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डेढ़ घंटे तक मदद के लिए चीखते रहे आयकर
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फरीदपुर। आयकर अधिकारी मनोज गुप्ता को सिर्फ लखनऊ हाईवे के गड्ढों ने ही नहीं मारा। इर्दगिर्द इकट्ठी तमाम लोगों की भीड़ की संवेदनहीनता भी उनकी जान चली जाने की वजह बन गई। एक्सीडेंट में बुरी तरह घायल हुए मनोज गुप्ता कार की पिछली सीट पर फंस गए थे। यहीं से वह करीब डेढ़ घंटे तक खुद को अस्पताल पहुंचाने के लिए चीखते रहे। कार को घेरे खड़ी भीड़ में से कुछ लोग पुलिस को फोन तो करते रहे, लेकिन किसी ने भी उन्हें कार से निकालकर अस्पताल पहुंचाने के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। उधर, सिर्फ दो सौ मीटर की दूरी पर मौजूद यूपी 100 पुलिस भी फोन पर हादसे की सूचना मिलने के बावजूद डेढ़ घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची। आखिरकार मनोज गुप्ता ने भी भीड़ की आंखों के सामने ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। कार में उनके साथ बैठे दोनों लोगों की पहले ही मौत हो चुकी थी।
लखनऊ हाईवे पर शुक्रवार देर रात हादसा होने के बाद पुलिस और पब्लिक दोनों की संवेदनशून्यता का हिलाने वाला रवैया भी सामने आया। रात करीब दस बजे गांव जेड़ के नजदीक आयकर अधिकारी मनोज गुप्ता की कार रोडवेज बस से टकराई। हादसे में कार में मनोज गुप्ता के ड्राइवर नसीम और नौकर साहबलाल की फौरन ही मौत हो गई, लेकिन पिछली सीट पर बैठे मनोज गुप्ता बुरी तरह घायल होने के बाद भी जीवित थे। रोडवेज बस से उतरे यात्रियों की भीड़ जब कार के पास पहुंची तो मनोज गुप्ता ने लोगों से खुद को कार से निकालकर अस्पताल पहुंचाने को कहा, लेकिन किसी ने उनकी तरफ हाथ नहीं बढ़ाया। मनोज गुप्ता करीब डेढ़ घंटे तक लोगों से मदद की फरियाद करते रहे। इस बीच कुछ लोगों ने दो सौ मीटर की ही दूरी पर मौजूद यूपी 100 को फोन किया। सूचना मिलने के बावजूद पुलिस भी मौके पर नहीं पहुंची।
मनोज गुप्ता को पूरा एहसास था कि उनके साथ कार में मौजूद दोनो लोगों की मौत हो चुकी है और अगर समय से इलाज नहीं मिला तो उनकी भी जान चली जाएगी। इस वजह से वह लगातार गिड़गिड़ाते रहे लेकिन फिर भी उन्हें मदद नहीं मिली। पास ही स्थित एक फैक्ट्री के कर्मचारी भी मौके पर तमाशबीन बने रहे। आखिरकार मनोज गुप्ता ने भी दम तोड़ दिया। पुलिस उनकी मौत के बाद मौके पर पहुंची।
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मगर कीरतपुर में घायल युवक के लिए देवदूत बनी पुलिस
फरीदपुर के गांव कीरतपुर निवासी प्रसाद बाइक से गांव जा रहे थे। रास्ते में दुर्घटना का शिकार हो गए थे। उनकी पसलियां टूट गई और दिल बाहर की तरफ आ गया था। यूपी 100 पुलिस ने प्रसाद की हालत देखी तो एंबुलेंस का इंतजार नहीं किया, बल्कि पुलिसकर्मी उन्हें गोद में लेकर तत्काल सीएचसी पहुंच गए। वहां मौजूद डॉक्टर बासित अली इमरजेंसी पहुंच गए। डॉ बासु धनी में घायल युवक का दिल अपने स्थान पर करके टांके लगाकर खून का बहाव रोका। फिर एंबुलेंस बुलाकर उसे बरेली रेफर कर दिया। अधीक्षक ने सीएमओ को भी इस संबंध में सूचना दे दी। सीएमओ ने भी जिला अस्पताल में पहले से ही टीम को तैयार कर दिया, यूपी 100 पुलिस और डॉक्टरों की तत्परता से युवक की जान बच गई।
मेरी जानकारी के हिसाब से यूपी 100 पुलिस के पास ही फरीदपुर के एक्सीडेंट की सूचना सबसे पहले आई थी। यूपी 100 वहां देर से पहुंची, इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर यूपी 100 स्टाफ की गलती मिली तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. संसार सिंह, एसपी देहात
घटनास्थल पर बिखरा सामान देख फूट-फूटकर रोईं मनोज की पत्नी
फरीदपुर। घटनास्थल पर पहुंची आयकर अधिकारी की पत्नी सुनीता गुप्ता पोस्टमार्टम के बाद पति के शव को लेकर जौनपुर जा रही थीं। अपने भाई और बेटे के साथ घटनास्थल पर रुक गईं। पहले कार को निहारा और फिर घटनास्थल पर बिखरा सामान देखकर फूट फूटकर रोने लगीं। उनके भाई और बेटे ने सुनीता को ढांढस बंधाया। कोतवाली पहुंचकर बेटे सार्थक गुप्ता ने बस नंबर के आधार पर ड्राइवर के खिलाफ रिपोर्ट कराई। एक्सीडेंट जोन बने क्षेत्र में पंद्रह दिन में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। फरीदपुर के लोगों ने भी घटनास्थल को जाकर देखा। प्रभारी निरीक्षक धनंजय सिंह का कहना था कि इस संबंध में वह अपने स्तर से कोशिश करेंगे जिससे समस्या का समाधान हो सके।
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लखनऊ हाईवे पर शुक्रवार देर रात हादसा होने के बाद पुलिस और पब्लिक दोनों की संवेदनशून्यता का हिलाने वाला रवैया भी सामने आया। रात करीब दस बजे गांव जेड़ के नजदीक आयकर अधिकारी मनोज गुप्ता की कार रोडवेज बस से टकराई। हादसे में कार में मनोज गुप्ता के ड्राइवर नसीम और नौकर साहबलाल की फौरन ही मौत हो गई, लेकिन पिछली सीट पर बैठे मनोज गुप्ता बुरी तरह घायल होने के बाद भी जीवित थे। रोडवेज बस से उतरे यात्रियों की भीड़ जब कार के पास पहुंची तो मनोज गुप्ता ने लोगों से खुद को कार से निकालकर अस्पताल पहुंचाने को कहा, लेकिन किसी ने उनकी तरफ हाथ नहीं बढ़ाया। मनोज गुप्ता करीब डेढ़ घंटे तक लोगों से मदद की फरियाद करते रहे। इस बीच कुछ लोगों ने दो सौ मीटर की ही दूरी पर मौजूद यूपी 100 को फोन किया। सूचना मिलने के बावजूद पुलिस भी मौके पर नहीं पहुंची।
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मनोज गुप्ता को पूरा एहसास था कि उनके साथ कार में मौजूद दोनो लोगों की मौत हो चुकी है और अगर समय से इलाज नहीं मिला तो उनकी भी जान चली जाएगी। इस वजह से वह लगातार गिड़गिड़ाते रहे लेकिन फिर भी उन्हें मदद नहीं मिली। पास ही स्थित एक फैक्ट्री के कर्मचारी भी मौके पर तमाशबीन बने रहे। आखिरकार मनोज गुप्ता ने भी दम तोड़ दिया। पुलिस उनकी मौत के बाद मौके पर पहुंची।
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मगर कीरतपुर में घायल युवक के लिए देवदूत बनी पुलिस
फरीदपुर के गांव कीरतपुर निवासी प्रसाद बाइक से गांव जा रहे थे। रास्ते में दुर्घटना का शिकार हो गए थे। उनकी पसलियां टूट गई और दिल बाहर की तरफ आ गया था। यूपी 100 पुलिस ने प्रसाद की हालत देखी तो एंबुलेंस का इंतजार नहीं किया, बल्कि पुलिसकर्मी उन्हें गोद में लेकर तत्काल सीएचसी पहुंच गए। वहां मौजूद डॉक्टर बासित अली इमरजेंसी पहुंच गए। डॉ बासु धनी में घायल युवक का दिल अपने स्थान पर करके टांके लगाकर खून का बहाव रोका। फिर एंबुलेंस बुलाकर उसे बरेली रेफर कर दिया। अधीक्षक ने सीएमओ को भी इस संबंध में सूचना दे दी। सीएमओ ने भी जिला अस्पताल में पहले से ही टीम को तैयार कर दिया, यूपी 100 पुलिस और डॉक्टरों की तत्परता से युवक की जान बच गई।
मेरी जानकारी के हिसाब से यूपी 100 पुलिस के पास ही फरीदपुर के एक्सीडेंट की सूचना सबसे पहले आई थी। यूपी 100 वहां देर से पहुंची, इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर यूपी 100 स्टाफ की गलती मिली तो कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. संसार सिंह, एसपी देहात
घटनास्थल पर बिखरा सामान देख फूट-फूटकर रोईं मनोज की पत्नी
फरीदपुर। घटनास्थल पर पहुंची आयकर अधिकारी की पत्नी सुनीता गुप्ता पोस्टमार्टम के बाद पति के शव को लेकर जौनपुर जा रही थीं। अपने भाई और बेटे के साथ घटनास्थल पर रुक गईं। पहले कार को निहारा और फिर घटनास्थल पर बिखरा सामान देखकर फूट फूटकर रोने लगीं। उनके भाई और बेटे ने सुनीता को ढांढस बंधाया। कोतवाली पहुंचकर बेटे सार्थक गुप्ता ने बस नंबर के आधार पर ड्राइवर के खिलाफ रिपोर्ट कराई। एक्सीडेंट जोन बने क्षेत्र में पंद्रह दिन में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। फरीदपुर के लोगों ने भी घटनास्थल को जाकर देखा। प्रभारी निरीक्षक धनंजय सिंह का कहना था कि इस संबंध में वह अपने स्तर से कोशिश करेंगे जिससे समस्या का समाधान हो सके।