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बरेलीः दस आतंकियों को मारने वाले बरेली के बेटे को गैलेंट्री अवार्ड
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बरेली के बेटे को गैलेंट्री अवार्ड
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
मुंबई में इंडिया गेट पर दक्षिणी कमान के 20 फरवरी को हुए समारोह में सम्मानित हुए लेफ्टीनेंट कर्नल भारतेंदु रावत
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आर्मी स्कूल और बरेली कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद सैन्य अफसर बने भारतेंदु
बरेली। करीब डेढ़ साल पहले जम्मू-कश्मीर के तंगधार इलाके में एक ऑपरेशन के दौरान दस आतंकियोें को मार गिराने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल भारतेंदु रावत को उनके इस अदम्य साहस पर बृहस्पतिवार को गैलेंट्री अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। मूल रूप से बरेली के कैंट इलाके में रहने वाले भारतेंदु को यह सम्मान दक्षिणी कमान की ओर से मुंबई के इंडिया गेट पर आयोजित समारोह में दिया गया। भारतेंदु रावत फिलहाल 20वीं जाट बटालियन में कार्यरत हैं।
सेना के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले तंगधार में लेफ्टिनेंट कर्नल भारतेंदु रावत को आतंकियों के घुसपैठ करने की सूचना मिली थी जिसके बाद वह तुरंत सेना का दस्ता लेकर मौके पर पहुंचे और आतंकियों की घेराबंदी कर ली। आतंकवादियों और उनके बीच कई घंटों तक मुठभेड़ चलती रही, इसमें उन्होंने दस आतंकवादियों को मार गिराया। दोनों तरफ से इस बीच भीषण गोलाबारी हुई लेकिन लेफ्टिनेंट कर्नल भारतेंदु ने अपनी सूझबूझ से न सिर्फ खुद को बचाया बल्कि अपनी टीम में भी किसी को खरोंच तक नहीं आने दी। उनकी जांबाजी और सूझबूझ के लिए उन्हें गैलेंट्री अवार्ड यानी सेना पदक के लिए चुना गया। मुंबई के इंडिया गेट पर आयोजित समारोह में दक्षिणी कमान के जीओसी लेफ्टीनेंट जनरल सीपी मोहंती एवीएसएम, एसएम, वीएसएम ने उन्हें यह पदक दिया।
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अमर उजाला से हुई बातचीत में लेफ्टीनेंट कर्नल रावत ने बरेली की पुरानी यादों को साझा करते हुए किया। ताया कि उनके दादा, चाचा और पिता भी सेना की विभिन्न यूनिटों में कार्यरत रह चुके थे। इसलिए देश की सेवा करने जज्बा एक तरह से उनके खून में ही था। 12वीं तक की पढ़ाई बरेली के आर्मी स्कूल से पूरी करने के बाद बरेली कॉलेज बरेली से ग्रेजुएशन किया। इसी दौरान उनका चयन सैन्य सेवा में बतौर अधिकारी हो गया। उनकी पत्नी भी सैन्य शिक्षा कोर में अफसर हैं और भाई जम्मू कश्मीर में तैनात पलटन में अधिकारी के पद पर तैनात हैं।
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आर्मी स्कूल और बरेली कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद सैन्य अफसर बने भारतेंदु
बरेली। करीब डेढ़ साल पहले जम्मू-कश्मीर के तंगधार इलाके में एक ऑपरेशन के दौरान दस आतंकियोें को मार गिराने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल भारतेंदु रावत को उनके इस अदम्य साहस पर बृहस्पतिवार को गैलेंट्री अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। मूल रूप से बरेली के कैंट इलाके में रहने वाले भारतेंदु को यह सम्मान दक्षिणी कमान की ओर से मुंबई के इंडिया गेट पर आयोजित समारोह में दिया गया। भारतेंदु रावत फिलहाल 20वीं जाट बटालियन में कार्यरत हैं।
सेना के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले तंगधार में लेफ्टिनेंट कर्नल भारतेंदु रावत को आतंकियों के घुसपैठ करने की सूचना मिली थी जिसके बाद वह तुरंत सेना का दस्ता लेकर मौके पर पहुंचे और आतंकियों की घेराबंदी कर ली। आतंकवादियों और उनके बीच कई घंटों तक मुठभेड़ चलती रही, इसमें उन्होंने दस आतंकवादियों को मार गिराया। दोनों तरफ से इस बीच भीषण गोलाबारी हुई लेकिन लेफ्टिनेंट कर्नल भारतेंदु ने अपनी सूझबूझ से न सिर्फ खुद को बचाया बल्कि अपनी टीम में भी किसी को खरोंच तक नहीं आने दी। उनकी जांबाजी और सूझबूझ के लिए उन्हें गैलेंट्री अवार्ड यानी सेना पदक के लिए चुना गया। मुंबई के इंडिया गेट पर आयोजित समारोह में दक्षिणी कमान के जीओसी लेफ्टीनेंट जनरल सीपी मोहंती एवीएसएम, एसएम, वीएसएम ने उन्हें यह पदक दिया।
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अमर उजाला से हुई बातचीत में लेफ्टीनेंट कर्नल रावत ने बरेली की पुरानी यादों को साझा करते हुए किया। ताया कि उनके दादा, चाचा और पिता भी सेना की विभिन्न यूनिटों में कार्यरत रह चुके थे। इसलिए देश की सेवा करने जज्बा एक तरह से उनके खून में ही था। 12वीं तक की पढ़ाई बरेली के आर्मी स्कूल से पूरी करने के बाद बरेली कॉलेज बरेली से ग्रेजुएशन किया। इसी दौरान उनका चयन सैन्य सेवा में बतौर अधिकारी हो गया। उनकी पत्नी भी सैन्य शिक्षा कोर में अफसर हैं और भाई जम्मू कश्मीर में तैनात पलटन में अधिकारी के पद पर तैनात हैं।