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मंडल में हर साल बढ़ रहे एड्स के मरीज
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बरेली। एड्स की रोकथाम के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। मगर एड्स रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले साल 2018 में करीब 450 नए मरीज सामने आए। जबकि इस साल अब तक 250 नए मरीज सामने आ चुके हैं। मंडल में एड्स मरीजों की संख्या 3048 पहुंच गई है। एड्स मरीजों के मामले में बरेली सबसे आगे और बदायूं दूसरे नंबर पर है।
बरेली जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर (एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर) सितंबर 2012 में खुला था। पहले साल एआरटी सेंटर में दर्ज मंडल के एड्स मरीजों की संख्या करीब ढाई सौ थी, जो अगले साल 2013 में बढ़कर करीब 350 हो गई थी। इसके बाद एड्स मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती गई। मंडल में बरेली जिले में एड्स के सबसे ज्यादा करीब दो हजार मरीज हैं। बदायूं जिले में एड्स के करीब चार सौ मरीज होंगे। शाहजहांपुर में 348 और पीलीभीत में सबसे कम 300 के करीब मरीज हैं। विभागीय रिकार्ड के अनुसार टेस्ट कराने वाले 20 से 30 प्रतिशत लोगों में एड्स की पुष्टि होती है।
हालांकि एड्स के मरीजों की बढ़ी संख्या के पीछे जागरूकता और सक्रियता बताई जाती है। विभागीय अफसरों के अनुसार पहले लोग सामने आने से बचते थे, लेकिन अब खुद एचआईवी जांच कराने आते हैं। दूसरे हर ऑपरेशन कराने से पहले मरीज की एचआईवी जांच होती है। प्रत्येक गर्भवती महिला की एचआईवी जांच की जाती है। पहले एचआईवी जांच केवल जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में होती थी, लेकिन अब सभी सीएचसी में एचआईवी जांच की सुविधा है।
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ढाई सौ परिवारों के सदस्य हैं पीड़ित
मंडल में करीब ढाई सौ परिवार ऐसे हैं जिनमें माता-पिता और उनके बच्चे एड्स रोगी हैं। इनमें पहले माता-पिता को था, जिससे रोग बच्चों में पहुंच गया। हालांकि लगातार इलाज कराने से इन परिवारों के सभी सदस्य अपनी जिंदगी जी रहे हैं।
हर साल 25-30 लोगों की हो जाती है मौत
एड्स रोगी को पूरी जिंदगी लगातार दवा खाना चाहिए। मगर कुछ लोग खुद को स्वस्थ्य मानकर दवा छोड़ देते हैं। एड्स रोगियों को टीबी का खतरा ज्यादा रहता है। एड्स की दवा छोड़ देने पर रोगी टीबी का शिकार हो जाता है। हालत गंभीर होने पर उसकी मौत हो जाती है।
जिला जेल में है एड्स के दो दर्जन मरीज
जिला जेल के 50 बंदियों को एड्स रोग था। इनमें आधे जमानत पर छूट गए। अभी जिला जेल के दो दर्जन बंदी एड्स रोग के शिकार हैं, जिनका लगातार इलाज चल रहा है।
मरीजों में 70 प्रतिशत पुरुष मरीज
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मंडल के एड्स रोगियों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। मंडल के एड्स रोगियों में 70 प्रतिशत पुरुष और 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। 10 से 15 प्रतिशत अविवाहित लोग एड्स के शिकार हैं।
इन इलाकों में ज्यादा मरीज
बरेली के फरीदपुर और आंवला में एड्स के मरीज ज्यादा हैं। शहर की गरीब बस्तियों के लोग ज्यादा ग्रसित हैं। बदायूं में कादरचौक, शाहजहांपुर में जलालाबाद और पीलीभीत में पूरनपुर क्षेत्र में एड्स रोगी ज्यादा हैं।
जागरूकता से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एड्स के मामले में समय पर एचआईवी जांच और पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर लगातार इलाज जरूरी है। इसके लिए जागरूकता और बढ़ाने की जरूरत है। - मनोज वर्मा, डेटा मैनेजर एआरटी सेंटर बरेली
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बरेली जिला अस्पताल में एआरटी सेंटर (एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर) सितंबर 2012 में खुला था। पहले साल एआरटी सेंटर में दर्ज मंडल के एड्स मरीजों की संख्या करीब ढाई सौ थी, जो अगले साल 2013 में बढ़कर करीब 350 हो गई थी। इसके बाद एड्स मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती गई। मंडल में बरेली जिले में एड्स के सबसे ज्यादा करीब दो हजार मरीज हैं। बदायूं जिले में एड्स के करीब चार सौ मरीज होंगे। शाहजहांपुर में 348 और पीलीभीत में सबसे कम 300 के करीब मरीज हैं। विभागीय रिकार्ड के अनुसार टेस्ट कराने वाले 20 से 30 प्रतिशत लोगों में एड्स की पुष्टि होती है।
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हालांकि एड्स के मरीजों की बढ़ी संख्या के पीछे जागरूकता और सक्रियता बताई जाती है। विभागीय अफसरों के अनुसार पहले लोग सामने आने से बचते थे, लेकिन अब खुद एचआईवी जांच कराने आते हैं। दूसरे हर ऑपरेशन कराने से पहले मरीज की एचआईवी जांच होती है। प्रत्येक गर्भवती महिला की एचआईवी जांच की जाती है। पहले एचआईवी जांच केवल जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में होती थी, लेकिन अब सभी सीएचसी में एचआईवी जांच की सुविधा है।
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ढाई सौ परिवारों के सदस्य हैं पीड़ित
मंडल में करीब ढाई सौ परिवार ऐसे हैं जिनमें माता-पिता और उनके बच्चे एड्स रोगी हैं। इनमें पहले माता-पिता को था, जिससे रोग बच्चों में पहुंच गया। हालांकि लगातार इलाज कराने से इन परिवारों के सभी सदस्य अपनी जिंदगी जी रहे हैं।
हर साल 25-30 लोगों की हो जाती है मौत
एड्स रोगी को पूरी जिंदगी लगातार दवा खाना चाहिए। मगर कुछ लोग खुद को स्वस्थ्य मानकर दवा छोड़ देते हैं। एड्स रोगियों को टीबी का खतरा ज्यादा रहता है। एड्स की दवा छोड़ देने पर रोगी टीबी का शिकार हो जाता है। हालत गंभीर होने पर उसकी मौत हो जाती है।
जिला जेल में है एड्स के दो दर्जन मरीज
जिला जेल के 50 बंदियों को एड्स रोग था। इनमें आधे जमानत पर छूट गए। अभी जिला जेल के दो दर्जन बंदी एड्स रोग के शिकार हैं, जिनका लगातार इलाज चल रहा है।
मरीजों में 70 प्रतिशत पुरुष मरीज
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मंडल के एड्स रोगियों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। मंडल के एड्स रोगियों में 70 प्रतिशत पुरुष और 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। 10 से 15 प्रतिशत अविवाहित लोग एड्स के शिकार हैं।
इन इलाकों में ज्यादा मरीज
बरेली के फरीदपुर और आंवला में एड्स के मरीज ज्यादा हैं। शहर की गरीब बस्तियों के लोग ज्यादा ग्रसित हैं। बदायूं में कादरचौक, शाहजहांपुर में जलालाबाद और पीलीभीत में पूरनपुर क्षेत्र में एड्स रोगी ज्यादा हैं।
जागरूकता से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एड्स के मामले में समय पर एचआईवी जांच और पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर लगातार इलाज जरूरी है। इसके लिए जागरूकता और बढ़ाने की जरूरत है। - मनोज वर्मा, डेटा मैनेजर एआरटी सेंटर बरेली