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Bareilly News: फंगल की प्रतिरोधक क्षमता हुई मजबूत, रुविवि खोज रहा असरकारक एंटी फंगल

Wed, 03 Jan 2024 12:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jan 2024 12:51 AM IST
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Fungal immunity strengthened, RUV is searching for effective anti fungal
बरेली। त्वचा पर होने वाले संक्रमणों में सबसे आम है डर्माटोफाइट्स संक्रमण। इस रोग को दाद भी कहा जाता है। यह कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को प्रभावित करता है। लोगों को इस समस्या से आसानी से निदान मिल सके, इसके लिए रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शोध किया जा रहा है। संक्रमितों के सैंपल लेकर उन पर असरकारक एंटी फंगल के माध्यम से परीक्षण किया जा रहा है। अब तक संक्रमण का पुरुषों में 83.8 प्रतिशत और महिलाओं में 16.1 प्रतिशत और जानवरों में 11.1 प्रतिशत का उच्च प्रसार देखा गया है। यह परिणाम 152 क्लीनिकल सैंपल पर आधारित है।
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विवि के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय पटेल, शोधार्थी मनीष कुमार व अन्य छात्रों ने रुहेलखंड क्षेत्र के 93 व्यक्तियों व 59 पशुओं के क्लीनिकल सैंपल लिए हैं। संक्रमितों में 61.2 प्रतिशत की आयु 20 से 40 वर्ष के बीच है। डॉ. संजय ने बताया कि शोध में कवक (फंगस) से होने वाली बीमारियों के निदान पर अध्ययन किया जा रहा है। अब तक डर्माटोफाइट्स पर फ्लूकोनाजोल (एंटी फंगल) का परीक्षण किया जा चुका है। फ्लूकोनाजोल का फंगल की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण प्रभाव नहीं दिख रहा है। ऐसे में अन्य एंटी फंगल और पौधे का अर्क (प्लांट एक्स्ट्रैक्ट) का भी फंगल पर परीक्षण किया जा रहा है। मानव और पशु दोनों में यह संक्रमण समान होता है। इसलिए दोनों को इसमें शामिल किया गया है। डर्माटोफाइट्स की पहचान प्रत्यक्ष सूक्ष्म परीक्षण और कल्चर मीडिया पर संवर्धन से की गई है। अब तक शोध में सामने आया है कि डर्माटोफाइट्स त्वचा रोग रुहेलखंड क्षेत्र के आसपास की शहरी व ग्रामीण आबादी में अधिक है।
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डर्माटोफाइट्स कवक (फंगस) है जो त्वचा, बालों और नाखूनों को संक्रमित करता है। इसमें ट्राइकोफाइटन, माइक्रोस्पोरम और एपिडर्मोफाइटन जेनेरा के सदस्य शामिल हैं। त्वचा के डर्माफाइट्स संक्रमण को दाद कहा जाता है। यह संपर्क के माध्यम से एक से दूसरे व्यक्ति में संचारित होता है। डर्माटोफाइट्स कवक केराटिन से जीवित रहता है, जो बालों, नाखूनों और त्वचा की बाहरी परत मौजूद होता है। फंगल संक्रमण शॉवर और लॉकर जैसे नम स्थानों से, त्वचा में चोट के कारण, वातावरण (मिट्टी या धूल) से सांस लेने पर या संक्रमित से सीधे संपर्क में आने से हो सकता है।
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