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आतिशबाजी : चार गुना से ज्यादा बढ़ गया वायु प्रदूषण
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ध्वनि प्रदूषण में भी हुआ दोगुने के इजाफा, जहरीली हुई हवा
दो दिन पहले 96 था एक्यूआई, पांच नवंबर को 410 के खतरना स्तर पर पहुंचा
54 डेसीबल से बढ़कर करीब 104 डेसीबल दर्ज हुआ ध्वनि प्रदूषण का स्तर
बरेली। पिछले दिनों हुई तेज बारिश से हवा में घुला जहर धुल गया था, मगर दिवाली पर जमकर हुई आतिशबाजी से अब फिर प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार करीब चार दिनों में वायु प्रदूषण का स्तर चार सौ के पार हो गया है। ध्वनि प्रदूषण भी दोगुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है।
चार दिन पहले प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार बरेली में मापे गए वायु प्रदूषण का स्तर 96 यानी सामान्य था। लिहाजा बरेली में हरित पटाखों को जलाने की अनुमति दे दी गई थी। बरेली कॉलेज के बॉटनी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक खरे के मुताबिक अक्तूबर में कई दिनों रुक रुककर बारिश होती रही। इसकी वजह से प्रदूषण के कण बारिश के साथ जमीन पर गिरे और वायु गुणवत्ता बेहतर बनी रही। करीब 10 साल बाद अक्तूबर में हुई तेज बारिश से नमी भी हावी रही। लिहाजा, प्रदूषण के कण दूर तक फैलने के बजाय कुछ ही दूरी तक स्थिर रहे और फिर जमीन में मिल गए।
बारिश की वजह से एक्यूआई 96 दर्ज हो रहा था। हालांकि, अब आतिशबाजी की वजह से यह आंकड़ा 410 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञ बारिश होने पर ही प्रदूषण के स्तर में सुधार की बात कह रहे हैं। उनका मानना है कि अगर बारिश नहीं हुई तो वायुमंडल की नमी के साथ मिलकर यह कण सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करेंगे और स्वास्थ्य को प्रभावित करेंगे। सांस के रोगियों की सेहत के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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निर्माण कार्य पूरा होने से भी मिल रही राहत
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित सिंह के मुताबिक प्रदूषण का स्तर जिले में मॉडरेट ही दर्ज हो रहा था, जो दीवाली पर जले पटाखों की वजह से बढ़ा है। उन्होंने करीब 15 दिनों में प्रदूषण का स्तर सामान्य होने की उम्मीद जताई है। बताया कि पूर्व में शहर में लगातार निर्माण कार्य चल रहे थे, जो एक्यूआई का स्तर बढ़ा रहे थे। अब गिनेचुने ही निर्माण कार्य हो रहे हैं, इसलिए प्रदूषण से राहत मिल रही है।
दो गुना तक बढ़ गया ध्वनि ऊर्जा का स्तर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 29 अक्तूबर को बड़ी बमनपुरी स्थित मलूकपुर चौकी के पास 56.7 डेसीबल सौ फुटा रोड स्थित मिथिलापुरी के पास 53.8 डेसीबल ध्वनि ऊर्जा का स्तर दर्ज हुआ था। जो पांच नवंबर को क्रमवार 109.4 और 104.7 डेसीबल दर्ज हुआ है।
दिवाली पर कुछ यूं बढ़ा हवा में प्रदूषण
पीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय के वीके राजपूत के मुताबिक 31 अक्तूबर को शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 91.0 दर्ज हुआ था, जो एक नवंबर को 96, दो नवंबर को 110 और तीन नवंबर को छोटी दीपावली पर 135 दर्ज हुआ। पांच नवंबर को 410 पर जा पहुंचा है। यह स्तर सेहत के लिए बेहद घातक है।
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दो दिन पहले 96 था एक्यूआई, पांच नवंबर को 410 के खतरना स्तर पर पहुंचा
54 डेसीबल से बढ़कर करीब 104 डेसीबल दर्ज हुआ ध्वनि प्रदूषण का स्तर
बरेली। पिछले दिनों हुई तेज बारिश से हवा में घुला जहर धुल गया था, मगर दिवाली पर जमकर हुई आतिशबाजी से अब फिर प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार करीब चार दिनों में वायु प्रदूषण का स्तर चार सौ के पार हो गया है। ध्वनि प्रदूषण भी दोगुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है।
चार दिन पहले प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार बरेली में मापे गए वायु प्रदूषण का स्तर 96 यानी सामान्य था। लिहाजा बरेली में हरित पटाखों को जलाने की अनुमति दे दी गई थी। बरेली कॉलेज के बॉटनी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक खरे के मुताबिक अक्तूबर में कई दिनों रुक रुककर बारिश होती रही। इसकी वजह से प्रदूषण के कण बारिश के साथ जमीन पर गिरे और वायु गुणवत्ता बेहतर बनी रही। करीब 10 साल बाद अक्तूबर में हुई तेज बारिश से नमी भी हावी रही। लिहाजा, प्रदूषण के कण दूर तक फैलने के बजाय कुछ ही दूरी तक स्थिर रहे और फिर जमीन में मिल गए।
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बारिश की वजह से एक्यूआई 96 दर्ज हो रहा था। हालांकि, अब आतिशबाजी की वजह से यह आंकड़ा 410 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञ बारिश होने पर ही प्रदूषण के स्तर में सुधार की बात कह रहे हैं। उनका मानना है कि अगर बारिश नहीं हुई तो वायुमंडल की नमी के साथ मिलकर यह कण सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करेंगे और स्वास्थ्य को प्रभावित करेंगे। सांस के रोगियों की सेहत के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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निर्माण कार्य पूरा होने से भी मिल रही राहत
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित सिंह के मुताबिक प्रदूषण का स्तर जिले में मॉडरेट ही दर्ज हो रहा था, जो दीवाली पर जले पटाखों की वजह से बढ़ा है। उन्होंने करीब 15 दिनों में प्रदूषण का स्तर सामान्य होने की उम्मीद जताई है। बताया कि पूर्व में शहर में लगातार निर्माण कार्य चल रहे थे, जो एक्यूआई का स्तर बढ़ा रहे थे। अब गिनेचुने ही निर्माण कार्य हो रहे हैं, इसलिए प्रदूषण से राहत मिल रही है।
दो गुना तक बढ़ गया ध्वनि ऊर्जा का स्तर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 29 अक्तूबर को बड़ी बमनपुरी स्थित मलूकपुर चौकी के पास 56.7 डेसीबल सौ फुटा रोड स्थित मिथिलापुरी के पास 53.8 डेसीबल ध्वनि ऊर्जा का स्तर दर्ज हुआ था। जो पांच नवंबर को क्रमवार 109.4 और 104.7 डेसीबल दर्ज हुआ है।
दिवाली पर कुछ यूं बढ़ा हवा में प्रदूषण
पीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय के वीके राजपूत के मुताबिक 31 अक्तूबर को शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 91.0 दर्ज हुआ था, जो एक नवंबर को 96, दो नवंबर को 110 और तीन नवंबर को छोटी दीपावली पर 135 दर्ज हुआ। पांच नवंबर को 410 पर जा पहुंचा है। यह स्तर सेहत के लिए बेहद घातक है।