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भारत में आधी हुई संक्रमण की दर... मार्च तक काबू में आ सकता है कोरोना

Fri, 14 Aug 2020 02:02 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Fri, 14 Aug 2020 02:02 AM IST
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Half of infection rate in India .. Corona may come under control by March
आईवीआरआई - फोटो : आईवीआरआई

अगले साल मार्च और अप्रैल तक भारत में कोरोना का संक्रमण काफी हद तक काबू में आ जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के उलट आईवीआरआई और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी चेन्नई के वैज्ञानिकों की ओर से सार्क देशों में एक शोध के बाद कोरोना से जूझ रहे देश को राहत महसूस कराने वाला यह दावा किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक नेपाल और श्रीलंका को छोड़कर भारत समेत बाकी सभी सार्क देशों में कोरोना संक्रमण की दर लगातार कम हो रही है। यह सिलसिला आगे भी बने रहने की उम्मीद है।

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जुलाई की शुरुआत में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से आशंका जताई गई थी कि विश्व में कोरोना लंबे समय तक बना रह सकता है। आईवीआरआई और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इसे काफी हद तक खारिज किया है। हाल ही में सार्क देशों में किए गए व्यापक शोध के बाद दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों की ओर से जारी की गई संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मार्च-अप्रैल 2020 में कोरोना की शुरुआत के बाद एक संक्रमित व्यक्ति से औसतन 2.1 लोगों में संक्रमण फैल रहा था लेकिन अब यह संक्रमण घटकर लगभग आधी रह गई है।

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अब यह औसत एक व्यक्ति से 1.2 लोगों में संक्रमण फैलने का है। नेपाल और श्रीलंका को छोड़कर बाकी सार्क देशों में भी संक्रमण दर घट रही है। नेपाल यह दर पहले 1.29 थी जो अब 1.72 हो गई है। इसी तरह श्रीलंका में भी संक्रमण दर 1.14 से बढ़कर 1.21 हो गई है।
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शोध की रिपोर्ट के मुताबिक अगर संक्रमण की दर में इसी तरह गिरावट जारी रही तो मार्च-अप्रैल 2021 तक देश में कोरोना की महामारी काफी हद तक काबू में आ जाएगी। बता दें कि इस शोध में आईवीआरआई के महामारी रोग विभाग के छह और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपियोडेमियोलॉजी के दो वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव समेत सभी सार्क देशों में कोरोना संक्रमण की स्थिति पर व्यापक अध्ययन किया।

स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च करने वाले देशों में तेजी से फैला कोरोना

आईवीआरआई और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के वैज्ञानिकों के शोध में यह भी पता चला कि जिन देशों का स्वास्थ्य सेवाओं का बजट ज्यादा था वहां कोरोना का संक्रमण ज्यादा तेजी से फैला। शोध में शामिल रहे आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार ओआर के मुताबिक वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए तमाम डाटा इकट्ठा किए। शोध में सामने आया कि जो देश स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च कर रहे थे, वहां कोरोना का फैलाव अधिक रहा है। आवागमन में छूट देने वालों के मुकाबले जिन देशों में लॉकडाउन में कड़ाई की, वहां कोरोना संक्रमण का फैलाव काफी कम रहा है। एक सवाल के जवाब में डॉ. ओआर ने बताया कि ज्यादा स्वास्थ्य बजट वाले देशों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने का क्या कारण रहा, यह शोध का हिस्सा नहीं था।

इन बिंदुओं पर आधारित था शोध

आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार ओआर के मुताबिक कोरोना संक्रमण की वजह जानने के लिए वैज्ञानिकों ने सभी सार्क देशों की आबादी, साक्षरता और वहां के लोगों के आयु वर्ग के बारे में तमाम डाटा जुटाया। इन देशों में कोरोना टेस्टिंग के साथ लॉकडाउन और मास्क लगाने की बाध्यता कितनी सख्ती से लागू की गई, यह भी अध्ययन किया। यह भी देखा गया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना खर्च हो रहा है और हवाई सफर करने वालों की तादाद कितनी है।

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