खटारा होती जा रहीं सरकारी एंबुलेंस, कैसे मिलेगी राहत
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जिला अस्पताल में बनाए गए नोडल आफिस से एंबुलेंस 108 और 102 का संचालन किया जाता है। किसी भी सूचना पर तत्परता से पहुंचना और वहां से पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल लाना इनकी जिम्मेदारी है। फिलहाल कुछ समय से एंबुलेंस में टूटफूट, ब्रेक, गियर, क्लच, पंचर, बर्स्ट जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। भमोरा, आंवला, मुड़िया नवीबख्श, दलेलनगर, नवाबगंज की एंबुलेंस तो पिछले दिनों में कई बार खराब हो चुकी हैं। जिले के दूसरे ग्रामीण इलाकों की एंबुलेंस भी बेहतर हालत में नहीं हैं। बड़ी खामी होने पर इन्हें टाटा मोटर्स के अधिकृत सेंटर भेजा जाता है तो छोटी दिक्कतें अय्यूब खां चौराहे के पास स्थित एक सर्विस सेंटर पर दूर कराई जाती हैं। यहां भी दिन में चार से छह एंबुलेंस दुरुस्त होती हैं।
108 एंबुलेंस का स्थानीय नेटवर्क
जिले में 19 एंबुलेंस 108 श्रेणी की हैं। यह आठ से दस हजार किमी प्रतिमाह चलती हैं और करीब 80 से 90 घायलों या बीमारों को नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाती हैं। फौजदारी, एक्सीडेंट के घायलों के साथ ही गंभीर बीमारों को ले जाना इनकी जिम्मेदारी है।
102 एंबुलेंस का हाल
जिले में 38 एंबुलेंस 102 श्रेणी की हैं। गर्भवती महिलाओं को तीसरे माह से नवें माह तक चेकअप को अस्पताल लाना, डिलीवरी के लिए लाना और छोड़ना और एक साल तक बच्चे को टीकाकरण के लिए लाना इनका काम है। रिकार्ड के मुताबिक सभी एंबुलेंस दिन में करीब 425 केस करती हैँ।
रोड बेहतर हों तो दोगुने हो जाएं केस
जिले में एंबुलेंस 108 और 102 अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। देहात क्षेत्र के खराब रास्तों की वजह से वहीं की एंबुलेंस में ज्यादा खामियां आती हैं। रोड सही हों तो एंबुलेंस जल्दी सर्विस करेंगी और केस करीब दोगुने हो जाएंगे। - आशुतोष वाजपेई, जिला समन्वयक (एंबुलेंस सेल)