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याद आएगा वीरेन दा का वो फक्कड़ अंदाज

Thu, 29 Sep 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Thu, 29 Sep 2016 01:08 AM IST
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He will miss the bohemian style Da Viren
वीरेन दा की स्मृ‌त‌ि में बैठक हुई
वीरेन डंगवाल का वो फक्कड़ अंदाज। सबसे घुलने मिलने की कला और साधारण से मुद्दे को असाधारण बनाने का हुनर, अब गुजरे जमाने की बात है लेकिन उनका अंदाज आज भी लोगों के दिलोदिमाग में है। बुधवार को पहली पुण्यतिथि पर उनके दोस्ताें, कवियाें और लेखकों ने उन्हें याद किया तो हर किसी की जुबां पर वीरेन दा की साफगोई के किस्से थे। आयोजन एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के केंद्रीय लाइब्रेरी में हुआ। 
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इतिहासकार प्रो. यूपी अरोरा ने कहा कि कौन सोचता था कि पपीता, समोसा और मक्खी पर कुछ लिखा जा सकता था लेकिन वीरेन दा ने इसमें भी सनसनाता और कनफटा जैसे शब्दों का प्रयोग कर इन्हें भी अमर कर दिया। जो भी उनसे जुडा वह उसे अपना घनिष्ठ बना लेते थे। उप परिवहन आयुक्त प्रियदर्शन मालवीय ने कहा कि वीरेन विचारधारा को अपना समझते थे। उन्होंने साबित किया कि हिंदी कविता का रास्ता बरेली से होकर भी गुजरता है। कविता भारत ने उनकी कविता ‘रामसिंह’ का पाठ किया। कुमार जितेंद्र ने ‘आएंगे उजले दिन जरूर आएंगे’ और डॉ. रमेश चंद्र शुक्ल ने ‘हमारा समाज’ का पाठ किया। वीरेन डंगवाल की बहन बीना डंगवाल ने भी कई यादें साझा करते हुए कहा कि वह मजदूर और सब्जी वाले से बतियाते थे। जब उनकी मौत हुई तो अखबार पढ़कर समझे कि जो उनसे बात करता था वह कितना बड़ा आदमी था। वीरेन दा पर सबका अधिकार था। फिराक गोरखपुर की एक कविता पिता हम सभी को सुनाते थे। इससे वीरेन दा को प्रेरणा मिली। बीना डंगवाल ने 15 अगस्त पर लिखी बचपन की कविता को सुनाया। ‘15 अगस्त का पावन दिन, भारत मां ने ली अंगड़ाई, बापू का हुआ स्वप्न पूरा, जब आजादी की हुई लड़ाई’। सुधीर विद्यार्थी ने कहा कि वह कहा करते थे कि जब रिटायर हाेंगे तो साइकिल खरीदेंगे और बरेली की एक-एक गली घूमकर कविता लिखेंगे। उन्हाेंने कविता पढ़ी- ‘शहर बड़ा हो रहा है और लोग छोटे। छोटे लोगों का शहर बड़ा नहीं हो सकता। चिकनी और चौड़ी सड़काें से नहीं बनते बड़े शहर, बहु मंजिला इमारतों और रेस्त्राआें से भी नहीं। चमचमाती गाड़ियां, पार्क और हवाई अड्डे भी किसी शहर को बड़ा नहीं बनाते। शहर को बड़ा बनाती है वीरेन डंगवाल की कविता’। इस मौके पर एके सक्सेना, कौशल गंगवार, यशपाल, टीडी भास्कर, बीडी अग्रवाल, यूनुस अंसारी, नीरज गंगवार आदि भी मौजूद रहे। 
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