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जिला अस्पताल और सीएचसी की लड़ाई में मरीज बजे फुटबाल
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बरेली। मुख्यमंत्री के आदेश पर भी जिला अस्पताल और देहात के सरकारी अस्पतालों के बीच तालमेल नहीं बन पाया। मरीज पहले भी जिला अस्पताल और देहात के अस्पतालों के बीच फुटबाल बने हुए थे और अब भी बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने संचारी रोगों की सीएचसी पर जांच और इलाज के निर्देश दिए हैं लेकिन जिले भर के सीएचसी से जांच करने के बाद मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने से यहां के अफसर बौखला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस आपसी लड़ाई में सोमवार को बिशारतगंज के मलेरिया पीड़ित सचिन की जान पर बन आई थी। उन्हें मझगवां सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने भी उसे लौटा दिया। ऐसा ही रोंधी फरीदापुर की छह वर्षीय बच्ची योगिता के मामले में हुआ। तीन महीने पहले सीएचसी का मामला बताकर उसे एंटी रैबीज वैक्सीन लगाए बगैर जिला अस्पताल से लौटा दिया गया था। अंतत: मंगलवार को उसकी मौत हो गई। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. टीएस आर्या का कहना है कि सीएचसी से सामान्य मरीजों को भी रेफर करने से जिला अस्पताल पर लोड बढ़ रहा है। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला कहते हैं कि वह सभी सीएचसी को इस बारे में निर्देशित कर चुके हैं, लेकिन फिर भी जिला अस्पताल में मरीज को भर्ती तो कर ही लेना चाहिए ताकि उसकी जान के लिए खतरा न हो।
जिला अस्पताल में क्षमता से ज्यादा मरीज
मंगलवार को जिला अस्पताल फीमेल वार्ड में 15 बेड पर 20, आईसीसीयू में 10 बेड पर 18, मलेरिया फैल्सीपेरम में 10 बेड पर 19, मलेरिया वाईवैक्स में 10 बेड पर 15 मरीज भर्ती थे। कुल मिलाकर 27 बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए गए थे जबकि जिला अस्पताल में बुखार के लिए चार वार्ड बनाए गए हैं।
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मुख्यमंत्री ने संचारी रोगों की सीएचसी पर जांच और इलाज के निर्देश दिए हैं लेकिन जिले भर के सीएचसी से जांच करने के बाद मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने से यहां के अफसर बौखला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस आपसी लड़ाई में सोमवार को बिशारतगंज के मलेरिया पीड़ित सचिन की जान पर बन आई थी। उन्हें मझगवां सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने भी उसे लौटा दिया। ऐसा ही रोंधी फरीदापुर की छह वर्षीय बच्ची योगिता के मामले में हुआ। तीन महीने पहले सीएचसी का मामला बताकर उसे एंटी रैबीज वैक्सीन लगाए बगैर जिला अस्पताल से लौटा दिया गया था। अंतत: मंगलवार को उसकी मौत हो गई। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. टीएस आर्या का कहना है कि सीएचसी से सामान्य मरीजों को भी रेफर करने से जिला अस्पताल पर लोड बढ़ रहा है। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला कहते हैं कि वह सभी सीएचसी को इस बारे में निर्देशित कर चुके हैं, लेकिन फिर भी जिला अस्पताल में मरीज को भर्ती तो कर ही लेना चाहिए ताकि उसकी जान के लिए खतरा न हो।
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जिला अस्पताल में क्षमता से ज्यादा मरीज
मंगलवार को जिला अस्पताल फीमेल वार्ड में 15 बेड पर 20, आईसीसीयू में 10 बेड पर 18, मलेरिया फैल्सीपेरम में 10 बेड पर 19, मलेरिया वाईवैक्स में 10 बेड पर 15 मरीज भर्ती थे। कुल मिलाकर 27 बेड पर दो-दो मरीज भर्ती किए गए थे जबकि जिला अस्पताल में बुखार के लिए चार वार्ड बनाए गए हैं।
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