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Bareilly News: सब कैसे पढ़ें... नौ फीसदी किताबें बच्चों तक पहुंचीं ही नहीं
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बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग का सब पढ़ें-सब बढ़ें का नारा जिले में फेल हो गया है। जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कई विद्यार्थियों के पास सत्र शुरू होने के चार माह बाद भी किताबें नहीं पहुंचीं हैं। 19,290 बच्चे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के तहत रुपये अभिभावकों के खाते में न आने की वजह से यूनिफार्म, जूते और बैग के बिना स्कूल आ रहे हैं।
जिले में कक्षा तीन की 1,55,885 कार्यपुस्तिकाओं में से विभाग केवल 1,41,256 का ही वितरण कर पाया है। यही हाल अन्य कक्षाओं का है। शिक्षकों का कहना है कि जिन बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई हैं, उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कुछ ने इसी वर्ष कक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों से पुरानी किताबें ली हैं। ज्यादातर अब भी बिना किताबों के ही स्कूल आ रहे हैं।
बच्चों को किताबें दिलवाने के लिए शिक्षक लगातार बीआरसी व जिला स्तर के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद भी अब तक शत प्रतिशत वितरण नहीं हो पाया है। शिक्षकों की मानें तो किताबें न मिलने की वजह से कई बच्चे स्कूल आना ही नहीं चाहते। जिन 19,290 अभिभावकों के खातों में डीबीटी के रुपये नहीं आए हैं, वह भी चक्कर लगा रहे हैं।
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आधार बना अड़चन
डीबीटी के जरिये रुपये ट्रांसफर होने में आधार अड़चन बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि नए नामांकनों में 6,212 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनके अभिभावकों के आधार कार्ड का सत्यापन नहीं हो पा रहा। कुछ पुराने विद्यार्थियों के साथ भी यही समस्या है। इसी के चलते धनराशि खातों में नहीं जा पा रही। संवाद
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विभाग की ओर से सभी स्कूलों में किताबें भेजी जा चुकी हैं। हो सकता है कुछ स्कूलों में किताबें नहीं हो। एक सप्ताह में सभी बच्चों को किताबें दे दी जाएंगी। डीबीटी के जरिये भी शेष बचे अभिभावकों के खाते में रुपये भेजे जाएंगे। - संजय सिंह, बीएसए
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जिले में कक्षा तीन की 1,55,885 कार्यपुस्तिकाओं में से विभाग केवल 1,41,256 का ही वितरण कर पाया है। यही हाल अन्य कक्षाओं का है। शिक्षकों का कहना है कि जिन बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई हैं, उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कुछ ने इसी वर्ष कक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों से पुरानी किताबें ली हैं। ज्यादातर अब भी बिना किताबों के ही स्कूल आ रहे हैं।
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बच्चों को किताबें दिलवाने के लिए शिक्षक लगातार बीआरसी व जिला स्तर के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद भी अब तक शत प्रतिशत वितरण नहीं हो पाया है। शिक्षकों की मानें तो किताबें न मिलने की वजह से कई बच्चे स्कूल आना ही नहीं चाहते। जिन 19,290 अभिभावकों के खातों में डीबीटी के रुपये नहीं आए हैं, वह भी चक्कर लगा रहे हैं।
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डीबीटी के जरिये रुपये ट्रांसफर होने में आधार अड़चन बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि नए नामांकनों में 6,212 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनके अभिभावकों के आधार कार्ड का सत्यापन नहीं हो पा रहा। कुछ पुराने विद्यार्थियों के साथ भी यही समस्या है। इसी के चलते धनराशि खातों में नहीं जा पा रही। संवाद
विभाग की ओर से सभी स्कूलों में किताबें भेजी जा चुकी हैं। हो सकता है कुछ स्कूलों में किताबें नहीं हो। एक सप्ताह में सभी बच्चों को किताबें दे दी जाएंगी। डीबीटी के जरिये भी शेष बचे अभिभावकों के खाते में रुपये भेजे जाएंगे। - संजय सिंह, बीएसए