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कुत्ता काटे तो जान बच जाए पर सिस्टम काटे तो कौन बचाए

Wed, 11 Sep 2019 02:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2019 02:17 AM IST
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Health
बरेली। स्वास्थ्य विभाग की पत्थरदिल रवैये ने छह साल की मासूम की जान ले ली। कुत्ते के काटने के बाद इस बच्ची को उसका पिता तीन महीने पहले एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने जिला अस्पताल पहुंचा था लेकिन यहां से उसे अपने इलाके के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वैक्सीन लगवाने की बात कहकर लौटा दिया। सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते बेटी का देसी इलाज कराने को मजबूर हुआ पिता मंगलवार को जब हालत बिगड़ने के बाद उसे लखनऊ ले जा रहा था तभी रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
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प्राइवेट नौकरी करने वाले क्यारा ब्लॉक के गांव रोधी फरीदापुर निवासी भूपेंद्र की छह वर्षीय बेटी योगिता को तीन महीने पहले गांव में ही कुत्ते ने काट लिया था। एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए भूपेंद्र उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। भूपेंद्र के मुताबिक पर्चा बनवाने के बाद भी उन्हें स्टाफ ने आधार कार्ड दिखाने को कहा। घर जाकर आधार कार्ड लाए और स्टाफ को दिखाया तो बच्ची को वैक्सीन लगवाने के लिए अपने ब्लॉक क्यारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने को कह दिया गया। भूपेंद्र इसके बाद सब सेंटर रोंधी पहुंचे लेकिन वहां स्टाफ ही नहीं था। अगले दिन दोबारा सब सेंटर गए लेकिन एआरवी नहीं मिली। मजबूर होकर भूपेंद्र ने कुछ लोगों की सलाह पर बच्ची का देसी इलाज शुरू करा दिया।
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भूपेंद्र के मुताबिक सोमवार रात बच्ची को बुखार आया तो उन्होंने दवाई दवाई खिलाई लेकिन वह पानी से डरने लगी। पंखा भी बंद करा दिया। मंगलवार सुबह हालत और बिगड़ने पर भूपेंद्र उसे जिला अस्पताल लाए तो डॉक्टर ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ ले जाते वक्त बच्ची ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
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एंबुलेंस वाले ने भी नखरे दिखाए
भूपेंद्र का आरोप है कि मंगलवार को एंबुलेंस को कॉल किया तो उसके स्टाफ ने भी नखरा दिखाया और काफी देर बाद एंबुलेंस लेकर आया। करीब डेढ़ घंटे के बाद तो एंबुलेंस आई, ऊपर से जिला अस्पताल से जारी रेफर स्लिप में भी चूक कर दी गई। इस वजह से काफी समय यहीं खराब हो गया और योगिता ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

जिले में एआरवी की कोई कमी नहीं है। अगर कोई मरीज जिला अस्पताल पहुंचता है तो उसे एआरवी लगानी चाहिए थी। बच्ची के पिता उसका पर्चा लेकर मेरे पास शिकायत करें, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ

ऐसा नहीं हो सकता है कि पर्चा बनाने के बाद भी एआरवी न लगाई गई हो। जिला अस्पताल में रोज 20-25 मरीजों को एआरवी लगानी चाहिए। बच्ची के परिजन पर्चा लाकर शिकायत करें, लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई होगी। - डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस
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