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पुण्य कमाने का मौका मिला है पाप क्यों कर रहे हो.. संवेदनशील बनो
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बरेली। स्वास्थ्य विभाग की मंडलीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने अधिकारियों के जमकर पेच कसे। प्रोजेक्टर पर उनके कराए निरीक्षण की स्लाइड्स देखकर स्वास्थ्य मंत्री का लहजा बदलता तो अधिकारियों की धड़कनें तेज हो जातीं। मंत्री ने मंडल के चारों जिलों के सीएमओ समेत अन्य अफसरों को आंकड़े दुरुस्त करने के बजाय मरीजों की सेवा कर पुण्य कमाने की नसीहत दी। कहा, बीमारी का इलाज कर उसे रोकने के इंतजाम करें।
सुबह सवा ग्यारह बजे विकास भवन के अहिछत्र सभागार में आयोजित मंडलीय समीक्षा बैठक में सबसे पहले संचारी रोग के नियंत्रण पर मंडल की संयुक्त रिपोर्ट प्रदर्शित की गई। इसमें पीलीभीत में प्रभातफेरी और शाहजहांपुर में स्कूल रैली की रिपोर्ट गड़बड़ मिलने पर नाराजगी जताई। शौचालय निर्माण, नाले-नालियों की सफाई और हैंडपंप की रिपोर्ट देखकर फॉगिंग कराने के निर्देश दिए। फॉगिंग में बरेली, पीलीभीत और नालों की सफाई में बदायूं, शाहजहांपुर की स्थिति खराब मिलने पर नाराजगी जताई। शाहजहांपुर में अस्पताल परिसर की सफाई व्यवस्था बेहद खराब मिली।
बुखार के आंकड़ों में पिछले साल की अपेक्षा बरेली में पीवी (प्लाज्मोडियम वाईवैक्स) और पीएफ (प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम) में कमी देखकर सराहना की। इस रिपोर्ट में बरेली के मझगवां, भोजीपुरा, आंवला, रामनगर सर्वाधिक संवेदनशील बताया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी टीम से कराए निरीक्षण की स्लाइड दिखाई और जमकर फटकार लगाई। बोले, उन्हें पता था कि निरीक्षण से पहले अस्पताल चमक जाएगा। इसलिए पहले ही निरीक्षण करा लिया था, बदायूं अस्पताल तो साफ मिला लेकिन बरेली के हालात खराब हैं। बरेली जिला अस्पताल के सीएमएस को फटकारते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। दोबारा गोपनीय निरीक्षण कराने की चेतावनी देते हुए खामियां मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
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अस्पताल को घर और मरीज को परिजन समझो
मंत्री ने डॉक्टरों को नसीहत दी कि संवेदनहीनता से अस्पताल में मरीज बढ़ रहे हैं। घर में दो मच्छर दिखने पर मारने में जुट जाते हो। अस्पताल को अपना घर और मरीज को परिजन समझोगे, तभी बीमारियां थमेंगी। बोले- बीमारी होने के बाद डॉक्टर इलाज करते हैं लेकिन परिजन बीमारी से बचाने का प्रयास करते हैं। संवेदनहीनता की शिकायतों पर कहा, जान बचाना सबसे बड़ा पुण्य होता है। जब ईश्वर ने मौका दिया है तो पुण्य कमाओ, पाप मत करो। बेहतर इलाज पाकर मरीज जब घर जाता है तो उसका पूरा परिवार और नाते-रिश्तेदार सब दुआएं देते हैं। कहा- मेरे पास सभी जिलों की रिपोर्ट है, कहां कितनी अव्यवस्था और शिकायतें हैं, सब पता है।
डॉक्टरों को बताई मलेरिया की परिभाषा
स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों को मलेरिया की परिभाषा बताई। कहा- जहां मल यानी गंदगी है वह एरिया ‘मलेरिया’ कहलाता है। चारों जिलों में बरेली और बदायूं में सर्वाधिक मलेरिया ग्रस्त इलाके रेलवे ट्रैक किनारे सामने आए हैं। उन क्षेत्रों में टीम भेजकर स्लाइड भरने और सफाई कराने के निर्देश दिए।
आंकड़ों में गुमराह किया इसलिए गोपनीय जांच
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पताल में बैठकर आंकड़े दुरुस्त करने का ही नतीजा है कि बीमारियां थम नहीं रहीं। पिछले साल बरेली से बेहतर आंकड़े पहुंचे थे लेकिन स्थिति भयावह थी। इस वजह से ही गोपनीय जांच करानी पड़ी।
एक-दूसरे के सिर फोड़ा ठीकरा तो मिली नसीहत
सफाई समेत अन्य मुद्दों पर चारों जिलों के अफसर दूसरे विभागों से सहयोग न मिलने की बात कहकर मंत्री को गुमराह करने लगे। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए दोषारोपण के बजाय खामियों दूर करने की नसीहत दी। कहा, सिर्फ रैली और प्रभातफेरी से स्वास्थ्य सेवा बेहतर नहीं होगी, जमीन पर काम करना जरूरी है। सीएमओ को पिछले साल की तर्ज पर 30 सितंबर तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाने के निर्देश दिए।
यह रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ. पद्मावत, चिकित्सा परिवार कल्याण के निदेशक डॉ. उमाकांत, नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार, कमिश्नर रणवीर प्रसाद, डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह, नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. समेत चारों जिलों के सीडीओ, सीएमओ और सीएमएस समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
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सुबह सवा ग्यारह बजे विकास भवन के अहिछत्र सभागार में आयोजित मंडलीय समीक्षा बैठक में सबसे पहले संचारी रोग के नियंत्रण पर मंडल की संयुक्त रिपोर्ट प्रदर्शित की गई। इसमें पीलीभीत में प्रभातफेरी और शाहजहांपुर में स्कूल रैली की रिपोर्ट गड़बड़ मिलने पर नाराजगी जताई। शौचालय निर्माण, नाले-नालियों की सफाई और हैंडपंप की रिपोर्ट देखकर फॉगिंग कराने के निर्देश दिए। फॉगिंग में बरेली, पीलीभीत और नालों की सफाई में बदायूं, शाहजहांपुर की स्थिति खराब मिलने पर नाराजगी जताई। शाहजहांपुर में अस्पताल परिसर की सफाई व्यवस्था बेहद खराब मिली।
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बुखार के आंकड़ों में पिछले साल की अपेक्षा बरेली में पीवी (प्लाज्मोडियम वाईवैक्स) और पीएफ (प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम) में कमी देखकर सराहना की। इस रिपोर्ट में बरेली के मझगवां, भोजीपुरा, आंवला, रामनगर सर्वाधिक संवेदनशील बताया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी टीम से कराए निरीक्षण की स्लाइड दिखाई और जमकर फटकार लगाई। बोले, उन्हें पता था कि निरीक्षण से पहले अस्पताल चमक जाएगा। इसलिए पहले ही निरीक्षण करा लिया था, बदायूं अस्पताल तो साफ मिला लेकिन बरेली के हालात खराब हैं। बरेली जिला अस्पताल के सीएमएस को फटकारते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। दोबारा गोपनीय निरीक्षण कराने की चेतावनी देते हुए खामियां मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
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अस्पताल को घर और मरीज को परिजन समझो
मंत्री ने डॉक्टरों को नसीहत दी कि संवेदनहीनता से अस्पताल में मरीज बढ़ रहे हैं। घर में दो मच्छर दिखने पर मारने में जुट जाते हो। अस्पताल को अपना घर और मरीज को परिजन समझोगे, तभी बीमारियां थमेंगी। बोले- बीमारी होने के बाद डॉक्टर इलाज करते हैं लेकिन परिजन बीमारी से बचाने का प्रयास करते हैं। संवेदनहीनता की शिकायतों पर कहा, जान बचाना सबसे बड़ा पुण्य होता है। जब ईश्वर ने मौका दिया है तो पुण्य कमाओ, पाप मत करो। बेहतर इलाज पाकर मरीज जब घर जाता है तो उसका पूरा परिवार और नाते-रिश्तेदार सब दुआएं देते हैं। कहा- मेरे पास सभी जिलों की रिपोर्ट है, कहां कितनी अव्यवस्था और शिकायतें हैं, सब पता है।
डॉक्टरों को बताई मलेरिया की परिभाषा
स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों को मलेरिया की परिभाषा बताई। कहा- जहां मल यानी गंदगी है वह एरिया ‘मलेरिया’ कहलाता है। चारों जिलों में बरेली और बदायूं में सर्वाधिक मलेरिया ग्रस्त इलाके रेलवे ट्रैक किनारे सामने आए हैं। उन क्षेत्रों में टीम भेजकर स्लाइड भरने और सफाई कराने के निर्देश दिए।
आंकड़ों में गुमराह किया इसलिए गोपनीय जांच
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पताल में बैठकर आंकड़े दुरुस्त करने का ही नतीजा है कि बीमारियां थम नहीं रहीं। पिछले साल बरेली से बेहतर आंकड़े पहुंचे थे लेकिन स्थिति भयावह थी। इस वजह से ही गोपनीय जांच करानी पड़ी।
एक-दूसरे के सिर फोड़ा ठीकरा तो मिली नसीहत
सफाई समेत अन्य मुद्दों पर चारों जिलों के अफसर दूसरे विभागों से सहयोग न मिलने की बात कहकर मंत्री को गुमराह करने लगे। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए दोषारोपण के बजाय खामियों दूर करने की नसीहत दी। कहा, सिर्फ रैली और प्रभातफेरी से स्वास्थ्य सेवा बेहतर नहीं होगी, जमीन पर काम करना जरूरी है। सीएमओ को पिछले साल की तर्ज पर 30 सितंबर तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाने के निर्देश दिए।
यह रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ. पद्मावत, चिकित्सा परिवार कल्याण के निदेशक डॉ. उमाकांत, नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार, कमिश्नर रणवीर प्रसाद, डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह, नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. समेत चारों जिलों के सीडीओ, सीएमओ और सीएमएस समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।