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Bareilly News: पहले एसई से मिली क्लीन चिट, अब उन्हीं के अधीनस्थ को दे दी जांच
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बरेली। नगर निगम के नए भवन की गुणवत्ता की जांच के लिए मंडलायुक्त की ओर से गठित टीम पर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व में हुई जांच में पीडब्ल्यूडी के एसई (अधीक्षण अभियंता) फर्म को क्लीन चिट दे चुके हैं। अब उन्हीं के अधीनस्थ एक्सईएन को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में पार्षदों ने इसको लेकर संदेह जताया है। जांच समिति में एनबीसी (नेशनल बिल्डिंग कोड) के अधिकारियों के शामिल नहीं होने पर भी सवाल उठाया।
नगर निगम के नए भवन की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। मंडलायुक्त के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी, बिजली निगम, स्मार्ट सिटी व अग्निशमन विभाग के अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं। इससे पहले राइट्स और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बिल्डिंग की जांच कर चुके हैं, जिसमें फर्म को क्लीन चिट मिली थी। अब जांच समिति में एसई के अधीनस्थ एक्सईएन शशांक भार्गव को शामिल किया गया है। इसको लेकर पार्षदों ने सवाल खड़े किए हैं कि आखिरकार अपने ही उच्चाधिकरी की रिपोर्ट को एक्सईएन कैसे खारिज कर सकते हैं?
अग्निशमन विभाग की टीम ने जांच कर बनाई रिपोर्ट
बृहस्पतिवार को अग्निशमन विभाग की टीम ने भवन का निरीक्षण कर फायर एनओसी और आग से बचाव के लिए किए गए इंतजामों को परखा। इसको लेकर रिपोर्ट भी बनाई है। जानकारी के मुताबिक सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा को बिल्डिंग में कई कमियां मिली हैं। उन्होंने प्रोजेक्ट मैनेजर अमित टमटा काे सुधार कराने के लिए कहा है। रिपोर्ट में भी इन कमियों का जिक्र किया गया है। पीडब्ल्यूडी व निर्माण विभाग के अधिकारियों की टीम ने बुधवार को भवन का निरीक्षण कर प्रोजेक्ट मैनेजर आदि से पूछताछ की थी।
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...इतपे में तो फ्लाईओवर बन जाता
18 करोड़ की लागत से बिल्डिंग नहीं बन सकी, इतने में तो फ्लाईओवर बन जाता। शुरू से ही इसके निर्माण में कमीशन खोरी हावी रही। गुणवत्ता पर सवाल उठे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब पहले जांच करने वाले अधिकारी के अधीनस्थ को जांच सौंप दी है। - राजेश अग्रवाल, पार्षद, वार्ड 35
एसई के अधीनस्थ अधिकारी को जांच देना संदेह का सबसे बड़ा कारण है। अपने ही उच्चाधिकारी की जांच रिपोर्ट को काटने में भी उस अधिकारी को दिक्कत होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे कुछ कह सकेंगे। - छंगामल मौर्य, पार्षद, वार्ड छह
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नई बिल्डिंग की गुणवत्ता की जांच चल रही है। समिति मंडलायुक्त की ओर से गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। बृहस्पतिवार को भी टीम जांच के लिए पहुंची थी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
संवाद
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नगर निगम के नए भवन की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। मंडलायुक्त के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी, बिजली निगम, स्मार्ट सिटी व अग्निशमन विभाग के अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं। इससे पहले राइट्स और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बिल्डिंग की जांच कर चुके हैं, जिसमें फर्म को क्लीन चिट मिली थी। अब जांच समिति में एसई के अधीनस्थ एक्सईएन शशांक भार्गव को शामिल किया गया है। इसको लेकर पार्षदों ने सवाल खड़े किए हैं कि आखिरकार अपने ही उच्चाधिकरी की रिपोर्ट को एक्सईएन कैसे खारिज कर सकते हैं?
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अग्निशमन विभाग की टीम ने जांच कर बनाई रिपोर्ट
बृहस्पतिवार को अग्निशमन विभाग की टीम ने भवन का निरीक्षण कर फायर एनओसी और आग से बचाव के लिए किए गए इंतजामों को परखा। इसको लेकर रिपोर्ट भी बनाई है। जानकारी के मुताबिक सीएफओ चंद्र मोहन शर्मा को बिल्डिंग में कई कमियां मिली हैं। उन्होंने प्रोजेक्ट मैनेजर अमित टमटा काे सुधार कराने के लिए कहा है। रिपोर्ट में भी इन कमियों का जिक्र किया गया है। पीडब्ल्यूडी व निर्माण विभाग के अधिकारियों की टीम ने बुधवार को भवन का निरीक्षण कर प्रोजेक्ट मैनेजर आदि से पूछताछ की थी।
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...इतपे में तो फ्लाईओवर बन जाता
18 करोड़ की लागत से बिल्डिंग नहीं बन सकी, इतने में तो फ्लाईओवर बन जाता। शुरू से ही इसके निर्माण में कमीशन खोरी हावी रही। गुणवत्ता पर सवाल उठे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब पहले जांच करने वाले अधिकारी के अधीनस्थ को जांच सौंप दी है। - राजेश अग्रवाल, पार्षद, वार्ड 35
एसई के अधीनस्थ अधिकारी को जांच देना संदेह का सबसे बड़ा कारण है। अपने ही उच्चाधिकारी की जांच रिपोर्ट को काटने में भी उस अधिकारी को दिक्कत होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे कुछ कह सकेंगे। - छंगामल मौर्य, पार्षद, वार्ड छह
नई बिल्डिंग की गुणवत्ता की जांच चल रही है। समिति मंडलायुक्त की ओर से गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। बृहस्पतिवार को भी टीम जांच के लिए पहुंची थी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
संवाद