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कोविड के बुरे दौर को भूले... अब क्लास में रोते नहीं मुस्कराते हैं बच्चे
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बरेली। चार अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। दूसरे दिन यानी मंगलवार को स्कूल पहुंचे बच्चों का व्यवहार सामान्य रहा। बच्चे कोविड के बुरे दौर को भूलकर अब क्लास में रोेते नहीं बल्कि मुस्कराते नजर आते हैं। पहले की तरह स्कूलों में सामान्य तरीके से बच्चों की पढ़ाई चल रही है। शिक्षक भी अतिरिक्त समय देकर बच्चों को सामान्य करने के सभी प्रयास कर रहे हैं।
कोविड के दो साल में ऐसा कई बार हुआ कि कुछ दिनों के लिए स्कूल खुले और फिर बंद हो गए। जब भी स्कूल खुले तो कोविड से बचाव और सुरक्षा के लिए कई नियम लागू कर पाबंदियां लगाई गईं। अब पूरी तरह से विद्यालयों को खोल दिया गया है। पहले जहां खेल के मैदान में बच्चों के जाने की मनाही थी, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है। बच्चे पढ़ाई के समय क्लास में रहते हैं तो खेल के समय मैदान में दिखाई देते हैं। शिक्षकों के मुताबिक बच्चों में काफी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं। वे बिना किसी तनाव के पढ़ाई कर रहे हैं। क्लास में शिक्षकों से सवाल भी करते हैं। यह सबसे अच्छी बात है। ऐसा करने के लिए पिछले दिनों शिक्षकों को मशक्कत करनी पड़ी थी, जबकि इस बार बच्चे सहज हैं।
लिखावट सुधारने को शुरू हुईं अतिरिक्त कक्षाएं
कई विद्यालयों ने नए सत्र में बच्चों की लिखावट में सुधार के लिए बीस से तीस मिनट की अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन शुरू किया है। स्कूल के बाद बच्चों को रोककर सिर्फ लिखने का काम दिया जा रहा है। कुछ विद्यालयों ने शुरू की दो क्लास के बाद ही एक क्लास लिखावट के लिए रखी है। बाकी कक्षाओं में पांच-पांच मिनट की कटौती कर लिखावट सुधारने के लिए अलग क्लास बना दी है। शिक्षकों का कहना है कि अभी शुरू के एक महीने में इसके परिणाम देखे जाएंगे, फिर क्लास बढ़ाने पर विचार होगा।
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ये बदलाव दिख रहे
- दोस्तों से अच्छे से घुलमिल रहे बच्चे।
- क्लास में लगभग सभी बच्चे शिक्षकों से सवाल कर रहे हैं।
- खेल के मैदान में भी बच्चे सहज दिखाई दे रहे हैं।
- स्कूल से दिया गया होमवर्क समय पर कर रहे हैं।
- स्कूल की सभी एक्टिविटी में उत्साह से ले रहे हैं हिस्सा।
- बच्चों में अब नहीं दिखाई दे रहा है चिड़चिड़ापन।
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कोविड के दो साल में ऐसा कई बार हुआ कि कुछ दिनों के लिए स्कूल खुले और फिर बंद हो गए। जब भी स्कूल खुले तो कोविड से बचाव और सुरक्षा के लिए कई नियम लागू कर पाबंदियां लगाई गईं। अब पूरी तरह से विद्यालयों को खोल दिया गया है। पहले जहां खेल के मैदान में बच्चों के जाने की मनाही थी, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है। बच्चे पढ़ाई के समय क्लास में रहते हैं तो खेल के समय मैदान में दिखाई देते हैं। शिक्षकों के मुताबिक बच्चों में काफी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं। वे बिना किसी तनाव के पढ़ाई कर रहे हैं। क्लास में शिक्षकों से सवाल भी करते हैं। यह सबसे अच्छी बात है। ऐसा करने के लिए पिछले दिनों शिक्षकों को मशक्कत करनी पड़ी थी, जबकि इस बार बच्चे सहज हैं।
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लिखावट सुधारने को शुरू हुईं अतिरिक्त कक्षाएं
कई विद्यालयों ने नए सत्र में बच्चों की लिखावट में सुधार के लिए बीस से तीस मिनट की अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन शुरू किया है। स्कूल के बाद बच्चों को रोककर सिर्फ लिखने का काम दिया जा रहा है। कुछ विद्यालयों ने शुरू की दो क्लास के बाद ही एक क्लास लिखावट के लिए रखी है। बाकी कक्षाओं में पांच-पांच मिनट की कटौती कर लिखावट सुधारने के लिए अलग क्लास बना दी है। शिक्षकों का कहना है कि अभी शुरू के एक महीने में इसके परिणाम देखे जाएंगे, फिर क्लास बढ़ाने पर विचार होगा।
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ये बदलाव दिख रहे
- दोस्तों से अच्छे से घुलमिल रहे बच्चे।
- क्लास में लगभग सभी बच्चे शिक्षकों से सवाल कर रहे हैं।
- खेल के मैदान में भी बच्चे सहज दिखाई दे रहे हैं।
- स्कूल से दिया गया होमवर्क समय पर कर रहे हैं।
- स्कूल की सभी एक्टिविटी में उत्साह से ले रहे हैं हिस्सा।
- बच्चों में अब नहीं दिखाई दे रहा है चिड़चिड़ापन।