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परीक्षा फार्म भरने की ऑन लाइन व्यवस्था फेल
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sat, 10 Dec 2016 01:05 AM IST
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illing out the forms on-line examination system failure
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के परीक्षा फार्म ऑफ लाइन से ऑन लाइन किए गए, लेकिन यह व्यवस्था धराशाई होती जा रही है। फार्म पर ऑफ लाइन मोड से विषय भरे जा रहे हैं। शिक्षकों ने इसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन और एजेंसी को ठहराया तो कुलसचिव ने इसका जिम्मेदार विभागों के हेड को ठहराया।
विश्वविद्यालय कैंपस में संचालित बीटेक कोर्स के सिलेबस में बदलाव किया गया। एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इसका डाटा विवि प्रशासन को उपलब्ध कराया गया। आनलाइन परीक्षा फार्म में ढेरों गड़बड़ियां होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार एजेंसी बदल दी, लेकिन जो डाटा पिछली एजेंसी को दिया गया वही डाटा इस एजेंसी को सौंप दिया गया। जो सिलेबस में बदलाव हुए उसको अपडेट नहीं किया गया और न ही एजेंसी ने विभागों से संपर्क किया। नतीजन बीटेक के ऑन लाइन परीक्षा फार्म में जो विषय होने चाहिए थे उनको पिछले साल के सिलेबस के अनुसार दर्शाया गया। बीटेक फाइनल के परीक्षा फार्म में दो विषयों के कालम ही नहीं दिए गए। मजबूरन अब इन विषयों को ऑफ लाइन भरा जा रहा है। बीटेक के साथ एमसीए, एमएससी और अन्य विषयों में भी यही दिक्कतें आ रही हैं। इसके अलावा बीटेक द्वितीय और तृतीय वर्ष के परीक्षा फार्म में भी सभी विषयों के कालम ही नहीं दिए गए। अब सवाल उठ रहा है कि अगर ऑन लाइन होने के बावजूद ऑफ लाइन विषय भरे जा रहे हैं तो आनलाइन व्यवस्था का क्या मतलब। जबकि इसबार एजेंसी को डेढ़ रुपये प्रति फार्म की जगह भुगतान दो गुने से ज्यादा किया जा रहा है।
कंप्यूटर साइंस विभाग के हेड डॉ. रविंद्र सिंह ने बताया कि विषयों के कालम नहीं आ रहे हैं उनको मजबूरन ऑफ लाइन भरना पड़ रहा है। वहीं कुलसचिव साहब लाल मौर्या ने बताया कि विभागों ने डाटा उपलब्ध नहीं कराया इसलिए दिक्कतें आ रही हैं। इनको दूर कराया जा रहा है। सिलेबस के विषय जो एजेंसी ने अपलोड नहीं किए उनको अपटेड कराया जा रहा है।
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विश्वविद्यालय कैंपस में संचालित बीटेक कोर्स के सिलेबस में बदलाव किया गया। एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इसका डाटा विवि प्रशासन को उपलब्ध कराया गया। आनलाइन परीक्षा फार्म में ढेरों गड़बड़ियां होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार एजेंसी बदल दी, लेकिन जो डाटा पिछली एजेंसी को दिया गया वही डाटा इस एजेंसी को सौंप दिया गया। जो सिलेबस में बदलाव हुए उसको अपडेट नहीं किया गया और न ही एजेंसी ने विभागों से संपर्क किया। नतीजन बीटेक के ऑन लाइन परीक्षा फार्म में जो विषय होने चाहिए थे उनको पिछले साल के सिलेबस के अनुसार दर्शाया गया। बीटेक फाइनल के परीक्षा फार्म में दो विषयों के कालम ही नहीं दिए गए। मजबूरन अब इन विषयों को ऑफ लाइन भरा जा रहा है। बीटेक के साथ एमसीए, एमएससी और अन्य विषयों में भी यही दिक्कतें आ रही हैं। इसके अलावा बीटेक द्वितीय और तृतीय वर्ष के परीक्षा फार्म में भी सभी विषयों के कालम ही नहीं दिए गए। अब सवाल उठ रहा है कि अगर ऑन लाइन होने के बावजूद ऑफ लाइन विषय भरे जा रहे हैं तो आनलाइन व्यवस्था का क्या मतलब। जबकि इसबार एजेंसी को डेढ़ रुपये प्रति फार्म की जगह भुगतान दो गुने से ज्यादा किया जा रहा है।
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कंप्यूटर साइंस विभाग के हेड डॉ. रविंद्र सिंह ने बताया कि विषयों के कालम नहीं आ रहे हैं उनको मजबूरन ऑफ लाइन भरना पड़ रहा है। वहीं कुलसचिव साहब लाल मौर्या ने बताया कि विभागों ने डाटा उपलब्ध नहीं कराया इसलिए दिक्कतें आ रही हैं। इनको दूर कराया जा रहा है। सिलेबस के विषय जो एजेंसी ने अपलोड नहीं किए उनको अपटेड कराया जा रहा है।
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