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बीडीए की भूमि कब्जाने वाले परिवार जाएंगे कोर्ट
बरेली।
Updated Fri, 09 Jun 2017 01:29 AM IST
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Grabbing the land of BDA Family to go to court
- फोटो : Grabbing the land of BDA Family to go to court
बीडीए की रामगंगा नगर आवासीय योजना विवादों में घिरती जा रही है। अभी बीडीए अपनी जमीन पर ठीक तरह से कब्जा भी नहीं ले पाया कि यहां अधिग्रहीत जमीन पर रजिस्ट्री कराने के बाद मकान बनाकर रहने वालों ने पेच फंसा दिया है। वह किसी भी कीमत पर हटने को तैयार नहीं हैं। चंदपुर बिचपुरी के 11 लोेग अतिक्रमण हटाने के विरोध में भूख हड़ताल पर हैं और बाकी धरने पर। बीडीए ने 260 परिवारों को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है। इसके विरोध में रजिस्ट्री कराकर घर बनाने वाले परिवार उच्च न्यायालय जाने की तैयारी में हैं।
बीडीए ने वर्ष 2004-05 में चंदपुर बिचपुरी, मोहनपुर उर्फ रामनगर, डोहरिया और अहिरोला में 269.96 हेक्टेयर जमीन पर रामगंगा नगर आवासीय योजना के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की थी, जो 2015 में पूरी हो पाई। अभी यहां किसानों को मुआवजा देने का काम चल रहा है। जिन किसानों की जमीन बीडीए ने अधिग्रहण की, उनमें से तीन सौ से ज्यादा किसानों ने अपनी जमीन आसपास के ग्रामीणों को बेचकर उसकी रजिस्ट्री भी करा दी। अब ये लोग उस पर अपने पक्के आवासीय मकान बनाकर रह रहे हैं। बीडीए इसे अपनी जमीन पर अतिक्रमण मानता है। इसको देखते हुए पिछले दिनों बीडीए ने दो दर्जन से ज्यादा पक्के निर्माण जेसीबी ले जाकर ध्वस्त किए और 260 कब्जेदारों को जगह खाली करने के लिए नोटिस भेजा। इसके विरोध में चंदपुर बिचपुरी और डोहरिया आदि गांवों के दर्जनों लोग सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। 11 लोग भूख हड़ताल पर हैं। चंदपुर बिचपुरी के वीरपाल पांडेय उर्फ बाबाजी, हरीश शर्मा, विजय कुमार, अखिलेश कुमार, राम प्रसाद, ऊषा देवी आदि का कहना है कि वह जमीन की रजिस्ट्री करा चुके हैं। उनके पास रहने के लिए दूसरा घर नहीं है। अगर उनके घर गिराए गए या बेघर किया गया तो वह इसके विरोध में हाईकोर्ट जाएंगे। बीडीए ने गेंद प्रशासन के पाले में डालकर अतिक्रमण अभियान फिलहाल स्थगित कर दिया है। जिलाधिकारी को इस मामले में अंतिम निर्णय लेना है।
रामगंगा नगर में जो लोग अधिग्रहण से पहले मकान बनाकर रह रहे हैं। उनको नहीं हटाया जाएगा, लेकिन उनकी आड़ में कुछ लोगों ने जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिक्रमण किया है। उनको हटाने का काम चल रहा था। अब वहां विरोध हो रहा है तो हम लोग जिलाधिकारी के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि जमीन का अधिग्रहण उनकी अनुमति से होता है।
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-सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव बीडीए
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बीडीए ने वर्ष 2004-05 में चंदपुर बिचपुरी, मोहनपुर उर्फ रामनगर, डोहरिया और अहिरोला में 269.96 हेक्टेयर जमीन पर रामगंगा नगर आवासीय योजना के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की थी, जो 2015 में पूरी हो पाई। अभी यहां किसानों को मुआवजा देने का काम चल रहा है। जिन किसानों की जमीन बीडीए ने अधिग्रहण की, उनमें से तीन सौ से ज्यादा किसानों ने अपनी जमीन आसपास के ग्रामीणों को बेचकर उसकी रजिस्ट्री भी करा दी। अब ये लोग उस पर अपने पक्के आवासीय मकान बनाकर रह रहे हैं। बीडीए इसे अपनी जमीन पर अतिक्रमण मानता है। इसको देखते हुए पिछले दिनों बीडीए ने दो दर्जन से ज्यादा पक्के निर्माण जेसीबी ले जाकर ध्वस्त किए और 260 कब्जेदारों को जगह खाली करने के लिए नोटिस भेजा। इसके विरोध में चंदपुर बिचपुरी और डोहरिया आदि गांवों के दर्जनों लोग सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। 11 लोग भूख हड़ताल पर हैं। चंदपुर बिचपुरी के वीरपाल पांडेय उर्फ बाबाजी, हरीश शर्मा, विजय कुमार, अखिलेश कुमार, राम प्रसाद, ऊषा देवी आदि का कहना है कि वह जमीन की रजिस्ट्री करा चुके हैं। उनके पास रहने के लिए दूसरा घर नहीं है। अगर उनके घर गिराए गए या बेघर किया गया तो वह इसके विरोध में हाईकोर्ट जाएंगे। बीडीए ने गेंद प्रशासन के पाले में डालकर अतिक्रमण अभियान फिलहाल स्थगित कर दिया है। जिलाधिकारी को इस मामले में अंतिम निर्णय लेना है।
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रामगंगा नगर में जो लोग अधिग्रहण से पहले मकान बनाकर रह रहे हैं। उनको नहीं हटाया जाएगा, लेकिन उनकी आड़ में कुछ लोगों ने जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिक्रमण किया है। उनको हटाने का काम चल रहा था। अब वहां विरोध हो रहा है तो हम लोग जिलाधिकारी के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि जमीन का अधिग्रहण उनकी अनुमति से होता है।
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-सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव बीडीए