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सरकार ने बढ़ाई बिजली दरें, डॉक्टरों ने बढ़ाया परामर्श शुल्क
Updated Mon, 11 Dec 2017 02:33 AM IST
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गरीबों को प्राइवेट डॉक्टरों का इलाज अब और महंगा पड़ेगा। शहर के डॉक्टरों ने यकायक अपनी ओपीडी की फीस 20 से 25 फीसदी तक बढ़ा दी है। फीस बढ़ाने के पीछे जो तर्क दिया जा रहा है, वह भी कुछ अजब सा है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने बिजली की दरों में 18 फीसदी की वृद्धि कर दी है। इससे पहले पिछले ही साल उन्होंने अपने कर्मचारियों का वेतन भी बढ़ाया है। ऐसे में ओपीडी की फीस बढ़ाने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। बहरहाल, अचानक ओपीडी फीस में अच्छी-खासी वृद्धि कर दिए जाने के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पर बरेली के स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट तलब कर ली है।
बरेली के 200 से अधिक क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं। इनमें कुछ समय पहले तक पांच से सात दिन के पर्चे न्यूनतम 200 से लेकर अधिकतम 800 रुपये तक में बनाए जा रहे थे। अब यह फीस बढ़ाकर 300 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक कर दी गई है। कुछ डॉक्टरों ने तो अपना परामर्श शुल्क 300 रुपये से सीधे बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया है। इसी तरह इमरजेंसी फीस 600 रुपये से बढ़ाकर 800 से 900 रुपये तक कर दी गई है। यही नहीं, जो पर्चा सात दिनों के लिए मान्य हुआ करता था, कुछ डॉक्टरों ने उसकी समयसीमा भी अब घटाकर पांच दिन कर दी है। कंसल्टेंसी फीस बढ़ाने के पीछे निजी डॉक्टरों का तर्क है कि बिजली के रेट शनिवार से ही 18 फीसदी बढ़ गए हैं। क्लीनिक और अस्पताल का बिल हजारों में आता है। कमाने वाला सिर्फ डॉक्टर ही होता है। वे कैसे इसकी भरपाई करेंगे। बहरहाल इस मामले में मरीजों की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय के पोर्टल पर शिकायत की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि डॉक्टरों की फीस में काफी असंतुलन है। एक ही विशेषज्ञता के डॉक्टरों की फीस अलग-अलग है। मुख्यमंत्री कार्यालय से आई इस शिकायत पर एडी हेल्थ ने सीएमओ से रिपोर्ट मांगी है।
इनकम टैक्स का अतापता नहीं
शहर के कई डॉक्टर मरीजों को परामर्श शुल्क की रसीद नहीं देते हैं। जाहिर है कि ओपीडी से होने वाली आय का उनके क्लीनिक पर कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, लिहाजा आयकर का भुगतान भी मनमाने ढंग से होता है। जिले में कई डॉक्टराें के खिलाफ आयकर विभाग के पास ऐसी शिकायतें पहुंची हैं जो ओपीडी तो सैकड़ों मरीजों की करते हैं, लेकिन लेकिन रसीद नाममात्र के मरीजों को दी जाती हैं।
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इमरजेंसी के नाम पर मनमानी
शहर के डॉक्टर सामान्य श्रेणी के मरीजों को भी इमरजेंसी में देखने के नाम पर मनमानी फीस वसूल कर लेते हैं। जो रोगी ओपीडी में लगने वाली लंबी लाइन से बचना चाहते हैं, इमरजेंसी फीस लेकर उन्हें अलग से देख लिया जाता है। कुछ डॉक्टरों के यहां ओपीडी में अर्जेंट दिखाने के लिए 300 से 400 रुपये ज्यादा देने पड़ते हैं।
शहर के डॉक्टर और उनकी ओपीडी
विशेषज्ञ क्लीनिक ओपीडी/इमरजेंसी प्रतिदिन परामर्श शुल्क
ईएनटी 35 1600 100-500
नेत्र 50 2000 200-300
आर्थो 68 2720 300-400
सर्जरी 55 2200 300-500
न्यूरो 20 200 500-1100
त्वचा 12 800 500-600
फिजीशियन 88 5280 250-300
बाल रोग 75 1775 200-300
स्त्री रोग 80 2115 300
दंत विशेषज्ञ 55 1650 150-250
(नोट- विशेषज्ञों की क्लीनिक के अनुमानित आंकड़े स्वास्थ्य विभाग व आईएमए के चिकित्सकों के अनुसार है। ओपीडी व इमरजेंसी का आंकलन न्यूनतम मरीजों के अनुसार है। परामर्श शुल्क रुपये में।)
कोट
बरेली में सबसे ज्यादा डॉक्टर चैरिटी के तौर पर मरीजों और गरीबों की सेवा करते हैं। वे अपनी फीस सुविधा, अनुभव और खर्च को देखते हुए बढ़ाते हैं। यह जानकारी में नहीं है कि सभी डॉक्टरों ने फीस में एक साथ बढ़ोत्तरी कर दी है। हो सकता है कि कुछ डॉक्टरों ने फीस बढ़ाई हो। हालांकि इस संबंध में आईएमए कोई निर्णय नहीं लेती है। - डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, अध्यक्ष आईएमए
प्राइवेट डॉक्टरों की फीस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। हालांकि ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिसके बाद शासन को पत्र लिखा गया है। मुख्यमंत्री से हुई शिकायत के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। -डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ
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बरेली के 200 से अधिक क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं। इनमें कुछ समय पहले तक पांच से सात दिन के पर्चे न्यूनतम 200 से लेकर अधिकतम 800 रुपये तक में बनाए जा रहे थे। अब यह फीस बढ़ाकर 300 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक कर दी गई है। कुछ डॉक्टरों ने तो अपना परामर्श शुल्क 300 रुपये से सीधे बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया है। इसी तरह इमरजेंसी फीस 600 रुपये से बढ़ाकर 800 से 900 रुपये तक कर दी गई है। यही नहीं, जो पर्चा सात दिनों के लिए मान्य हुआ करता था, कुछ डॉक्टरों ने उसकी समयसीमा भी अब घटाकर पांच दिन कर दी है। कंसल्टेंसी फीस बढ़ाने के पीछे निजी डॉक्टरों का तर्क है कि बिजली के रेट शनिवार से ही 18 फीसदी बढ़ गए हैं। क्लीनिक और अस्पताल का बिल हजारों में आता है। कमाने वाला सिर्फ डॉक्टर ही होता है। वे कैसे इसकी भरपाई करेंगे। बहरहाल इस मामले में मरीजों की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय के पोर्टल पर शिकायत की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि डॉक्टरों की फीस में काफी असंतुलन है। एक ही विशेषज्ञता के डॉक्टरों की फीस अलग-अलग है। मुख्यमंत्री कार्यालय से आई इस शिकायत पर एडी हेल्थ ने सीएमओ से रिपोर्ट मांगी है।
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इनकम टैक्स का अतापता नहीं
शहर के कई डॉक्टर मरीजों को परामर्श शुल्क की रसीद नहीं देते हैं। जाहिर है कि ओपीडी से होने वाली आय का उनके क्लीनिक पर कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, लिहाजा आयकर का भुगतान भी मनमाने ढंग से होता है। जिले में कई डॉक्टराें के खिलाफ आयकर विभाग के पास ऐसी शिकायतें पहुंची हैं जो ओपीडी तो सैकड़ों मरीजों की करते हैं, लेकिन लेकिन रसीद नाममात्र के मरीजों को दी जाती हैं।
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इमरजेंसी के नाम पर मनमानी
शहर के डॉक्टर सामान्य श्रेणी के मरीजों को भी इमरजेंसी में देखने के नाम पर मनमानी फीस वसूल कर लेते हैं। जो रोगी ओपीडी में लगने वाली लंबी लाइन से बचना चाहते हैं, इमरजेंसी फीस लेकर उन्हें अलग से देख लिया जाता है। कुछ डॉक्टरों के यहां ओपीडी में अर्जेंट दिखाने के लिए 300 से 400 रुपये ज्यादा देने पड़ते हैं।
शहर के डॉक्टर और उनकी ओपीडी
विशेषज्ञ क्लीनिक ओपीडी/इमरजेंसी प्रतिदिन परामर्श शुल्क
ईएनटी 35 1600 100-500
नेत्र 50 2000 200-300
आर्थो 68 2720 300-400
सर्जरी 55 2200 300-500
न्यूरो 20 200 500-1100
त्वचा 12 800 500-600
फिजीशियन 88 5280 250-300
बाल रोग 75 1775 200-300
स्त्री रोग 80 2115 300
दंत विशेषज्ञ 55 1650 150-250
(नोट- विशेषज्ञों की क्लीनिक के अनुमानित आंकड़े स्वास्थ्य विभाग व आईएमए के चिकित्सकों के अनुसार है। ओपीडी व इमरजेंसी का आंकलन न्यूनतम मरीजों के अनुसार है। परामर्श शुल्क रुपये में।)
कोट
बरेली में सबसे ज्यादा डॉक्टर चैरिटी के तौर पर मरीजों और गरीबों की सेवा करते हैं। वे अपनी फीस सुविधा, अनुभव और खर्च को देखते हुए बढ़ाते हैं। यह जानकारी में नहीं है कि सभी डॉक्टरों ने फीस में एक साथ बढ़ोत्तरी कर दी है। हो सकता है कि कुछ डॉक्टरों ने फीस बढ़ाई हो। हालांकि इस संबंध में आईएमए कोई निर्णय नहीं लेती है। - डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, अध्यक्ष आईएमए
प्राइवेट डॉक्टरों की फीस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। हालांकि ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिसके बाद शासन को पत्र लिखा गया है। मुख्यमंत्री से हुई शिकायत के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। -डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ