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जैन दंपत्ति मामले की स्थानांतरण अर्जी पर सुनवाई कल
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बरेेेली। जैन दंपती हत्याकांड को किसी अन्य कोर्ट में स्थानांतरण करने की अर्जी पर सुनवाई 18 अगस्त को होगी। इस मामले के एक अभियुक्त गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी की ओर से मामला किसी अन्य कोर्ट में स्थानांतरित करने की अर्जी दी गई है। अभियुक्त पप्पू गिरधारी उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति हैं।
जैन दंपती हत्याकांड मामले में अभियुक्त पप्पू गिरधारी के कोर्ट में हाजिर न होने पर अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम की अदालत ने 29 जुलाई को गैर जमानती वारंट जारी कर दिया था। अभियुक्त का गैर जमानती वारंट पांच अगस्त को भी जारी किया गया। अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से दी गई अर्जी में कहा गया कि उनका मुवक्किल बुखार से पीड़ित है, इसलिए उसे कोर्ट में आने से उन्होंने ही मना किया है। अर्जी में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि कोरोना काल में विपरीत आदेश पारित करने पर रोक है। कोर्ट ने अभियुक्त की ओर से दी गई इस अर्जी को खारिज करते हुए पांच अगस्त को गैर जमानती वारंट जारी किया।
इसके बाद अभियुक्त पप्पू गिरधारी की ओर से मामले को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की अर्जी जिला जज की अदालत में दी गई। इस मामले में मुकदमे की वादिनी प्रगति जैन को भी पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने उन्हें भी नोटिस जारी किया है। पांच अगस्त को ही सेशन अदालत ने तीन अभियुक्तों वजरउद्दीन, जगदीश और नरेश को जेल भेज दिया था। बाद में उन्हें जमानत दे दी गई। यहां बता दें कि 11 जून 1990 को नरेश जैन और उनकी पत्नी की सिविल लाइंस स्थित आवास में हत्या कर दी गई थी। इस घटना की रिपोर्ट नरेश जैन की बेटी प्रगति जैन ने लिखाई थी। इस मामले में 12 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है। इस हत्याकांड के कई अभियुक्तों की मौत हो चुकी है। इस चर्चित मामले की मूल पत्रावली भी गुम हो चुकी है। बाद में इसकी पत्रावली रिस्ट्रक्चर की गई है।
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जैन दंपती हत्याकांड मामले में अभियुक्त पप्पू गिरधारी के कोर्ट में हाजिर न होने पर अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम की अदालत ने 29 जुलाई को गैर जमानती वारंट जारी कर दिया था। अभियुक्त का गैर जमानती वारंट पांच अगस्त को भी जारी किया गया। अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से दी गई अर्जी में कहा गया कि उनका मुवक्किल बुखार से पीड़ित है, इसलिए उसे कोर्ट में आने से उन्होंने ही मना किया है। अर्जी में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि कोरोना काल में विपरीत आदेश पारित करने पर रोक है। कोर्ट ने अभियुक्त की ओर से दी गई इस अर्जी को खारिज करते हुए पांच अगस्त को गैर जमानती वारंट जारी किया।
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इसके बाद अभियुक्त पप्पू गिरधारी की ओर से मामले को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की अर्जी जिला जज की अदालत में दी गई। इस मामले में मुकदमे की वादिनी प्रगति जैन को भी पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने उन्हें भी नोटिस जारी किया है। पांच अगस्त को ही सेशन अदालत ने तीन अभियुक्तों वजरउद्दीन, जगदीश और नरेश को जेल भेज दिया था। बाद में उन्हें जमानत दे दी गई। यहां बता दें कि 11 जून 1990 को नरेश जैन और उनकी पत्नी की सिविल लाइंस स्थित आवास में हत्या कर दी गई थी। इस घटना की रिपोर्ट नरेश जैन की बेटी प्रगति जैन ने लिखाई थी। इस मामले में 12 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है। इस हत्याकांड के कई अभियुक्तों की मौत हो चुकी है। इस चर्चित मामले की मूल पत्रावली भी गुम हो चुकी है। बाद में इसकी पत्रावली रिस्ट्रक्चर की गई है।
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