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दस मिनट पहले चहक रहे थे, फिर अचानक हमेशा के लिए खामोश
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बरेली। लंबे सफर पर निकले दोस्तों ने सिर्फ दस मिनट पहले साथ बैठकर चाय पी थी। ऐसा मौका काफी समय बाद मिला था, लिहाजा सभी खूब चहक रहे थे लेकिन कुछ ही पल बाद पांच दोस्तों ने हमेशा के लिए विदाई ले ली। पीछे कार में आ रहे दोस्तों ने जब दुर्घटनाग्रस्त कार देखी तो होश उड़ गए। कुछ पल के लिए तो उनकी जुबान से कोई शब्द ही नहीं निकला।
रूंधे गले से याकूब ने बताया कि हादसे से पहले उन सबने फतेहगंज टोल प्लाजा के पास रुककर एक साथ चाय पी थी। वहां करीब आधा घंटे रुके, इस दौरान सभी आपस में हंसी-मजाक कर रहे थे। वहां से चलने पर सगीर और उनके साथ बैठे दोस्तों की कार आगे निकल गई। वे लोग करीब डेढ़ किलोमीटर पीछे रह गए। कार न दिखने पर उन्होंने सगीर को फोन किया तो उन्होंने बताया कि ज्यादा दूर नहीं हैं, रास्ते में मिल जाएंगे। यह बात होने के कुछ ही मिनट बाद लालपुर चौराहे पर उन्होंने भीड़ देखी तो चौंक गए।
अंधेरा होनेे से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, इस बात कोई अंदेशा भी नहीं था कि उन्हीं के दोस्तों की कार दुर्घटनाग्रस्त हुई होगी। लेकिन नजदीक पहुंचे तो सभी दोस्तों के होश उड़ गए। दुर्घटनाग्रस्त कार दोस्तों की ही थी। अपनी कार से उतरकर देखा तो पता चला कि पांचों दोस्त उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर जा चुके हैं। काफी देर सदमे में रहने के बाद कांपते हाथों से उन्होंने अजीज दोस्तों की लाशों को बाहर निकाला। याकूब यह पूरा मंजर बताते हुए भी पूरे समय कांपते रहे।
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रूंधे गले से याकूब ने बताया कि हादसे से पहले उन सबने फतेहगंज टोल प्लाजा के पास रुककर एक साथ चाय पी थी। वहां करीब आधा घंटे रुके, इस दौरान सभी आपस में हंसी-मजाक कर रहे थे। वहां से चलने पर सगीर और उनके साथ बैठे दोस्तों की कार आगे निकल गई। वे लोग करीब डेढ़ किलोमीटर पीछे रह गए। कार न दिखने पर उन्होंने सगीर को फोन किया तो उन्होंने बताया कि ज्यादा दूर नहीं हैं, रास्ते में मिल जाएंगे। यह बात होने के कुछ ही मिनट बाद लालपुर चौराहे पर उन्होंने भीड़ देखी तो चौंक गए।
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अंधेरा होनेे से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, इस बात कोई अंदेशा भी नहीं था कि उन्हीं के दोस्तों की कार दुर्घटनाग्रस्त हुई होगी। लेकिन नजदीक पहुंचे तो सभी दोस्तों के होश उड़ गए। दुर्घटनाग्रस्त कार दोस्तों की ही थी। अपनी कार से उतरकर देखा तो पता चला कि पांचों दोस्त उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर जा चुके हैं। काफी देर सदमे में रहने के बाद कांपते हाथों से उन्होंने अजीज दोस्तों की लाशों को बाहर निकाला। याकूब यह पूरा मंजर बताते हुए भी पूरे समय कांपते रहे।
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