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Bareilly News: पासपोर्ट से लेकर वसीयत तक हुआ फर्जी वेबसाइट के जाली प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल
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बरेली। भमोरा थाने के देवचरा में फर्जी वेबसाइट के जरिये जारी किए गए जाली मृत्यु और जन्म प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल पासपोर्ट से लेकर वसीयतनामा तक किया गया है। तीन साल से चल रहे इस धंधे में अंतरराज्यीय स्तर पर कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं। मंगलवार को एसटीएफ अयोध्या और बरेली यूनिट ने देवचरा में एक इंटरनेट कैफे पर छापा मारकर दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया था।
फर्जी वेबसाइट, पोर्टल और सॉफ्टवेयर के जरिये जाली जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह को एसटीएफ की अयोध्या यूनिट ने ट्रेस किया था। इस गिरोह तक पहुंचने के लिए छह माह से काम चल रहा था। विभिन्न इलेक्ट्रिक और सर्विलांस माध्यमों के जरिये मंगलवार को गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।
जांच में सामने आया है कि बरेली में चल रहे इस रैकेट के तार प्रदेश के कई और जिलों में जुड़े हुए हैं। तीन साल में एक ही फर्जी वेबसाइट से जाली प्रमाणपत्र बनाकर 28.10 लाख रुपये की कमाई किए जाने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। एक अधिकारी ने बताया कि फर्जी प्रमाणपत्रों की संख्या हजारों में हो सकती है।
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प्रारंभिक जांच में जाली प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल पासपोर्ट बनवाने तक में होने की बात सामने आई है। मामले में जांच कर रहे एक अधिकारी ने बताया कि फर्जी वेबसाइट और पोर्टल की संख्या एक से ज्यादा हो सकती है। साइबर और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की भी जांच में मदद ली जाएगी। संवाद
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इस तरह करें फर्जी पोर्टल, वेबसाइट की पहचान
एसटीएफ के डिप्टी एसपी अब्दुल कादिर ने बताया कि अधिकृत सरकारी पोर्टल या वेबसाइट पर अगर किसी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जाता है तो आवेदक को कई दस्तावेज भी देने होते हैं। आवेदक के मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता है। ओटीपी भरने के बाद सत्यापन होता है। फर्जी वेबसाइट के मामले में ऐसा नहीं होता। लोगों को आवेदन के दौरान सतर्कता बरतने की जरूरत है। ठगी करने वाले मिलते-जुलते नामों से तमाम पोर्टल और वेबसाइट बनवा लेते हैं।
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सभी पहलुओं पर की जा रही बारीकी से जांच, सगे भाई जेल भेजे
इंस्पेक्टर भमोरा आरके शर्मा ने बताया कि सभी पहलुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है। इस बात में दो राय नहीं की रैकेट का जाल काफी बड़ा है। आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। इस संबंध में अभी ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। जांच में जैसे-जैसे तथ्य सामने आएंगे आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक्सपर्ट की मदद भी ली जाएगी।
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फर्जी वेबसाइट, पोर्टल और सॉफ्टवेयर के जरिये जाली जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह को एसटीएफ की अयोध्या यूनिट ने ट्रेस किया था। इस गिरोह तक पहुंचने के लिए छह माह से काम चल रहा था। विभिन्न इलेक्ट्रिक और सर्विलांस माध्यमों के जरिये मंगलवार को गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।
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जांच में सामने आया है कि बरेली में चल रहे इस रैकेट के तार प्रदेश के कई और जिलों में जुड़े हुए हैं। तीन साल में एक ही फर्जी वेबसाइट से जाली प्रमाणपत्र बनाकर 28.10 लाख रुपये की कमाई किए जाने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। एक अधिकारी ने बताया कि फर्जी प्रमाणपत्रों की संख्या हजारों में हो सकती है।
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प्रारंभिक जांच में जाली प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल पासपोर्ट बनवाने तक में होने की बात सामने आई है। मामले में जांच कर रहे एक अधिकारी ने बताया कि फर्जी वेबसाइट और पोर्टल की संख्या एक से ज्यादा हो सकती है। साइबर और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की भी जांच में मदद ली जाएगी। संवाद
इस तरह करें फर्जी पोर्टल, वेबसाइट की पहचान
एसटीएफ के डिप्टी एसपी अब्दुल कादिर ने बताया कि अधिकृत सरकारी पोर्टल या वेबसाइट पर अगर किसी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जाता है तो आवेदक को कई दस्तावेज भी देने होते हैं। आवेदक के मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता है। ओटीपी भरने के बाद सत्यापन होता है। फर्जी वेबसाइट के मामले में ऐसा नहीं होता। लोगों को आवेदन के दौरान सतर्कता बरतने की जरूरत है। ठगी करने वाले मिलते-जुलते नामों से तमाम पोर्टल और वेबसाइट बनवा लेते हैं।
सभी पहलुओं पर की जा रही बारीकी से जांच, सगे भाई जेल भेजे
इंस्पेक्टर भमोरा आरके शर्मा ने बताया कि सभी पहलुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है। इस बात में दो राय नहीं की रैकेट का जाल काफी बड़ा है। आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। इस संबंध में अभी ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। जांच में जैसे-जैसे तथ्य सामने आएंगे आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक्सपर्ट की मदद भी ली जाएगी।