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Bareilly News: पशुओं की उभरती बीमारियों से मुक्ति और पशुधन संकट की चुनौती बरकरार

Thu, 26 Jun 2025 02:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 26 Jun 2025 02:05 AM IST
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Freedom from emerging animal diseases and the challenge of livestock crisis remains
बरेली। 35 वर्ष बाद भी बढ़ती जनसंख्या के सापेक्ष पशुधन और पशुओं को पौष्टिक चारा उत्पादन की चुनौती बरकरार है। वैज्ञानिकों को नवाचार और किसान हित में शोध का आह्वान भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने किया था।
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आईवीआरआई इज्जतनगर का शताब्दी दीक्षांत समारोह 10 दिसंबर 1990 को आयोजित हुआ था। इसमें तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने तीन वैज्ञानिकों को मानद उपाधि समेत 21 अन्य को सम्मानित किया था। वैज्ञानिकों द्वारा पशु प्लेग निरोधी टीका, रानीखेत रोग नियंत्रण और अन्य रोगों पर चल रहे शोध को अहम बताया था। उन्होंने पशु विज्ञान को पशु चिकित्सा, रोग नियंत्रण, मवेशी पोषण पर ही केंद्रित करने के बजाय पशु विकास परियोजना में सुधार की उम्मीद जताई थी।
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बढ़ती पशु संख्या के सापेक्ष कम चारा उत्पादन को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों से किसानों को फसल चक्र में पशु चारा उत्पादन को प्रेरित करने का सुझाव दिया था। इसके लिए संस्थान में विकसित जीव प्रौद्योगिकी को किसानों तक पहुंचाने के लिए सूचना तंत्र के इस्तेमाल की बात कही थी।
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उन्नत नस्ल के साथ उभरती बीमारियों से दिलाएं निजात
समारोह में शामिल रहे तत्कालीन उप प्रधानमंत्री देवीदयाल ने कहा था कि पशुपालन गांव के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार का विकल्प हो सकता है। लेकिन पशुओं की उन्नत नस्ल के विकास के साथ उभरती बीमारियों से बचाना जरूरी है। आनुवंशिक इंजीनियरिंग और प्रभावी टीकों के विकास समेत भविष्य की चुनौती के सापेक्ष सुधार को कहा था।

फसलों में कीटनाशकों के प्रयोग पर भी जताई थी चिंता
फसल उत्पादन में उर्वरक, कीटनाशकाें के प्रयोग के नुकसान से लोग वाकिफ हैं, 35 साल पहले ही राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने चिंता जाहिर की थी। कहा था कि इसके अनियंत्रित प्रयोग से पशु, मनुष्य में भी स्वास्थ्य के खतरे बढ़े हैं। आईवीआरआई और दूसरे कृषि शोध में जुटे संस्थानों से इस समस्या से निदान की उम्मीद जताई थी, पर स्थिति किसानों को जागरूक करने तक सीमित है।


समस्या समाधान, नवाचार के लिए बाहर निकलें वैज्ञानिक
राष्ट्रपति ने कहा था कि शोध कार्य की वजह से वैज्ञानिक लैब से बाहर नहीं निकल पाते। जिससे शोध कार्यों में नवाचार के अभाव से प्रासंगिकता नहीं होती। वैज्ञानिकों को किसानों और पशुपालकों से सीधा संवाद कर समस्याएं दर्ज कर निदान के लिए तकनीकी, प्राैद्योगिकी, वैक्सीन आदि के विकास का सुझाव दिया था। 35 साल बाद किसान लैब से बाहर निकले और समस्याएं दर्ज की हैं। ब्यूरो
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