Bareilly News: सब बेगुनाह तो मुकुल को किसने मारा... साफ नहीं कर सकी सीबीआई; पुलिस ने किया था एनकाउंटर
रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता के पुत्र मुकुल गुप्ता की जून 2007 में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई। पुलिस ने बैंक लुटेरा बताकर उनका एनकाउंटर किया था। इस मामले में मृतक के पिता ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में सभी आरोपियों को क्लीनचिट मिल चुकी है।
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बदायूं निवासी मुकुल गुप्ता के बरेली में हुए एनकाउंटर में लगभग सभी आरोपियों को क्लीनचिट मिल गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के बावजूद केस की कई कड़ियां अब भी अनसुलझी हैं। कुछ को चार्जशीट से ही बाहर कर दिया गया तो बाकी के खिलाफ सबूत न मिलने की बात बताई जा रही है। ऐसे में यह सवाल आज भी बरकरार है कि निर्दोष मुकुल की मौत का जिम्मेदार कौन है?
बदायूं शहर के मोहल्ला ब्राह्मपुर निवासी रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी शन्नो गुप्ता की भी पिछले वर्षों में उनके घर में ही हत्या कर दी गई थी। विजेंद्र गुप्ता अपने बेटे मुकुल के बरेली के सीबीगंज थाना क्षेत्र में हुए एनकाउंटर के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। तत्कालीन ट्रेनी एएसपी जे. रविंद्र गौड़ के नेतृत्व में यह एनकाउंटर सीबीगंज एसओ विकास सक्सेना व उनकी टीम ने किया था।
तब पुलिस टीम ने मुकुल को लुटेरा बताया था, जबकि पहचान के दौरान साफ हुआ कि वह पढ़े-लिखे थे और बरेली की एक दवा कंपनी में एमआर थे। पुलिस ने उस वक्त रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की तो विजेंद्र गुप्ता ने कोर्ट की शरण ली। एफआर लगाई गई तो उसे चुनौती दी। मानवाधिकार आयोग ने एनकाउंटर को गलत मानकर संवेदना के तौर पर उन्हें पांच लाख रुपये का चेक भेजा तो दंपती ने वह भी लौटा दिया था।
पैरवी न करने के लिए दिए गए थे प्रलोभन
कोर्ट से लेकर पुलिस अफसरों की चौखट तक भटकते विजेंद्र गुप्ता के सिर पर बेटे के हत्यारोपियों को सजा दिलाने की धुन सवार थी। इससे कम उन्हें कुछ भी स्वीकार नहीं था। उन्होंने पत्रकारों से कई बार कहा था कि केस में पैरवी न करने को लेकर उनको प्रलोभन दिए जा रहे हैं। रकम की राशि लाखों से उठकर करोड़ तक पहुंच गई, पर बुजुर्ग दंपती टस से मस न हुए। अंतत: दंपती की हत्या से पैरवी की आखिरी कड़ी टूट गई और अब मुकुल के एनकाउंटर का राजफाश भी हमेशा के लिए सवालों में घिरकर रह गया है।