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ग्लैंडर को लेकर अलर्ट, तीन सौ सैंपल भेजे

Wed, 31 Aug 2016 01:17 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली। Updated Wed, 31 Aug 2016 01:17 AM IST
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अश्व प्रजाति के पशुओं में ग्लैंडर बीमारी को लेकर पशु पालन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। विभाग की ओर से जिले के तीन सौ घोड़ों के ब्लड के नमूने जांच के लिए हिसार स्थित अश्व अनुसंधान केंद्र को भेजे गए हैं। अश्व पालकों को हिदायत दी गई है कि उन्हें जैसे ही लक्षण नजर आएं, सूचित करें ताकि सैंपल लिए जा सकें। हालांकि अभी तक जिले में इस बीमारी की पुष्टि का कोई भी मामला हाल में सामने नहीं आया है। कुछ महीने पहले भोजीपुरा ब्लाक के बोहित गांव में एक घोड़े में ग्लैंडर की पुष्टि हुई थी। घोड़े को बाद में दफना दिया गया था। वह एक मामला सामने आने के बाद बरेली में इस बीमारी हो लेकर पशु पालन विभाग सतर्क हुआ है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि निगरानी रखी जा रही है। इसी कड़ी में अब तक तीन सौ घोड़ों के सैंपल लिए जा चुके हैं। विभाग के पशु चिकित्सकों को निगरानी के निर्देश दे दिए गए हैं। ब्रुक इंडिया संस्था से भी इसमें सहयोग मांगा गया है। उसके वर्कर भी नजर रखे हुए हैं। बता दें कि कुछ समय पहले पड़ोसी जनपद बदायूं के शेखूपुर में भी घोड़ों के ग्लैंडर बीमारी की पुष्टि हुई थी।
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खतरनाक है बीमारी
इस बीमारी को ग्लैंडर फारसी के नाम से जाना जाता है। यह अश्व प्रजाति के पशुओं- घोड़े, खच्चर और गधों में होती है। सीवीओ बताते हैं कि यह ऐसी संक्रमित बीमारी है जो बल्कोलडेरिया मेलिआई नामक वायरस से फैलती है। इसकी चपेट में आने वाले अश्व को सांस लेने में दिक्कत होती है और नाक से पानी बहने लगता है। घोड़े के शरीर में गांठे भी बनने लगती हैं, जो बाद में फूलने के बाद सड़ने लगती है और बाद में घोड़े की मौत हो जाती है।
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दफनाना ही एकमात्र विकल्प
ग्लैंडर बीमारी चूंकि संक्रमण से दूसरे पशुओं में भी फैलने लगती है इसलिए फारसी एक्ट के तहत इससे ग्रस्त घोड़ों को दफनाने का प्रावधान है। इससे रोग की रोकथाम होती है। शासन ने दफनाए गए घोड़े के मालिक को मुआवजा के रूप में 25 हजार की राशि देने का प्रावधान भी किया है।
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