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बरेली-सितारगंज हाईवे- भूमि अधिग्रहण में घोटालों के दौरान तैनात रहे अमीन से छीना चार्ज
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बरेली। एनएच-74 बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी। हाल ही में कई बड़े अफसरों के साथ कलक्ट्रेट के कुछ बाबुओं के भी इसमें शामिल होने का खुलासा हुआ था। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने से अफसरों में खलबली भी है। इस हाईवे को टू-लेन के बाद अब फोर-लेन बनाने के लिए फिर भूमि अधिग्रहण होना है। पहले अधिग्रहण के दौरान हुईं गड़बड़ियां फिर न हों, इसलिए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी यानी एसएलएओ मदन कुमार ने भूमि अर्जन अमीन अनवर हुसैन से चार्ज हटा दिया है। कहने को इसे पटल बदलने की सामान्य प्रक्रिया बताया जा रहा है।
2012-13 में बरेली से सितारगंज हाईवे को सात से दस मीटर चौड़ा करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) को प्रशासन ने बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण कराया था। बाद में शासन से शिकायत हुई कि कई तत्कालीन अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर मुआवजे का भुगतान किया। बहेड़ी के पास हथमना, सिरसा और माधोपुर गांवों में कृषि भूमि को व्यावसायिक दिखाकर सर्किल रेट से कई गुना ज्यादा मुआवजा दिला दिया गया। इसमें अफसरों के साथ कलक्ट्रेट के कुछ बाबू भी शामिल थे। पूर्व कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन ने दो साल पहले शासन को इसकी जांच रिपोर्ट भी भेजी थी, लेकिन वह शासन में ही दबकर रह गई। सात साल बाद एक बार फिर इस एनएच-74 के चौड़ीकरण के लिए सैकड़ों हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। पहले हुई गड़बड़ी के दौरान तैनात रहा स्टाफ कहीं फिर कोई गड़बड़ी न करा दें, इसलिए अफसर चौकन्ने हैं। जमीन अधिग्रहण घोटाले के समय से एसएलएओ दफ्तर में तैनात भूमि अर्जन अमीन अनवर हुसैन से चार्ट हटा दिया गया है।
डीएम कोर्ट में चल रही है सुनवाई
जमीन अधिग्रहण घोटाले में जमीन के सर्वे को लेकर संतुष्ट होकर एनएचएआई ने कई भूमि स्वामियों को मुआवजा नहीं दिया था। यह मामला अभी भी डीएम कोर्ट में विचाराधीन है। इसके अलावा शासन स्तर पर भी इस मामले की जांच लंबित है।
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2012-13 में बरेली से सितारगंज हाईवे को सात से दस मीटर चौड़ा करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) को प्रशासन ने बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण कराया था। बाद में शासन से शिकायत हुई कि कई तत्कालीन अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर मुआवजे का भुगतान किया। बहेड़ी के पास हथमना, सिरसा और माधोपुर गांवों में कृषि भूमि को व्यावसायिक दिखाकर सर्किल रेट से कई गुना ज्यादा मुआवजा दिला दिया गया। इसमें अफसरों के साथ कलक्ट्रेट के कुछ बाबू भी शामिल थे। पूर्व कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन ने दो साल पहले शासन को इसकी जांच रिपोर्ट भी भेजी थी, लेकिन वह शासन में ही दबकर रह गई। सात साल बाद एक बार फिर इस एनएच-74 के चौड़ीकरण के लिए सैकड़ों हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। पहले हुई गड़बड़ी के दौरान तैनात रहा स्टाफ कहीं फिर कोई गड़बड़ी न करा दें, इसलिए अफसर चौकन्ने हैं। जमीन अधिग्रहण घोटाले के समय से एसएलएओ दफ्तर में तैनात भूमि अर्जन अमीन अनवर हुसैन से चार्ट हटा दिया गया है।
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डीएम कोर्ट में चल रही है सुनवाई
जमीन अधिग्रहण घोटाले में जमीन के सर्वे को लेकर संतुष्ट होकर एनएचएआई ने कई भूमि स्वामियों को मुआवजा नहीं दिया था। यह मामला अभी भी डीएम कोर्ट में विचाराधीन है। इसके अलावा शासन स्तर पर भी इस मामले की जांच लंबित है।
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