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बाकी तो छोड़ें, खनन माफिया ने कान्हा गोशाला की भी जमीन खोद डाली
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बरेली। सरकारी जमीनों पर कब्जों और खुर्दबुर्द किए जाने की एक के बाद एक मिसालें सामने आ रही हैं। शीशगढ़ में ग्राम समाज के खलिहान के तौर पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करीब पांच बीघा जमीन के काफी हिस्से को खनन माफिया ने खोदकर तालाब में तब्दील कर दिया और बाकी जमीन पर अवैध कब्जे हो गए। नगर पंचायत ने अब तक तो इस जमीन से न कब्जे हटाए न खनन रोकने की कोशिश की, लेकिन अब शासन के निर्देश पर इस जमीन को कान्हा गोशाला बनाने के लिए चिह्नित किए जाने के बाद डीएम को रिपोर्ट भेजकर हालात की जानकारी दी है। साथ ही इस जमीन का लैंड यूज बदलवाने का भी आग्रह किया है।
शासन की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में तमाम जगह कान्हा गोशाला का निर्माण किया जाना है। शीशगढ़ में भी इसके लिए नगर पंचायत की गाटा नंबर 1366 पर स्थित 0.3000 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित किया गया है जिस पर 1.65 करोड़ की लागत से कान्हा गोशाला एवं पशु शेल्टर होम का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। जमीन चिह्नित करने के बाद नगर पंचायत के अफसर मुश्किल में पड़ गए हैं। दरअसल यह जमीन राजस्व अभिलेखों में खलिहान के तौर पर दर्ज है। हालांकि करीब 25 सालों से इसका कोई इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इस बीच पहले तो इस जमीन पर अवैध कब्जे होने शुरू हुए, फिर खनन माफिया ने भी कब्जों से बची जमीन को खोदना शुरू कर दिया। अब हालत यह है कि कहीं इस जमीन पर अवैध कब्जा है तो कहीं लगातार खुदाई से जमीन तालाब में तब्दील हो गई है। बताया जाता है कि जमीन पर अब तक खनन हो रहा है।
अब नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी की ओर डीएम को भेजे पत्र में जमीन की हालत की जानकारी दी गई है। इस पत्र में कहा गया है कि कान्हा गोशाला के लिए नगर पंचायत के पास इसके अलावा कोई जमीन उपलब्ध नहीं है लिहाजा निर्माण शुरू कराने से पहले जमीन से अवैध कब्जे हटाकर उसे समतल भी कराना होगा। इसके साथ जमीन का लैंड यूज परिवर्तित कराने के लिए भी शासन को पत्र भेजा गया है।
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शासन की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में तमाम जगह कान्हा गोशाला का निर्माण किया जाना है। शीशगढ़ में भी इसके लिए नगर पंचायत की गाटा नंबर 1366 पर स्थित 0.3000 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित किया गया है जिस पर 1.65 करोड़ की लागत से कान्हा गोशाला एवं पशु शेल्टर होम का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। जमीन चिह्नित करने के बाद नगर पंचायत के अफसर मुश्किल में पड़ गए हैं। दरअसल यह जमीन राजस्व अभिलेखों में खलिहान के तौर पर दर्ज है। हालांकि करीब 25 सालों से इसका कोई इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इस बीच पहले तो इस जमीन पर अवैध कब्जे होने शुरू हुए, फिर खनन माफिया ने भी कब्जों से बची जमीन को खोदना शुरू कर दिया। अब हालत यह है कि कहीं इस जमीन पर अवैध कब्जा है तो कहीं लगातार खुदाई से जमीन तालाब में तब्दील हो गई है। बताया जाता है कि जमीन पर अब तक खनन हो रहा है।
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अब नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी की ओर डीएम को भेजे पत्र में जमीन की हालत की जानकारी दी गई है। इस पत्र में कहा गया है कि कान्हा गोशाला के लिए नगर पंचायत के पास इसके अलावा कोई जमीन उपलब्ध नहीं है लिहाजा निर्माण शुरू कराने से पहले जमीन से अवैध कब्जे हटाकर उसे समतल भी कराना होगा। इसके साथ जमीन का लैंड यूज परिवर्तित कराने के लिए भी शासन को पत्र भेजा गया है।
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