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Bareilly News: एआरवी लगवाने के लिए लगाने पड़ रहे चक्कर
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बरेली। कुत्ते के हमले से जख्मी हुए लोगों को तीन सौ बेड अस्पताल समेत जिला अस्पताल में भी एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने की कवायद शुरू हो चुकी है, मगर पीड़ितों को बिना वजह दौड़ाया जा रहा है। सोमवार को जिला अस्पताल पहुंचे कई पीड़ितों को 300 बेड जाने के लिए कह दिया गया। इसको लेकर वह आक्रोशित रहे।
आजमनगर निवासी शायना बी ने बताया कि उनके बेटे को पिछले सप्ताह कुत्ते ने काट लिया था। एआरवी की पहली डोज तीन सौ बेड अस्पताल में लगवाई थी। डॉक्टर ने अगली तीन डोज जिला अस्पताल में लगवाने का सुझाव दिया था।
सोमवार सुबह वह बेटे को दूसरी डोज लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंची थीं। इमरजेंसी के डॉक्टर ने एआरवी न लगाने की बात कहकर तीन सौ बेड अस्पताल भेज दिया। एआरवी प्रभारी ने एआरवी लगाई। वहीं, सूफी टोला निवासी शीबू भी जिला अस्पताल से तीन सौ बेड अस्पताल भेजे गए थे।
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प्रभारी एडी एसआईसी डॉ. अजय मोहन के मुताबिक इमरजेंसी में गंभीर जख्मी को एआरएस लगती है। जिन्हें हल्का जख्म है, उन्हें पुराने परिसर स्थित बर्न वार्ड में एआरवी क्लीनिक जाना पड़ता है। अगर डॉक्टर जबरन चक्कर कटवा रहे हैं तो गलत है। सही जानकारी देने के लिए कहा जाएगा। ब्यूरो
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आजमनगर निवासी शायना बी ने बताया कि उनके बेटे को पिछले सप्ताह कुत्ते ने काट लिया था। एआरवी की पहली डोज तीन सौ बेड अस्पताल में लगवाई थी। डॉक्टर ने अगली तीन डोज जिला अस्पताल में लगवाने का सुझाव दिया था।
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सोमवार सुबह वह बेटे को दूसरी डोज लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंची थीं। इमरजेंसी के डॉक्टर ने एआरवी न लगाने की बात कहकर तीन सौ बेड अस्पताल भेज दिया। एआरवी प्रभारी ने एआरवी लगाई। वहीं, सूफी टोला निवासी शीबू भी जिला अस्पताल से तीन सौ बेड अस्पताल भेजे गए थे।
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प्रभारी एडी एसआईसी डॉ. अजय मोहन के मुताबिक इमरजेंसी में गंभीर जख्मी को एआरएस लगती है। जिन्हें हल्का जख्म है, उन्हें पुराने परिसर स्थित बर्न वार्ड में एआरवी क्लीनिक जाना पड़ता है। अगर डॉक्टर जबरन चक्कर कटवा रहे हैं तो गलत है। सही जानकारी देने के लिए कहा जाएगा। ब्यूरो