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घातक रंग वाले चावल तो नहीं खा रहे हल्दी के धोखे में

Wed, 14 Mar 2018 12:22 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Wed, 14 Mar 2018 12:22 AM IST
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game of adulteration is in full swing
जिले भर में करोड़ों रुपये का कारोबार मिलावटी हल्दी और मिर्च का हो रहा है। इन दोनों मसालों में चमक लाने के लिए सिंथेटिक कलर धड़ल्ले से मिलाए जा रहे हैं। पैकिंग पर ब्रांड का भ्रामक नाम अथवा बिना ब्रांड की पैकिंग गली, मोहल्ले और गांवों तक बिक रही हैं। जहां-तहां करीब पांच सौ से ज्यादा चक्कियों पर इनकी पिसाई होते मिल जाएगी। अखाद्य रंग युक्त हल्दी, मिर्च जाने-अनजाने लाखों लोग इस्तेमाल कर धीमा जहर ले रहे हैं।
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एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन) जगह-जगह छापामार कार्रवाई हर त्योहार पर करता रहा है। हल्दी, मिर्च, धनिया के नमूने भरकर वाहवाही भी लूटता है, लेकिन आज तक किसी भी छापे में हल्दी, मिर्च में मिलाए जा रहे सिंथेटिक कलर के सबूत नहीं जुटाए हैं। इससे मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं। मुंबई में इन सिंथेटिक कलर को तैयार किया जाता है और पैकिंग कर बाजार में उतारा जाता है। इनकी बढ़ी मांग है। मिलावटखोर अपने हिसाब से बाजार से पैकिंग खरीदते हैं और उसी से हल्दी, मिर्च की पिसाई के दौरान रंग मिलाते हैं। रंग मिलाने वाले भी एक्सपर्ट होते हैं क्योंकि कितनी मात्रा में इसे मिलाना है, उसे हर कोई नहीं जानता। एक किलो हल्दी, मिर्च में पांच से 10 ग्राम पीला और नारंगी सिंथेटिक कलर मिलाया जाता है। मुंबई से सप्लाई होने वाले रंग के पैकेट पर एक ओर लिखा होता है ‘फॉर इंडस्ट्रियल यूज ओनली’ दूसरी ओर ‘नॉन इडेबल’ प्रिंट है। पैकिंग पर ऐसा कुछ भी प्रिंट नहीं है, जिससे लगे कि यह कलर किस काम में इस्तेमाल होगा।
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एक किलो हल्दी सवा सौ रुपये, मिर्च डेढ़ सौ रुपये में तैयार
चावल, अखाद्य पीला रंग और घटिया हल्दी के मिश्रण से एक किलो हल्दी पाउडर तैयार करने में बमुश्किल सवा सौ रुपये खर्च आता है, जबकि रिटेल बाजार में इसकी कीमत तीन गुनी वसूली जा रही है। यही हाल मिर्च का है। बीज और मिर्च पत्ता से पाउडर तैयार किया जाता है। पिसाई के दौरान ही अखाद्य नारंगी या पीला रंग मिलाया जाता है।
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तैयार सब्जी में भी रंग का खेल
घर-घर बनने वाली सब्जी, मटन, मुर्गा आदि तरीदार व्यंजनों में मिर्च कलर देखने लायक होता है। ज्यादातर गृहणियां लाल मिर्च का इस्तेमाल करती हैं, सब्जी में तेल के साथ यह रंग उभर कर ऊपर आ जाते है तो लगता है कुछ अच्छा आइटम बना है। देखने में बहुत अच्छा लेकिन यह जहरीला रंग आपके लिए धीमा जहर ही है। इससे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। त्वचा और शरीर के आंतरिक अंगों पर इसका धीरे-धीरे खतरनाक असर होता है। इसका आभास काफी समय बाद होता है। चिकित्सक भी कलर युक्त सब्जी या खाद्य तेल इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं। 
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