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ब्लैक लिस्टेड कंपनी ने भेज दीं एंटीबायोटिक टैबलेट
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कंपनी ने तीन लाख 70 हजार सिप्रोफ्लोक्सासिन और एमोक्सीसिलिन की दी है सप्लाई
बरेली। यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन में प्राइवेट कंपनियों की तगड़ी सांठगांठ है। लगातार अधोमानक दवाओं की सप्लाई कंपनियों की ओर से की गई। 2019 में सात दवाइयों के सैंपल फे ल हुए, लेकिन अब भी ब्लैक लिस्टेड कंपनियां जिला अस्पताल को एंटीबायोटिक दवाइयों की सप्लाई कर रही हैं। इसी सप्ताह एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी ने जिला अस्पताल को सिप्रोफ्लोक्सासिन और एमोक्सीसिलिन की 70 हजार गोलियां भेज दीं।
दवा कंपनी ओमेगा को यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन ने तीन साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया था। कारण 2018 व 2019 में इस कंपनी की कई दवाइयाें के सैंपल बरेली व प्रदेश के अन्य जनपदों में फेल हो गए थे। अब वही कंपनी स्वास्थ्य महकमे को एंटीबायोटिक दवाआें की सप्लाई कर रही है। हाल ही में कंपनी ने जिले में सिप्रोफ्लोक्सासिन की दो लाख पचास हजार और एमोक्सीसिलिन की एक लाख 20 हजार टैबलेट की सप्लाई की है। हालांकि अभी इन दवाइयों का वितरण शुरू नहीं हुआ है। यहां बता दें कि दोनों ही दवाइयां एंटीबायोटिक हैं।
कॉरपोरेशन ने ऐसे किया कंपनी का बचाव
सूत्रों के मुताबिक, ओमेगा ने जब इस दवा की सप्लाई शुरू की तो अलग-अलग जनपदों से इस पर आपत्ति जताकर ब्लैक लिस्ट करने वाला कॉरपोरेशन का पत्र कॉरपोरेशन को ही भेज दिया। इस पर कॉरपोरेशन ने जवाब लिखा कि संबंधित कंपनी को सिर्फ उन दवाओं की सप्लाई देने के लिए ब्लैक लिस्ट किया गया है, जिन दवाआें के सैंपल फेल हुए थे। हालांकि जानकारों का कहना है कि यह तरीका नहीं है, जिस कंपनी को ब्लैक लिस्ट जितने साल के लिए किया जाता है वह उतने समय तक किसी भी दवा की सप्लाई नहीं कर सकती है। सीएमएस डॉ. टीएस आर्या ने बताया कि अभी उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर दवा के साथ कॉरपोरेशन का प्रमाण पत्र आया होगा तो ही दवा का वितरण कराया जाएगा।
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बिना डिमांड भेजीं हृदयरोग की दवाएं लौटाईं
बरेली। स्वास्थ्य विभाग में कई जरूरी दवाआें की सप्लाई यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन अभी भी नहीं कर पा रहा है, लेकिन बिना डिमांड की दवाओं को भेजने में कॉरपोरेशन की दिलचस्पी अधिक रहती है। हाल में कई जरूरी दवाओं को न भेजकर कॉरपोरेशन बिना डिमांड की दवाआें की सप्लाई करता रहा है। अब कॉरपोरेशन ने बीपी कम करने और हार्ट संबंधी रोगों में प्रयोग की जाने वाली स्पायरेलेक्टोन की आठ हजार टैबलेट की सप्लाई कर दी। हालांकि इसे वापस भेज दिया गया है।
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बरेली। यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन में प्राइवेट कंपनियों की तगड़ी सांठगांठ है। लगातार अधोमानक दवाओं की सप्लाई कंपनियों की ओर से की गई। 2019 में सात दवाइयों के सैंपल फे ल हुए, लेकिन अब भी ब्लैक लिस्टेड कंपनियां जिला अस्पताल को एंटीबायोटिक दवाइयों की सप्लाई कर रही हैं। इसी सप्ताह एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी ने जिला अस्पताल को सिप्रोफ्लोक्सासिन और एमोक्सीसिलिन की 70 हजार गोलियां भेज दीं।
दवा कंपनी ओमेगा को यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन ने तीन साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया था। कारण 2018 व 2019 में इस कंपनी की कई दवाइयाें के सैंपल बरेली व प्रदेश के अन्य जनपदों में फेल हो गए थे। अब वही कंपनी स्वास्थ्य महकमे को एंटीबायोटिक दवाआें की सप्लाई कर रही है। हाल ही में कंपनी ने जिले में सिप्रोफ्लोक्सासिन की दो लाख पचास हजार और एमोक्सीसिलिन की एक लाख 20 हजार टैबलेट की सप्लाई की है। हालांकि अभी इन दवाइयों का वितरण शुरू नहीं हुआ है। यहां बता दें कि दोनों ही दवाइयां एंटीबायोटिक हैं।
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कॉरपोरेशन ने ऐसे किया कंपनी का बचाव
सूत्रों के मुताबिक, ओमेगा ने जब इस दवा की सप्लाई शुरू की तो अलग-अलग जनपदों से इस पर आपत्ति जताकर ब्लैक लिस्ट करने वाला कॉरपोरेशन का पत्र कॉरपोरेशन को ही भेज दिया। इस पर कॉरपोरेशन ने जवाब लिखा कि संबंधित कंपनी को सिर्फ उन दवाओं की सप्लाई देने के लिए ब्लैक लिस्ट किया गया है, जिन दवाआें के सैंपल फेल हुए थे। हालांकि जानकारों का कहना है कि यह तरीका नहीं है, जिस कंपनी को ब्लैक लिस्ट जितने साल के लिए किया जाता है वह उतने समय तक किसी भी दवा की सप्लाई नहीं कर सकती है। सीएमएस डॉ. टीएस आर्या ने बताया कि अभी उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। अगर दवा के साथ कॉरपोरेशन का प्रमाण पत्र आया होगा तो ही दवा का वितरण कराया जाएगा।
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बिना डिमांड भेजीं हृदयरोग की दवाएं लौटाईं
बरेली। स्वास्थ्य विभाग में कई जरूरी दवाआें की सप्लाई यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन अभी भी नहीं कर पा रहा है, लेकिन बिना डिमांड की दवाओं को भेजने में कॉरपोरेशन की दिलचस्पी अधिक रहती है। हाल में कई जरूरी दवाओं को न भेजकर कॉरपोरेशन बिना डिमांड की दवाआें की सप्लाई करता रहा है। अब कॉरपोरेशन ने बीपी कम करने और हार्ट संबंधी रोगों में प्रयोग की जाने वाली स्पायरेलेक्टोन की आठ हजार टैबलेट की सप्लाई कर दी। हालांकि इसे वापस भेज दिया गया है।