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एसएसआई की हादसे में मौत से अफसर सन्न, अस्पताल पहुंचे
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डीआईजी, एसएसपी ने परिवार को सांत्वना दी, घायल सिपाही का हाल पूछा
बरेली। बिथरी थाने के एसएसआई की सड़क हादसे में मौत और सिपाहियों के घायल होने की खबर से जहां परिवार में कोहराम मच गया, वहीं अफसर भी हक्केबक्के रह गए। देर रात डीआईजी व एसएसपी समेत कई अफसरों ने अस्पताल जाकर घायल सिपाही का हाल देखा।
अमरोहा के मूल निवासी दरोगा रणधीर सिंह मार्च 1994 में पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। वह पिछली साल देवरनिया थाने में तैनात थे। वहां से बीस अगस्त को उन्हें बिथरी थाने का एसएसआई बनाकर भेजा गया था। रणधीर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा, बेटी और मां हैं। वह अपने परिवार के साथ आवास विकास कॉलोनी में किराये पर रहते थे। हादसे से थोड़ा पहले वह थाने से गश्त के लिए सरकारी जीप लेकर निकले थे तभी हादसा हो गया। पहले उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में लाया गया। यहां स्टाफ ने बाहर से ही उनकी हालत गंभीर बताकर दूसरी जगह ले जाने को कहा। दूसरे अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सूचना मिलते ही परिवार के लोग पहुंच गए और बिलखने लगे। डीआईजी राजेश पांडेय, एसएसपी शैलेश पांडेय समेत कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल आए। दूसरे अस्पताल में सिपाही कामेंद्र को प्राथमिक उपचार के बाद भेज दिया गया। वहीं अंकुर की हालत गंभीर थी। अफसरों ने उसके इलाज के बारे में डॉक्टरों से बात की। कहा कि बेहतर से बेहतर इलाज करें, खर्च की कमी नहीं आने दी जाएगी। हालांकि डॉक्टरों ने अंकुर की हालत खतरे से बाहर बताई। अफसरों ने एसएसआई के परिवार को भी सांत्वना दी, कहा कि विभाग हर तरह से मदद करेगा।
एसएसआई के सीने में घुस गई स्टेपनी
बरेली। हादसे के वक्त एसएसआई जीप के पीछे स्टेपनी वाले हिस्से के सामने खड़े होकर मोबाइल पर बात कर रहे थे। पुलिस जीप भी एक साइड में ही थी। बावजूद तेजी से आए ट्रक ने एसएसआई को टक्कर मारते हुए जीप को रौंद दिया। इससे एसएसआई का सीना स्टेपनी में घुस गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक उनकी मृत्यु वहीं हो गई थी पर साथी इस पर भरोसा नहीं कर पा रहे थे और उन्हें तत्काल ही बरेली लेकर चले गए। हादसे के वक्त ढाबे पर काफी भीड़ थी पर जब तक लोग आए, ड्राइवर व स्टाफ ट्रक छोड़कर भाग गया।
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बरेली। बिथरी थाने के एसएसआई की सड़क हादसे में मौत और सिपाहियों के घायल होने की खबर से जहां परिवार में कोहराम मच गया, वहीं अफसर भी हक्केबक्के रह गए। देर रात डीआईजी व एसएसपी समेत कई अफसरों ने अस्पताल जाकर घायल सिपाही का हाल देखा।
अमरोहा के मूल निवासी दरोगा रणधीर सिंह मार्च 1994 में पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। वह पिछली साल देवरनिया थाने में तैनात थे। वहां से बीस अगस्त को उन्हें बिथरी थाने का एसएसआई बनाकर भेजा गया था। रणधीर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा, बेटी और मां हैं। वह अपने परिवार के साथ आवास विकास कॉलोनी में किराये पर रहते थे। हादसे से थोड़ा पहले वह थाने से गश्त के लिए सरकारी जीप लेकर निकले थे तभी हादसा हो गया। पहले उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में लाया गया। यहां स्टाफ ने बाहर से ही उनकी हालत गंभीर बताकर दूसरी जगह ले जाने को कहा। दूसरे अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सूचना मिलते ही परिवार के लोग पहुंच गए और बिलखने लगे। डीआईजी राजेश पांडेय, एसएसपी शैलेश पांडेय समेत कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल आए। दूसरे अस्पताल में सिपाही कामेंद्र को प्राथमिक उपचार के बाद भेज दिया गया। वहीं अंकुर की हालत गंभीर थी। अफसरों ने उसके इलाज के बारे में डॉक्टरों से बात की। कहा कि बेहतर से बेहतर इलाज करें, खर्च की कमी नहीं आने दी जाएगी। हालांकि डॉक्टरों ने अंकुर की हालत खतरे से बाहर बताई। अफसरों ने एसएसआई के परिवार को भी सांत्वना दी, कहा कि विभाग हर तरह से मदद करेगा।
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एसएसआई के सीने में घुस गई स्टेपनी
बरेली। हादसे के वक्त एसएसआई जीप के पीछे स्टेपनी वाले हिस्से के सामने खड़े होकर मोबाइल पर बात कर रहे थे। पुलिस जीप भी एक साइड में ही थी। बावजूद तेजी से आए ट्रक ने एसएसआई को टक्कर मारते हुए जीप को रौंद दिया। इससे एसएसआई का सीना स्टेपनी में घुस गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक उनकी मृत्यु वहीं हो गई थी पर साथी इस पर भरोसा नहीं कर पा रहे थे और उन्हें तत्काल ही बरेली लेकर चले गए। हादसे के वक्त ढाबे पर काफी भीड़ थी पर जब तक लोग आए, ड्राइवर व स्टाफ ट्रक छोड़कर भाग गया।
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