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पावर कारपोरेशन को संविदा कर्मी देने वाली कंपनी ने जीएसटी में किया करोड़ों का गोलमाल

Sat, 12 Dec 2020 01:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2020 01:08 AM IST
सार

2019 में सब स्टेशन के संचालन-रखरखाव और लाइन फाल्ट सही करने का कंपनी ने लिया था काम, बरेली समेत कई जिलों में कंपनी अब भी कर रही काम
 

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The company which gave contract workers to Power Corporation made crores of rupees in GST
वस्तु एवं सेवा कर - फोटो : demo photo

विस्तार

पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी बिजली अफसर कराते रहे जीएसटी बिल का भुगतान
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प्रबंध निदेशक ने बरेली जोन में किए जा चुके भुगतान की जांच के लिए बनाई समिति

बरेली। पॉवर कारपोरेशन को संविदा कर्मचारी मुहैया कराने वाली कंपनी ओरियन सिक्योरिटी सॉल्यूशन ने जीएसटी विभाग को करोड़ों का चूना लगा दिया। पॉवर कॉरपोरेशन की आंतरिक संपरीक्षा (इंटरनल ऑडिट) में पाया गया कि जीएसटी पंजीकरण रद्द होने के बावजूद कंपनी ने पॉवर कारपोरेशन से जीएसटी बिल के भुगतान ले लिए मगर जीएसटी विभाग के खातों में रकम जमा नहीं कराई। पॉवर कारपोरेशन के अफसर भी जीएसटी जमा होने का सत्यापन कराए बगैर ही पिछले वर्ष से लगातार भुगतान करते रहे। छह से ज्यादा जिलों में कई करोड़ के गोलमाल की आशंका है। घोटाला सामने आने के बाद अब हड़कंप मचा है। फिलहाल बरेली जोन में हुए गोलमाल की जांच के लिए पॉवर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक ने चार सदस्यीय टीम गठित की है। वहीं जीएसटी विभाग ने भी अपनी ओर से जांच शुरू कर दी है।
पावर कारपोरेशन ने वर्ष 2019 में प्रदेश भर में उपकेंद्र संचालन, उनके रखरखाव और लाइनों पर होने वाले फाल्ट दुरुस्त करने के लिए निजी कंपनियों के माध्यम से संविदा कर्मी रखने के लिए निविदाएं मांगी थीं। बरेली मंडल समेत छह से ज्यादा जिलों में मैन पावर उपलब्ध करने का काम ओरियन सिक्योरिटी सॉल्यूशन नाम की निजी कंपनी को मिला। कंपनी ने संबंधित अधीक्षण अभियंता कार्यालयों से इसका लिखित अनुबंध किया, जिसमें कार्य शर्तें, कुशल और अकुशल कर्मी का मानदेय, जीएसटी भुगतान और लाभांश प्रतिशत आदि का ब्योरा था। इसके बाद कंपनी ने काम करना शुरू कर दिया। संबंधित वितरण खंडों में बिल बनाकर दिए और जीएसटी आदि का भुगतान ले लिया। कंपनी ने 18 प्रतिशत जीएसटी भुगतान विभाग से लिया लेकिन वाणिज्य कर/ केंद्रीय जीएसटी विभाग खातों में जमा नहीं किया। यह खेल पिछले साल से अब तक जारी रहा। बरेली से कुछ विभागीय अफसरों ने इसकी शिकायतें भी की मगर तब विभाग ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पिछले दिनों विभागीय ऑडिट इस खेल का खुलासा हुआ तो हड़कंप मचा। मुख्यालय स्तर पर लीपापोती के प्रयास भी हुए लेकिन मामला करोड़ों रुपये के घोटाले और सरकारी राजस्व के गोलमाल से जुड़ा होने पर जांच कराने को फैसला लिया गया।
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घोटाला कितने का... जांच करेगी टीम

बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत समेत कई जिलों में हुए जीएसटी राजस्व घोटाले को प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम सूर्यपाल गंगवार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने संबंधित जिलों में हुए गोलमाल के आंकलन के लिए जांच समिति बना दी हैं। बरेली जोन में गठित जांच समिति में मुख्य क्षेत्रीय अभियंता तारिक मतीन, जोन से संबद्ध अधीक्षण अभियंता सुनील कुमार, उप मुख्य लेखाधिकारी साजिद अली सदस्य और मुख्यालय पर तैनात वरिष्ठ एक्सईएन रामनरेश संयोजक नामित किए हैं।
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बरेली जोन में दस करोड़ का घोटाला, छानबीन शुरू

संबंधित 21 एक्सईएन से तीन दिन में मांगा जवाब

समिति सदस्य साजिद अली ने बताया कि ओरियन सिक्योरिटी सोल्यूशन कंपनी ने विभिन्न जिलों में संविदा कर्मी उपलब्ध कराने के लिए ठेका लिया था। जीएसटी पंजीकरण रद्द होने के बाद भी कंपनी ने जीएसटी भुगतान लेने के लिए बिल बनाकर भेज दिए। विभिन्न वितरण खंडों में जीएसटी बिल के भुगतान होते रहे मगर कंपनी ने इस रकम को जीएसटी विभाग खातों में जमा नहीं कराया है। बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत जिलों से करीब सात करोड़ रुपये से ज्यादा जीएसटी भुगतान होने का अनुमान है मगर ये राशि दस करोड़ रुपये तक हो सकती है। सभी जिलों को मिलाकर कई करोड़ रुपये का गोलमाल हो सकता है। जोन में संबंधित 21 एक्सईएन से तीन दिन में जवाब और जीएसटी भुगतान का ब्योरा मांगा गया है।

ईपीएफ, ईएसआई में भी घपले की आशंका

ओरियन सिक्योरिटी सोल्यूशन कंपनी ने बड़े स्तर पर करोड़ों रुपये का गोलमाल किया है। मुख्यालय ने आशंका जताई है कि कंपनी द्वारा जीएसटी में हेराफेरी करने के साथ संविदा कर्मियों के वेतन भुगतान, ईपीएफ, ईएसआई आदि मदों में भी गड़बड़ी हो सकती है। क्योंकि शिकायतें मिली हैं कि संविदा कर्मी रखने के नाम पर वसूली भी हुई थी। इसलिए इसका भी ब्योरा मांगा है। जांच शुरू होने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

‘पावर कारपोरेशन से करोड़ों रुपये जीएसटी वसूलने के बाद सरकारी खातों जमा नहीं करना गंभीर वित्तीय अनियमितता है। संबंधित अफसरों को जीएसटी बिल भुगतान करने से पहले सुनिश्चित करना चाहिए था कि ओरियन सिक्योरिटी सोल्यूशन कंपनी नियमित रुप से जीएसटी जमा कर रही है या नहीं। फिलहाल घोटाला सामने आने के बाद विभाग जांच करेगा और ब्याज समेत जीएसटी की रकम वसूल की जाएगी। - अरविंद कुमार, सहायक आयुक्त केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर

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