लॉकडाउन के बाद काम की तलाश में निकले शहर के तीन होनहारों को बहा ले गई गंगनहर

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Updated Sun, 09 Aug 2020 01:22 AM IST
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गंगनहर हादसे में लापता आशीष ध्यानी के घरवाले।
गंगनहर हादसे में लापता आशीष ध्यानी के घरवाले। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

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कार सवार तीन युवकों का 24 घंटे बाद भी नहीं लगा सुराग, परिवारों में मातम
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कई लोग गाजियाबाद पहुंचे, घरवालों को अब भी सकुशल लौटने की उम्मीद

बरेली। गाजियाबाद के मसूरी की गंगनहर ने बरेली निवासी तीन परिवारों की खुशियों को ग्रहण लगा दिया है। लॉकडाउन के बाद काम के लिए निकले शहर के चार नौजवानों की स्विफ्ट डिजायर कार शुक्रवार रात गंगनहर में समा गई। इनमें से एक को बचा लिया गया जबकि तीन युवक बह गए। उनका 24 घंटे बाद भी सुराग नहीं लग सका है। खबर मिलने के बाद से उनके परिवारों में कोहराम मचा है। अधिकांश घरवाले मसूरी रवाना हो गए हैं तो कुछ निराश होकर शाम ढले वहां से लौट आए हैं। परिवारों को इनके अब भी सकुशल लौटने की उम्मीद है। वे लगातार भगवान से यही प्रार्थना कर रहे हैं।

नई नौकरी की तलाश में निकले थे इकलौते बेटे आशीष ध्यानी

कर्मचारी नगर की कृष्ण वाटिका कॉलोनी निवासी आशीष ध्यानी के घर शनिवार शाम उत्तराखंड महासभा के राष्ट्रीय मंत्री राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल मौजूद मिले। उन्होंने परिवार को उम्मीद बंधाने के साथ ही गाजियाबाद एसएसपी से जल्द लापता युवकों को ढूंढने की मांग की। पर्वतीय समाज से जुड़े आशीष के पिता वीके ध्यानी सेना में सूबेदार के पद से रिटायर हैं। मां शिक्षिका हैं। खबर मिलने के बाद से उनकी तबीयत बिगड़ गई है। पहले यह परिवार सुभाषनगर में रहता था, पांच साल पहले ही कृष्ण वाटिका में आया है। परिवार ने बताया कि आशीष नोएडा की कंपनी में जॉब करते थे। लॉकडाउन लागू होने पर वह वापस आ गए थे। शुक्रवार को वह चंडीगढ़ में ठेकेदारी करने वाले अपने दोस्त पंकज उर्फ परमवीर के साथ वहां काम की तलाश में जा रहे थे। आशीष पांच बहनों के अकेले भाई और बुजुर्ग माता-पिता की उम्मीद हैं। उनकी अभी शादी नहीं हुई है।

होली से खाली बैठे विनोद भी निकले थे नौकरी करने

पीलीभीत रोड के संसार एन्कलेव निवासी विनोद उर्फ विन्नी के पिता मुकुट बिहारी लाल गंगवार घर पर मायूस बैठे थे। बताया, बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पहले दिल्ली में जॉब करता था। होली के बाद से घर पर था। अब नए सिरे से काम शुरू करने की योजना बनाई थी। विनोद के पिता भी सेना से रिटायर हैं। वर्ष 2018 में काजल से विन्नी की शादी हुई थी। पत्नी काजल भी घर पर थीं और ईश्वर से अपने सुहाग के सही सलामत होने की कामना कर रही थीं। वह गर्भवती हैं।

संजीव के घर में लटका है ताला

करगैना के गंगानगर कॉलोनी निवासी संजीव उर्फ मोनू के घर में ताला लगा था। रिश्ते के भाई सोनू बाहर मिले। उन्होंने बताया कि संजीव अपने साथी पंकज के साथ ठेकेदारी का काम कर रहे थे। चंडीगढ़ के पंचकूला में काम चल रहा था। काफी समय से घर पर थे। सभी साथी चंडीगढ़ ही जा रहे थे। वहां इन्हें फिर से काम जमाना था कि हादसे की सूचना आ गई। बताया, संजीव के परिवार में पत्नी रूबी के अलावा दो बेटे जगमान और अभि हैं।

पंकज की हालत में सुधार, परिवार रवाना

बीडीए कॉलोनी निवासी पंकज उर्फ परमवीर ही भाग्यशाली रहे जो मौके पर बचा लिए गए। उनके बाकी तीनों दोस्तों का अब तक कोई पता नहीं है। कार पंकज ही चला रहे थे। पंकज का वहीं के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। घर में ताला लगाकर परिवार रवाना हो गया है। पंकज डीआरडीओ में सिविल ठेकेदार हैं। एक साल से चंडीगढ़ में ठेकेदारी कर रहे हैं। दो भाइयों में छोटे हैं। उनके दो बच्चे डेढ़ माह की बेटी और डेढ़ साल का बेटा है। पिता रिटायर्ड सिक्योरिटी गार्ड हैं।
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