{"_id":"5d74011d8ebc3e017834090d","slug":"health-bareilly-news-bly375261450","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानलेवा बुखार से तो बच जाएंगे लेकिन ‘मच्छरदानी’ में घुट रहा दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जानलेवा बुखार से तो बच जाएंगे लेकिन ‘मच्छरदानी’ में घुट रहा दम
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बरेली। स्वास्थ्य मंत्री की फटकार और सख्त कार्रवाइयों के बावजूद जिला अस्पताल में बुखार पीड़ितों की हालत बद से बदतर हो रही है। जानलेवा फैल्सीपेरम के मरीजों को महज पंखे के भरोसे भीषण गर्मी के प्रकोप से निजात दिलाई जा रही है। लिहाजा, मच्छरदानी में पंखे की हवा बेअसर साबित होने से मरीजों ने मच्छरदानी के इस्तेमाल से इनकार कर दिया है। उन्होंने अस्पताल पहुंचने पर फैल्सीपेरम से बचाव होने लेेकिन मच्छरदानी में दम घुट जाने की बात कह रहे हैं। जो अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगा रहा है।
जिला अस्पताल में सामान्य बुखार समेत मलेरिया और फैल्सीपेरम के करीब 60 मरीज भर्ती हैं। इसमें फैल्सीपेरम के 17 मरीज शामिल हैं। सामान्य बुखार पीड़ितों को फैल्सीपेरम और मलेरिया के रोगियों से अलग वार्ड में रखा गया है। फैल्सीपेरम समेत अन्य सभी मरीजों को मच्छरदानी लगाना अनिवार्य है। लेकिन मरीजों के मुताबिक वार्ड में लगे पंखों की गति धीमी है, इसलिए वार्ड में छह पंखे लगने के बाद भी गर्मी ने बेहाल कर रखा है। मच्छरदानी लगाने पर अंदर उमस और बेतहाशा गर्मी हो जाती है, इसलिए मच्छरदानी हटाने को हटा रहे हैं। बताया कि मच्छरदानी हटाने पर स्टाफ समस्या का समाधान करने के बजाय अभद्रता करता है।
निरीक्षण से पहले दुरुस्त हो जाती है व्यवस्था
मरीजों का कहना है कि पिछले दिनों अस्पताल में दो अधिकारियों का दौरा हुआ था। ठीक, उससे पहले स्टाफ ने सभी मुस्तैदी दिखाते हुए सभी मरीजों को मच्छरदानी लगाकर उसमें टिके रहने को कहा। इसलिए अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त मिलती है। बताया कि उनके जाने के बाद कुछ देर बाद वे फिर मच्छरदानी हटा दिए लेकिन तब कोई रोकटोक नहीं की गई।
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मरीज के पास लगा रहा है जमावड़ा
फैल्सीपेरम और मलेरिया रोगियों के पास उनके परिजनों का जमावड़ा लगा रहता है। जबकि फैल्सीपेरम के मरीजों में पाया जाने वाला प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम वायरस का बिना मच्छर काटे 50 मीटर की दूरी तक सिर्फ रोगी के संपर्क में आने से भी फैल्सीपेरम से मौजूद लोगों के पीड़ित होने के 70 फीसदी संभावना रहती है। फिर भी रोगियों के पास जमावड़ा होने पर व्यवस्था पर सवाल उठ रहा है।
बुखार का कहर: बुखार ने छीन ली मासूम और बुजुर्ग की सांसें
हाफिजगंज। बुखार से मौतें होने का सिलसिला नहीं थम रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग बुखार से मौतोें को नकारते हुए अपनी कागजी कार्रवाई को बेहतर बनाने पर तुला हुआ है। इन्हीं सब के बीच शनिवार को दो अलग जगहों पर मासूम और बुजुर्ग की सांसें बुखार ने थाम दी है। किसी और की जान न जाए इसलिए लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से कैंप लगाकर जानलेवा हो रहे बुखार का कहर कम करने की मांग की है।
हाफिजगंज के गांव काशी धर्मपुर निवासी भूपराम ने बताया कि उसकी 11 माह की बेटी राजकुमारी पिछले करीब माह भर से बुखार से पीड़ित चल रही थी। जिसका बरेली से लेकर लखनऊ तक इलाज कराया गया लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। वहीं, शनिवार को उसकी मौत हो गई। गांव वालों के मुताबिक करीब 15 दिन पहले क्षेत्र पंचायत सदस्य गीतादेवी की बुखार से मृत्यु हो गयी थी। उधर, बिशारतगंज के गांव बेहटा बुजुर्ग नन्हे लाल की मौत हो गई है। परिजनों के मुताबिक बुजुर्ग का इलाज रामपुर गार्डन के एक निजी अस्पताल में चल रहा था, शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, मझगंवा ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को कैंप लगाया था। 344 बुखार रोगियों की जांच की गई, जिनमें 103 में मलेरिया और 97 पीएफ के रोगी मिले। वहीं, शनिवार को 395 बुखार रोगियों की जांच में 93 रोगी मलेरिया और 83 पीएफ के रोगी मिले। मामले पर मझगवां के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वैभव राठौर से संपर्क किया गया लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।
जिले के 727 गांव संवेदनशील
बरेली। भले ही स्वास्थ्य विभाग जिले में बुखार पीड़ितों की तादाद पिछले साल की अपेक्षा कम होने का दावा कर रहा है लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। स्वास्थ्य विभाग की ही रिपोर्ट उसके दावों की पोल खोल रही है। सितंबर माह तक जिले में करीब 8 हजार से अधिक बुखार पीड़ित दर्ज हो चुके हैं और ये सिलसिला अभी जारी है। वहीं, पिछले साल जहां स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 15 ब्लॉकों में करीब पांच सौ गांवों को संवेदनशील माना था तो वहीं, इस बार 729 गांवों को संवेदनशील दर्ज किया गया है। साथ ही, इन संवेदनशील गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को पहुुंचकर कैंप लगाने और बुखार पीड़ितों की जांच और बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं।
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जिला अस्पताल में सामान्य बुखार समेत मलेरिया और फैल्सीपेरम के करीब 60 मरीज भर्ती हैं। इसमें फैल्सीपेरम के 17 मरीज शामिल हैं। सामान्य बुखार पीड़ितों को फैल्सीपेरम और मलेरिया के रोगियों से अलग वार्ड में रखा गया है। फैल्सीपेरम समेत अन्य सभी मरीजों को मच्छरदानी लगाना अनिवार्य है। लेकिन मरीजों के मुताबिक वार्ड में लगे पंखों की गति धीमी है, इसलिए वार्ड में छह पंखे लगने के बाद भी गर्मी ने बेहाल कर रखा है। मच्छरदानी लगाने पर अंदर उमस और बेतहाशा गर्मी हो जाती है, इसलिए मच्छरदानी हटाने को हटा रहे हैं। बताया कि मच्छरदानी हटाने पर स्टाफ समस्या का समाधान करने के बजाय अभद्रता करता है।
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निरीक्षण से पहले दुरुस्त हो जाती है व्यवस्था
मरीजों का कहना है कि पिछले दिनों अस्पताल में दो अधिकारियों का दौरा हुआ था। ठीक, उससे पहले स्टाफ ने सभी मुस्तैदी दिखाते हुए सभी मरीजों को मच्छरदानी लगाकर उसमें टिके रहने को कहा। इसलिए अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त मिलती है। बताया कि उनके जाने के बाद कुछ देर बाद वे फिर मच्छरदानी हटा दिए लेकिन तब कोई रोकटोक नहीं की गई।
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मरीज के पास लगा रहा है जमावड़ा
फैल्सीपेरम और मलेरिया रोगियों के पास उनके परिजनों का जमावड़ा लगा रहता है। जबकि फैल्सीपेरम के मरीजों में पाया जाने वाला प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम वायरस का बिना मच्छर काटे 50 मीटर की दूरी तक सिर्फ रोगी के संपर्क में आने से भी फैल्सीपेरम से मौजूद लोगों के पीड़ित होने के 70 फीसदी संभावना रहती है। फिर भी रोगियों के पास जमावड़ा होने पर व्यवस्था पर सवाल उठ रहा है।
बुखार का कहर: बुखार ने छीन ली मासूम और बुजुर्ग की सांसें
हाफिजगंज। बुखार से मौतें होने का सिलसिला नहीं थम रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग बुखार से मौतोें को नकारते हुए अपनी कागजी कार्रवाई को बेहतर बनाने पर तुला हुआ है। इन्हीं सब के बीच शनिवार को दो अलग जगहों पर मासूम और बुजुर्ग की सांसें बुखार ने थाम दी है। किसी और की जान न जाए इसलिए लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से कैंप लगाकर जानलेवा हो रहे बुखार का कहर कम करने की मांग की है।
हाफिजगंज के गांव काशी धर्मपुर निवासी भूपराम ने बताया कि उसकी 11 माह की बेटी राजकुमारी पिछले करीब माह भर से बुखार से पीड़ित चल रही थी। जिसका बरेली से लेकर लखनऊ तक इलाज कराया गया लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। वहीं, शनिवार को उसकी मौत हो गई। गांव वालों के मुताबिक करीब 15 दिन पहले क्षेत्र पंचायत सदस्य गीतादेवी की बुखार से मृत्यु हो गयी थी। उधर, बिशारतगंज के गांव बेहटा बुजुर्ग नन्हे लाल की मौत हो गई है। परिजनों के मुताबिक बुजुर्ग का इलाज रामपुर गार्डन के एक निजी अस्पताल में चल रहा था, शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, मझगंवा ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को कैंप लगाया था। 344 बुखार रोगियों की जांच की गई, जिनमें 103 में मलेरिया और 97 पीएफ के रोगी मिले। वहीं, शनिवार को 395 बुखार रोगियों की जांच में 93 रोगी मलेरिया और 83 पीएफ के रोगी मिले। मामले पर मझगवां के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वैभव राठौर से संपर्क किया गया लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।
जिले के 727 गांव संवेदनशील
बरेली। भले ही स्वास्थ्य विभाग जिले में बुखार पीड़ितों की तादाद पिछले साल की अपेक्षा कम होने का दावा कर रहा है लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। स्वास्थ्य विभाग की ही रिपोर्ट उसके दावों की पोल खोल रही है। सितंबर माह तक जिले में करीब 8 हजार से अधिक बुखार पीड़ित दर्ज हो चुके हैं और ये सिलसिला अभी जारी है। वहीं, पिछले साल जहां स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 15 ब्लॉकों में करीब पांच सौ गांवों को संवेदनशील माना था तो वहीं, इस बार 729 गांवों को संवेदनशील दर्ज किया गया है। साथ ही, इन संवेदनशील गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को पहुुंचकर कैंप लगाने और बुखार पीड़ितों की जांच और बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं।