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शौचालय निर्माण घपले की जांच से ईओडब्ल्यू का इंकार
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बरेली। शौचालय निर्माण में लाखों के घपले की शिकायत की जांच से आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने इंकार कर दिया है। इस प्रकरण की शिकायत एक भाजपा नेता ने प्रशासन से की थी। प्रशासन ने इसे सीधे ईओडब्ल्यू के पास भेजा दिया है। जबकि ईओडब्ल्यू के एसपी ने डीएम को यह तर्क देते हुए जांच करने से मना कर दिया है कि संगठन केवल शासन की सिफारिश पर जांच करता है।
एक भाजपा नेता ने नवाबगंज नगर पालिका क्षेत्र में शौचालयों के निर्माण में घोटाले की शिकायत की थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि नवाबगंज में चेयरमैन शहला ताहिर नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। पिछले साल नगर पालिका प्रशासन की तरफ से स्वच्छ भारत मिशन के राज्य मिशन निदेशक को पत्र भेजा गया था। इसमें सभी 25 वार्डों को ओडीएफ बताते हुए रिपोर्ट भेजी गई थी। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि जबकि महज 40 फीसदी लाभार्थियों को ही शौचालय निर्माण की पहली किस्त ही जारी हुई थी। बड़ी संख्या में शौचालयों के निर्माण कागजों पर ही पूरा कर दिए गए। प्रशासन ने इस प्रकरण की जांच ईओडब्ल्यू से कराने के लिए लेटर भेजा था लेकिन ईओडब्ल्यू के एसपी ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को यह कहकर जांच करने से इंकार कर दिया है कि ईओडब्ल्यू शासन स्तर से प्राप्त होने वाली शिकायतों की जांच करता है।
सहकारी संघ में गेहूं घोटाले की जांच भी पुलिस को सौंपकर की गई थी गलती
सहकारी संघ आंवला के अध्यक्ष ओमपाल सिंह ने गेहूं खरीद में गड़बड़ी कर 20 लाख के गबन की शिकायत की थी। डीएम स्तर से इस मामले की पुलिस से जांच कराने के लिए एसएसपी को लिखा गया तो पूरा प्रकरण जहां का तहां ठहर गया। एसएसपी ने यह कहते हुए डीएम को चिट्ठी वापस कर दी कि इसमें पुलिस के स्तर से जांच करने का कोई मामला नहीं बनता है। इसलिए इसकी जांच टेक्निकल ऑडिट कमेटी से कराई जाए।
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एक भाजपा नेता ने नवाबगंज नगर पालिका क्षेत्र में शौचालयों के निर्माण में घोटाले की शिकायत की थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि नवाबगंज में चेयरमैन शहला ताहिर नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। पिछले साल नगर पालिका प्रशासन की तरफ से स्वच्छ भारत मिशन के राज्य मिशन निदेशक को पत्र भेजा गया था। इसमें सभी 25 वार्डों को ओडीएफ बताते हुए रिपोर्ट भेजी गई थी। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि जबकि महज 40 फीसदी लाभार्थियों को ही शौचालय निर्माण की पहली किस्त ही जारी हुई थी। बड़ी संख्या में शौचालयों के निर्माण कागजों पर ही पूरा कर दिए गए। प्रशासन ने इस प्रकरण की जांच ईओडब्ल्यू से कराने के लिए लेटर भेजा था लेकिन ईओडब्ल्यू के एसपी ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को यह कहकर जांच करने से इंकार कर दिया है कि ईओडब्ल्यू शासन स्तर से प्राप्त होने वाली शिकायतों की जांच करता है।
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सहकारी संघ में गेहूं घोटाले की जांच भी पुलिस को सौंपकर की गई थी गलती
सहकारी संघ आंवला के अध्यक्ष ओमपाल सिंह ने गेहूं खरीद में गड़बड़ी कर 20 लाख के गबन की शिकायत की थी। डीएम स्तर से इस मामले की पुलिस से जांच कराने के लिए एसएसपी को लिखा गया तो पूरा प्रकरण जहां का तहां ठहर गया। एसएसपी ने यह कहते हुए डीएम को चिट्ठी वापस कर दी कि इसमें पुलिस के स्तर से जांच करने का कोई मामला नहीं बनता है। इसलिए इसकी जांच टेक्निकल ऑडिट कमेटी से कराई जाए।
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