{"_id":"5d4c7c868ebc3e6cfa3c044f","slug":"food-poisoning-bareilly-news-bly3717097157","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेहत से खिलवाड़- बाजार में नकली खाद्य तेल, लैब से आई रिपोर्ट अफसरों ने दबाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेहत से खिलवाड़- बाजार में नकली खाद्य तेल, लैब से आई रिपोर्ट अफसरों ने दबाई
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बरेली। एफएसडीए की जिम्मेदारी वैसे तो सेहत के लिए असुरक्षित और घटिया खाद्य पदार्थों को पब्लिक तक पहुंचने से रोकने की है लेकिन हाल ही में एफएसडीए अफसरों की सांठगांठ से बड़े पैमाने पर नकली रिफाइंड ऑयल मार्केट में खपा दिए जाने का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन के अफसर भी सकते में आ गए हैं। ब्रह्मपुरा की लालचंद एग्रो ऑयल कंपनी से फरवरी में लिए गए तेल के नमूने दो लैब में हुए परीक्षण में नकली और असुरक्षित साबित होने के बावजूद एफएसडीए के अफसर ढाई महीने से यह रिपोर्ट दबाए बैठे हैं। न ऑयल कंपनी का स्टॉक सीज किया गया न ही उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया। इस बीच इस ऑयल कंपनी ने अपना हजारों लीटर रिफाइंड ऑयल मार्केट में खपा दिया।
लालचंद एग्रो ऑयल कंपनी पर एफएसडीए के जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा के नेतृत्व में फरवरी में होली से ऐन पहले छापा मारकर रिफाइंड ऑयल के नमूने भरे गए थे। इन नमूनों को परीक्षण के लिए लखनऊ की लैब को भेजा गया जिसने अपनी रिपोर्ट में इस तेल को घटिया और असुरक्षित करार दिया। लखनऊ लैब की यह रिपोर्ट यहां एफएसडीए के पास पहुंचने के बाद भी ऑयल कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक लैप की यह रिपोर्ट अनाधिकारिक तौर पर ऑयल कंपनी के मालिक को उपलब्ध करा दी गई और उससे नमूनों की दोबारा जांच के लिए लिखापढ़ी कराकर रिफाइंड ऑयल के नमूनों को दोबारा जांच के लिए कोलकाता की रेफरल फूड लैब भेज दिया गया। कोलकाता लैब के निदेशक की ओर से भी इन नमूनों की रिपोर्ट 20 मई को जारी कर दी गई।
सूत्रों के मुताबिक कोलकाता लैब का रिफाइंड ऑयल के नमूनों का विश्लेषण और भी ज्यादा चौंकाने वाला था। लैब की रिपोर्ट में रिफाइंड ऑयल को नकली और अखाद्य बताया गया। मगर एफएसडीए के अफसरों ने कोलकाता लैब की रिपोर्ट पर भी ऑयल कंपनी से ‘सौदा’ कर लिया। 20 मई को जारी हुई यह रिपोर्ट ढाई महीने से जिला अभिहित अधिकारी के कार्यालय में दबी रही। इस बीच एफएसडीए अफसरों ने लालचंद एग्रो ऑयल कंपनी का स्टॉक सीज करना तो दूर कंपनी का निरीक्षण तक नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक इस बीच कंपनी ने इसका फायदा उठाकर अपना सारा संदिग्ध स्टॉक मार्केट में खपा दिया। जिस रिफाइंड ऑयल को दो-दो प्रयोगशालाओं में नकली और असुरक्षित बताया गया था, वह लोगों के किचन में पहुंचकर खप गया।
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उच्चाधिकारियों से भी छिपाई रिपोर्ट, सिटी मजिस्ट्रेट ने लगाई क्लास
रिफाइंड ऑयल की लैब रिपोर्ट की जानकारी अपने मुख्यालय के साथ एफएसडीए अफसरों ने डीएम और सहायक आयुक्त तक को नहीं दी गई। रिपोर्ट दबाने की जानकारी बृहस्पतिवार को आखिर सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार तक पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा को अपने दफ्तर में तलब कर उनकी जमकर क्लास ली। सिटी मजिस्ट्रेट ने जिला अभिहित अधिकारी से लैब की रिपोर्ट पर कार्रवाई न करने की वजह पूछी तो वह बगलें झांकने लगे। सिटी मजिस्ट्रेट ने उनकी जमकर फटकार लगाई और लैब की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने का यह गंभीर मामला है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोलकाता लैब की रिपोर्ट तो चौंकाने वाली है। एफएसडीए कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जा रही है।
- महेंद्र कुमार सिंह, एडीएम सिटी
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लालचंद एग्रो ऑयल कंपनी पर एफएसडीए के जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा के नेतृत्व में फरवरी में होली से ऐन पहले छापा मारकर रिफाइंड ऑयल के नमूने भरे गए थे। इन नमूनों को परीक्षण के लिए लखनऊ की लैब को भेजा गया जिसने अपनी रिपोर्ट में इस तेल को घटिया और असुरक्षित करार दिया। लखनऊ लैब की यह रिपोर्ट यहां एफएसडीए के पास पहुंचने के बाद भी ऑयल कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक लैप की यह रिपोर्ट अनाधिकारिक तौर पर ऑयल कंपनी के मालिक को उपलब्ध करा दी गई और उससे नमूनों की दोबारा जांच के लिए लिखापढ़ी कराकर रिफाइंड ऑयल के नमूनों को दोबारा जांच के लिए कोलकाता की रेफरल फूड लैब भेज दिया गया। कोलकाता लैब के निदेशक की ओर से भी इन नमूनों की रिपोर्ट 20 मई को जारी कर दी गई।
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सूत्रों के मुताबिक कोलकाता लैब का रिफाइंड ऑयल के नमूनों का विश्लेषण और भी ज्यादा चौंकाने वाला था। लैब की रिपोर्ट में रिफाइंड ऑयल को नकली और अखाद्य बताया गया। मगर एफएसडीए के अफसरों ने कोलकाता लैब की रिपोर्ट पर भी ऑयल कंपनी से ‘सौदा’ कर लिया। 20 मई को जारी हुई यह रिपोर्ट ढाई महीने से जिला अभिहित अधिकारी के कार्यालय में दबी रही। इस बीच एफएसडीए अफसरों ने लालचंद एग्रो ऑयल कंपनी का स्टॉक सीज करना तो दूर कंपनी का निरीक्षण तक नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक इस बीच कंपनी ने इसका फायदा उठाकर अपना सारा संदिग्ध स्टॉक मार्केट में खपा दिया। जिस रिफाइंड ऑयल को दो-दो प्रयोगशालाओं में नकली और असुरक्षित बताया गया था, वह लोगों के किचन में पहुंचकर खप गया।
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उच्चाधिकारियों से भी छिपाई रिपोर्ट, सिटी मजिस्ट्रेट ने लगाई क्लास
रिफाइंड ऑयल की लैब रिपोर्ट की जानकारी अपने मुख्यालय के साथ एफएसडीए अफसरों ने डीएम और सहायक आयुक्त तक को नहीं दी गई। रिपोर्ट दबाने की जानकारी बृहस्पतिवार को आखिर सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार तक पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा को अपने दफ्तर में तलब कर उनकी जमकर क्लास ली। सिटी मजिस्ट्रेट ने जिला अभिहित अधिकारी से लैब की रिपोर्ट पर कार्रवाई न करने की वजह पूछी तो वह बगलें झांकने लगे। सिटी मजिस्ट्रेट ने उनकी जमकर फटकार लगाई और लैब की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने का यह गंभीर मामला है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोलकाता लैब की रिपोर्ट तो चौंकाने वाली है। एफएसडीए कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जा रही है।
- महेंद्र कुमार सिंह, एडीएम सिटी