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Bareilly News: वकालत से डिबार पूर्व अध्यक्ष बोले- बार काउंसिल की कार्रवाई एकतरफा
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कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा - नहीं सुना गया मेरा पक्ष, आदेश को देंगे चुनौती
बरेली। बरेली बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव ने यूपी बार काउंसिल के उस आदेश को गैर कानूनी बताया है, जिसमें उनको वकालत से डिबार किया गया है। वह आदेश को चुनौती देंगे। उनका कहना है कि कार्रवाई एकतरफा है। कुछ लोग चाहते हैं कि वह बार का चुनाव न लड़ें। डिबार करने से पहले उनका पक्ष भी नहीं सुना गया।
पिछले साल हापुड़ में आंदोलन के दौरान वकीलों और पुलिस में झड़प हुई थी। अरविंद श्रीवास्तव उस समय बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष थे। वह आंदोलन में शामिल होने के लिए साथियों सहित दो बसों से हापुड़ गए थे। हापुड़ आंदोलन में यूपी बार काउंसिल से कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी। यह भी कहा था कि अब अगर वह वोट मांगने आएं तो उनको सबक सिखाना। इसके बाद बार काउंसिल ने अरविंद श्रीवास्तव को नोटिस भेजा था। अब उनको वकालत से डिबार कर दिया गया है।
अरविंद श्रीवास्तव का कहना है कि नोटिस का उन्होंने रजिस्टर्ड डाक से जवाब भेजा था। यह भी कहा था कि मुझ पर जो भी आरोप हैं, वह मुझे बताए जाएं। 30 दिन का समय भी मांगा था। इसके बाद अपने जूनियर को वकालतनामा के साथ लखनऊ भेजा। मुझे आरोपों के बारे में कुछ बताया ही नहीं गया। सीजेएम बार काउंसिल के अधीन नहीं हैं तो बार काउंसिल सीजेएम के जरिये मुझे कोई नोटिस कैसे भेज सकता है?
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बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार हरित का कहना है कि वर्तमान में बार का पूरा फोकस कासगंज में महिला अधिवक्ता की हत्या के मामले पर है। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूर्व अध्यक्ष को डिबार किए जाने के मामले को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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बरेली। बरेली बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव ने यूपी बार काउंसिल के उस आदेश को गैर कानूनी बताया है, जिसमें उनको वकालत से डिबार किया गया है। वह आदेश को चुनौती देंगे। उनका कहना है कि कार्रवाई एकतरफा है। कुछ लोग चाहते हैं कि वह बार का चुनाव न लड़ें। डिबार करने से पहले उनका पक्ष भी नहीं सुना गया।
पिछले साल हापुड़ में आंदोलन के दौरान वकीलों और पुलिस में झड़प हुई थी। अरविंद श्रीवास्तव उस समय बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष थे। वह आंदोलन में शामिल होने के लिए साथियों सहित दो बसों से हापुड़ गए थे। हापुड़ आंदोलन में यूपी बार काउंसिल से कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी। यह भी कहा था कि अब अगर वह वोट मांगने आएं तो उनको सबक सिखाना। इसके बाद बार काउंसिल ने अरविंद श्रीवास्तव को नोटिस भेजा था। अब उनको वकालत से डिबार कर दिया गया है।
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अरविंद श्रीवास्तव का कहना है कि नोटिस का उन्होंने रजिस्टर्ड डाक से जवाब भेजा था। यह भी कहा था कि मुझ पर जो भी आरोप हैं, वह मुझे बताए जाएं। 30 दिन का समय भी मांगा था। इसके बाद अपने जूनियर को वकालतनामा के साथ लखनऊ भेजा। मुझे आरोपों के बारे में कुछ बताया ही नहीं गया। सीजेएम बार काउंसिल के अधीन नहीं हैं तो बार काउंसिल सीजेएम के जरिये मुझे कोई नोटिस कैसे भेज सकता है?
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बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार हरित का कहना है कि वर्तमान में बार का पूरा फोकस कासगंज में महिला अधिवक्ता की हत्या के मामले पर है। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूर्व अध्यक्ष को डिबार किए जाने के मामले को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी। संवाद