयू में भर्ती कराया गया। बाकी दोनों फायरमैन को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सिलिंडर फटने के बाद दमकल विभाग के स्टाफ ने बताया कि घर में चार और गैस सिलिंडर रखे देखे गए हैं। आसपास के लोगों को इसका पता लगा तो उनमें दहशत फैल गई। कोतवाली पुलिस ने आसपास के कई घर खाली भी करा लिए गए। आग इतनी भीषण थी कि पंकज के आसपास के घरों की दीवारें भी दूसरे दिन तक तक गरम रहीं। इस वजह से कई लोग शुक्रवार दोपहर तक अपने घरों में नहीं गए।
तोड़ना पड़ा गोदाम का शटर
फायर ब्रिगेड दरवाजे से आग बुझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन गोदाम में आग अंदर ही अंदर और भड़क रही थी। वहां तक पानी न पहुंचने से पूरी इमारत के ढह जाने की भी आशंका थी। इस वजह से पहले काफी देर शटर पर पानी डालकर उसे ठंडा किया गया, तब उसे तोड़कर पानी अंदर डालकर आग बुझाई गई।
धमाके से आसपास के मकानों में पड़ीं दरारें
सिलिंडर फटने के जोरदार धमाके से पूरा इलाका दहल गया। गली नवाबान में पंकज के घर के अलावा आसपास के कई मकानों की दीवारों में दरारें आ गईं। आग बुझने के बावजूद यहां लोगों में दहशत का माहौल है।
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बरेली। जो अलका ने किया, वह करने का हौसला एक मां ही दिखा सकती है। घरवाले हाथ पकड़कर रोकने की कोशिश करते रहे लेकिन वह उनसे हाथ छुड़ाकर बेटे राघव को तलाश में कमरे में घुस गईं। धुएं और लपटों से भरा कमरा साक्षात मौत का घर बना हुआ था जहां से वह वापस बाहर नहीं निकल सकीं।
टेंट हाउस के गोदाम में जिस वक्त आग लगी, उस वक्त पंकज और उनके बड़े भाई हेमंत के परिवार के सभी लोग घर पर ही थे। पंकज के परिवार में पत्नी अलका के अलावा 13 वर्षीय बेटी कौशिकी और नौ वर्षीय बेटा राघव है जबकि हेमंत के परिवार में भी पत्नी आरुषि के साथ दो बच्चे हैं। भीषण आग में घिरे दोनों परिवारों को पड़ोस के लोग किसी तरह कमरे से बाहर निकालकर खुली जगह में ले आए। अचानक अलका का ध्यान इस बात पर गया कि उनका बेटा राघव कहीं नहीं दिख रहा है।
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अलका को लगा कि राघव अंदर आग के बीच कमरे में ही फंस गया है तो वह कमरे में घुसने की कोशिश करने लगीं। घरवालों ने उन्हें रोकने के लिए उनका हाथ पकड़ लिया लेकिन वह जबरन अपना हाथ छुड़ाकर कमरे में घुस गईं। राघव को तो लोग पहले ही बाहर निकाल चुके थे लेकिन अंदर कमरे में घुसीं अलका भीषण धुएं और लपटों के बीच अंदर ही फंस गईं। काफी देर तक वह बाहर नहीं निकलीं तो बाहर मौजूद परिवार वालों ने रोना-चिल्लाना शुरू कर दिया लेकिन हालात इस कदर विकराल थे कि अलका की कोई मदद नहीं की जा सकी।
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परिवार वालों और फायर ब्रिगेड कर्मियों ने उन्हें कमरे में देखने की कोशिश की, आवाजें भी दीं लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। सुबह करीब पांच बजे धुआं छटने के बाद कमरे में अलका के पैरों की अस्थियां दिखीं लेकिन तपिश इतनी ज्यादा था कि कोई अंदर नहीं घुस पाया। दोपहर ढाई बजे कमरे से अलका की बची-खुची अस्थियां निकाली गईं जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने पंचनामा भरा। परिवार वालों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और अस्थियों को ही ले जाकर श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया। आशंका जताई गई कि कमरे में घुसीं अलका धुएं की वजह बेहोश हो गईं, इसी वजह से न बाहर निकल पाईं न किसी की आवाज का जवाब दे पाईं।
हेमंत झुलसे, पत्नी की भी हालत बिगड़ी
पंकज के बड़े भाई हेमंत भी आग की चपेट में आकर झुलस गए। हेमंत की स्थिति देखकर उनकी पत्नी आरुषि की तबीयत भी बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पंकज अरोड़ा ने घटना की कोतवाली में सूचना दी है। इसके मुताबिक गोदाम में करीब 80 लाख रुपये का माल था, जो राख हो गया। घर में भी काफी नुकसान हुआ है।
धमाके से उड़ी छत तो नीचे आ गिरा फायरमैन
बरेली। पंकज के घर की रसोई में रखा एलपीजी सिलिंडर रात करीब 11.30 बजे इतने तेज धमाके के साथ फटा कि रसोईघर की छत और दीवारों के परखचे उड़ गए। करीब सौ मीटर के दायरे में आसपास की छतों पर मलबा बिखर गया। इस दौरान एक फायरमैन घर की छत पर था जो धमाके के साथ उछलकर नीचे आ गिरा और बुरी तरह घायल हो गया।
जब सिलिंडर फटा तो फायरमैन कृष्ण यादव, नमित सिंह और प्रदीप कुमार रसोई के पास खड़े होकर आग बुझा रहे थे। धमाका इतना तेज था कि फायरमैन कृष्ण यादव छत से उछलकर नीचे जा गिरे। धमाके से फैले प्लास्टर और ईंटों के टुकड़ों की चपेट में आकर फायरमैन नमित और प्रदीप भी घायल हो गए। कृष्ण यादव की गंभीर हालत देखते हुए उन्हें निजी अस्पताल की आईसीयू में भर्ती कराया गया। बाकी दोनों फायरमैन को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सिलिंडर फटने के बाद दमकल विभाग के स्टाफ ने बताया कि घर में चार और गैस सिलिंडर रखे देखे गए हैं। आसपास के लोगों को इसका पता लगा तो उनमें दहशत फैल गई। कोतवाली पुलिस ने आसपास के कई घर खाली भी करा लिए गए। आग इतनी भीषण थी कि पंकज के आसपास के घरों की दीवारें भी दूसरे दिन तक तक गरम रहीं। इस वजह से कई लोग शुक्रवार दोपहर तक अपने घरों में नहीं गए।
तोड़ना पड़ा गोदाम का शटर
फायर ब्रिगेड दरवाजे से आग बुझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन गोदाम में आग अंदर ही अंदर और भड़क रही थी। वहां तक पानी न पहुंचने से पूरी इमारत के ढह जाने की भी आशंका थी। इस वजह से पहले काफी देर शटर पर पानी डालकर उसे ठंडा किया गया, तब उसे तोड़कर पानी अंदर डालकर आग बुझाई गई।
धमाके से आसपास के मकानों में पड़ीं दरारें
सिलिंडर फटने के जोरदार धमाके से पूरा इलाका दहल गया। गली नवाबान में पंकज के घर के अलावा आसपास के कई मकानों की दीवारों में दरारें आ गईं। आग बुझने के बावजूद यहां लोगों में दहशत का माहौल है।