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Bareilly News: विश्वविद्यालय की लैब में उगाया जाएगा हिमालय का सोना कोर्डिसेप्स मशरूम
Tue, 26 Dec 2023 02:43 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 26 Dec 2023 02:43 AM IST
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बरेली। हिमालय का सोना कहे जाने वाले कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस मशरूम को अब रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लैब में उगाने की तैयारी है। इसके लिए 14 लाख की लागत से लैब तैयार की जाएगी। इसके अलावा छात्र और किसान मशरूम की खेती में सर्टिफिकेट कोर्स भी यहां से कर सकेंगे।
वनस्पति विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर विजय कुमार सिन्हाल ने बताया कि कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस मशरूम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पसंदीदा मशरूम कहा जाता है। हिमालय में उगने वाले इस मशरूम को कानपुर और दिल्ली की लैब में भी उगाया जा रहा है। अब इसे रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लैब में उगाने की तैयारी है।
उन्होंने बताया कि 14 लाख की लागत से लैब बनाने का प्रस्ताव कुलपति प्रो. केपी सिंह के सामने रखा गया है। स्वीकृत होने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया जाएगा। लैब तैयार होने के बाद मशरूम खेती में सटिर्फिकेट कोर्स शुरू करने की भी योजना है। उन्होंने बताया कि अभी आसपास के जिले में प्रशिक्षण केंद्र नहीं है। देहरादून और हिमाचल के सोलन में रिसर्च केंद्र खुले हुए हैं।
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आसपास के किसानों को होगा लाभ
विवि में केंद्र खुलने से आसपास के किसान सर्टिफिकेट कोर्स का लाभ उठा सकेंगे। इसकी अवधि भी एक माह या उससे कम रखी जाएगी, ताकि किसान इसे आसानी से कर सकें। सर्टिफिकेट के आधार पर उन्हें बैंक से कम ब्याज पर लोन भी मिल सकेगा।
क्या है कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस मशरूम
कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस मशरूम की ऐसी प्रजाति है, जिसे सबसे महंगे मशरूम के रूप में भी जाना जाता है। इस मशरूम की कीमत डेढ़ लाख रुपये प्रति किलो तक होती है। इसे हिमालय का सोना भी कहते हैं। क्योंकि यह हिमालय पर उगता है।
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वनस्पति विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर विजय कुमार सिन्हाल ने बताया कि कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस मशरूम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पसंदीदा मशरूम कहा जाता है। हिमालय में उगने वाले इस मशरूम को कानपुर और दिल्ली की लैब में भी उगाया जा रहा है। अब इसे रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लैब में उगाने की तैयारी है।
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उन्होंने बताया कि 14 लाख की लागत से लैब बनाने का प्रस्ताव कुलपति प्रो. केपी सिंह के सामने रखा गया है। स्वीकृत होने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया जाएगा। लैब तैयार होने के बाद मशरूम खेती में सटिर्फिकेट कोर्स शुरू करने की भी योजना है। उन्होंने बताया कि अभी आसपास के जिले में प्रशिक्षण केंद्र नहीं है। देहरादून और हिमाचल के सोलन में रिसर्च केंद्र खुले हुए हैं।
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आसपास के किसानों को होगा लाभ
विवि में केंद्र खुलने से आसपास के किसान सर्टिफिकेट कोर्स का लाभ उठा सकेंगे। इसकी अवधि भी एक माह या उससे कम रखी जाएगी, ताकि किसान इसे आसानी से कर सकें। सर्टिफिकेट के आधार पर उन्हें बैंक से कम ब्याज पर लोन भी मिल सकेगा।
क्या है कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस मशरूम
कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस मशरूम की ऐसी प्रजाति है, जिसे सबसे महंगे मशरूम के रूप में भी जाना जाता है। इस मशरूम की कीमत डेढ़ लाख रुपये प्रति किलो तक होती है। इसे हिमालय का सोना भी कहते हैं। क्योंकि यह हिमालय पर उगता है।